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सुखवंत सुसाइड केस में FIR काठगोदाम ट्रांसफर, परिवार से उधम सिंह नगर पुलिस दूर

एसआईटी ने होटल और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, तकनीकी और कानूनी पहलुओं की जांच तेज, परिवार को मानसिक दबाव से बचाने के लिए उधम सिंह नगर पुलिस संपर्क से हटाई गई।

हल्द्वानी। शनिवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले की जांच कर रही एसआईटी अचानक शहर पहुंची। इस मामले को लेकर पहले से ही प्रदेशभर में संवेदनशील माहौल बना हुआ है और ऐसे में एसआईटी की हल्द्वानी आमद को जांच की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। टीम ने सबसे पहले उस होटल का निरीक्षण किया, जहां सुखवंत सिंह ने अपनी जीवनलीला समाप्त की थी। होटल परिसर के भीतर और आसपास की गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन किया गया। कमरे की स्थिति, होटल स्टाफ से पूछताछ, उपलब्ध रजिस्टर, सीसीटीवी कवरेज और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तकनीकी पहलुओं को जांच के दायरे में लिया गया। एसआईटी अधिकारियों ने किसी भी संभावना को नजरअंदाज न करते हुए मौके से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी को संकलित किया, ताकि जांच में कोई कड़ी अधूरी न रह जाए और सच्चाई सामने आ सके।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच से जुड़े प्रशासनिक फैसले भी तेजी से लिए गए हैं। आईजी नीलेश आनंद भरणे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि काशीपुर के आईटीआई थाने में दर्ज प्राथमिकी को अब काठगोदाम थाने में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस कदम को निष्पक्षता की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है। उनका कहना था कि जांच को किसी भी प्रकार के स्थानीय दबाव या प्रभाव से मुक्त रखने के लिए यह आवश्यक था। काठगोदाम थाना क्षेत्र में केस ट्रांसफर होने से अब पूरी जांच एक नए सिरे से, स्वतंत्र माहौल में आगे बढ़ेगी। इस फैसले से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शासन और पुलिस प्रशासन इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा और हर स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

आईजी नीलेश आनंद भरणे ने इस दौरान एक और अहम निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि उधम सिंह नगर पुलिस अब मृतक सुखवंत सिंह के परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला परिवार को मानसिक दबाव से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसके साथ ही मृतक के घर पर पहले से तैनात उधम सिंह नगर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को हटाकर किसी अन्य जिले की पुलिस फोर्स को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से परिवार को निष्पक्ष माहौल मिलेगा और वे बिना किसी भय या दबाव के अपने बयान दे सकेंगे। यह निर्णय भी जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

एसआईटी की आगामी कार्ययोजना को लेकर भी आईजी नीलेश आनंद भरणे ने जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रविवार को एसआईटी की टीम काशीपुर जाकर सुखवंत सिंह के घर पहुंचेगी। वहां मृतक के परिजनों से मुलाकात कर उनके विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे। परिवार के सदस्यों से घटना से जुड़ी हर जानकारी, उनके आरोपों और आशंकाओं को गंभीरता से सुना जाएगा। इसके साथ ही उस वीडियो फुटेज में नजर आ रहे सभी पुलिसकर्मियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे, जो इस पूरे मामले में सामने आए हैं। वीडियो में दिखे हर पहलू की तकनीकी और कानूनी जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की सच्चाई दब न सके। उन्होंने दोहराया कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और कानून के दायरे में रहकर की जाएगी।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील और गंभीर है। जानकारी के अनुसार काशीपुर निवासी सुखवंत सिंह ने 10 जनवरी की रात नैनीताल जिले के गौलापार इलाके में स्थित एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने न केवल उनके परिवार को बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसने इस मामले को और भी संगीन बना दिया। वीडियो सामने आने के बाद कई सवाल उठने लगे और पुलिस की भूमिका पर भी उंगलियां उठीं। वीडियो में सुखवंत सिंह ने अपने साथ हुई कथित धोखाधड़ी का जिक्र करते हुए भावुक और आक्रोशित शब्दों में अपनी पीड़ा जाहिर की थी।

वीडियो में सुखवंत सिंह ने बताया था कि जमीन खरीदने के नाम पर उनके साथ करीब चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि जब वह इस मामले की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय डराया और धमकाया गया। सुखवंत सिंह ने वीडियो में कई पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके बाद यह मामला सिर्फ आत्महत्या तक सीमित न रहकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला बन गया। वीडियो के सार्वजनिक होते ही प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई।

इन आरोपों के बाद पुलिस प्रशासन ने भी कार्रवाई करते हुए काशीपुर के आईटीआई थाने के प्रभारी समेत एक अन्य पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया। इसके अलावा पौगा चौकी प्रभारी सहित दस पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया। इतना ही नहीं, सभी बारह पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर कुमाऊं रेंज से गढ़वाल रेंज में कर दिया गया, ताकि जांच प्रभावित न हो। इन कार्रवाइयों को प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा गया, लेकिन इसके बावजूद मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी जांच की मांग और तेज हो गई थी।

सुखवंत सिंह के भाई की तहरीर पर पुलिस ने काशीपुर के आईटीआई थाने में कुल 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। इन आरोपियों पर धोखाधड़ी और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सभी 26 आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामले की कानूनी जटिलता और बढ़ गई है। वहीं शासन स्तर से भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी किए गए थे।

मजिस्ट्रेट जांच की जिम्मेदारी कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी इस मामले की जांच को लेकर कई बदलाव किए गए। पहले कुमाऊं आईजी के नेतृत्व में एक एसआईटी गठित की गई थी और साथ ही उधम सिंह नगर के एसएसपी द्वारा भी अलग से एक एसआईटी बनाई गई थी। हालांकि बाद में पुलिस मुख्यालय ने दोनों एसआईटी को रद्द करते हुए आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे के नेतृत्व में पांच सदस्यीय नई एसआईटी का गठन किया। वर्तमान में यही एसआईटी इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही है और हर पहलू को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

पूरे घटनाक्रम ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक किसान द्वारा लगाए गए आरोप, आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किया गया वीडियो और पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों ने इस मामले को राज्य की राजनीति और प्रशासन के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं कि वह किस निष्कर्ष पर पहुंचती है और क्या सच सामने आता है। जांच के नतीजे न केवल सुखवंत सिंह के परिवार को न्याय दिलाने की दिशा तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि प्रशासनिक तंत्र में सुधार की कितनी जरूरत है और आगे ऐसे मामलों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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