शीतलाखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ों की सुंदर वादियों में बसा शांत और सुकून से भरा शीतलाखेत आज कला और सिनेमा के रंगों से सराबोर हो उठा, जब यहां उत्तराखण्ड की आत्मा को दर्शाने वाली शॉर्ट फिल्म ’’“ऐना (।पदं)”’’ का भव्य मुहूर्त सम्पन्न हुआ। लोक संस्कृति, मानवीय रिश्तों और समाज के संवेदनशील पहलुओं को केंद्र में रखकर बन रही यह फिल्म न केवल उत्तराखण्ड के हृदय की आवाज़ है, बल्कि पहाड़ की मिट्टी में बसे भावनाओं को भी परदे पर उकेरने का प्रयास है। सिद्धि सिने उत्तराखण्ड के बैनर तले बन रही इस फिल्म का मुहूर्त शॉट एक ऐतिहासिक क्षण बन गया, जब बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता ’’हेमंत पाण्डेय’’ ने पारंपरिक तरीके से नारियल फोड़कर और कैमरे का पहला शॉट देकर इसका शुभारंभ किया। फिल्म में हेमंत पाण्डेय ’’“मासाब जी”’’ की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जो कहानी की आत्मा को गहराई और जीवंतता प्रदान करेंगे। शीतलाखेत के पहाड़ी वातावरण में हुई इस शुरुआत ने यह साफ कर दिया कि सिनेमा अब महानगरों की सीमा से निकलकर गांवों की गलियों तक अपनी रोशनी फैला रहा है।
मुहूर्त के इस अवसर पर पूरा माहौल उत्साह और उल्लास से भरा रहा। फिल्म के निर्माता ’’पूजा सिंह’’, लेखक एवं निर्देशक ’’जगदीश तिवारी’’, सिनेमैटोग्राफर ’’कुलदीप रावत’’, प्रोडक्शन कंट्रोलर ’’गिरीश भट्ट’’ और ’’भुवन चन्द जोशी’’, आर्ट डायरेक्टर ’’बसंत धारीवाल’’, मेकअप एवं ड्रेस इंचार्ज ’’सोनाली’’, साउंड प्रभारी ’’जय प्रकाश’’, लाइट टीम के ’’विक्रम’’ व ड्रोन ऑपरेटर ’’विषाल’’, और फोकस पुलर ’’सुमित’’ सहित पूरी तकनीकी टीम उपस्थित रही। हर सदस्य के चेहरे पर एक नई ऊर्जा और उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी। यह आयोजन सिर्फ एक फिल्म के आरंभ का नहीं बल्कि उत्तराखण्ड की सिनेमा यात्रा के एक नए अध्याय का प्रतीक था। स्थानीय लोगों ने भी फिल्म के शुभारंभ को अपने त्योहार की तरह मनाया, और मुहूर्त शॉट के दौरान तालियों और जयकारों की गूंज से पूरा वातावरण गूंज उठा।
फिल्म की स्टारकास्ट भी अपने आप में बेहद खास है। इसमें ’’वीरेन्द्र पुंडियाल’’, ’’अंकिता पार्थिहार’’, ’’हेमंत पाण्डेय’’, ’’गोपा नायल’’, ’’राधा तिवारी’’, ’’भुवन चन्द जोशी’’, ’’गिरीश भट्ट’’ और बाल कलाकार ’’भावेश भट्ट’’ अपनी-अपनी भूमिकाओं से कहानी को जीवंत करेंगे। फिल्म की वेशभूषा और आभूषण की जिम्मेदारी ’’गोपा नायल’’ और ’’राधा तिवारी’’ ने बखूबी निभाई है, जिन्होंने पहाड़ी जीवन की सादगी और पारंपरिक रंगों को कपड़ों में खूबसूरती से पिरोया है। वहीं फिल्म यूनिट के खानपान की व्यवस्था ’’भटगाल भट्ट कैंप’’ ने की, जिन्होंने सभी कलाकारों और तकनीशियनों को घर जैसा स्वाद और आतिथ्य दिया। हर व्यक्ति के योगदान ने इस मुहूर्त को एक यादगार आयोजन बना दिया कृ एक ऐसा क्षण जो आने वाले समय में उत्तराखण्ड की सिनेमा यात्रा का अहम पड़ाव माना जाएगा।
“’’ऐना (।पदं)’’” सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि पहाड़ की आत्मा का प्रतिबिंब है। यह उत्तराखण्ड के उन मानवीय रिश्तों की बात करती है जो शहरों की चमक में कहीं खो गए हैं। फिल्म का मूल भाव इंसान और समाज के बीच के उस ‘दर्पण’ को दर्शाना है, जिसमें हर व्यक्ति अपनी कहानी, अपने संघर्ष और अपनी संवेदनाओं को देख सके। निर्देशक ’’जगदीश तिवारी’’ का कहना है कि “ऐना” उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को सिर्फ दिखाएगी नहीं, बल्कि उसे महसूस करने का मौका देगी। कहानी में जहां एक ओर ग्रामीण जीवन की सरलता झलकती है, वहीं मानवीय भावनाओं की जटिल परतें भी सामने आती हैं। फिल्म के कई दृश्य स्थानीय घरों, खेतों और पहाड़ी रास्तों में फिल्माए जा रहे हैं ताकि दर्शक उस असली ‘पहाड़पन’ को महसूस कर सकें जो उत्तराखण्ड की पहचान है।
मुहूर्त के मौके पर मौजूद स्थानीय ’’ग्राम प्रधान’’ और गांववासियों ने भी फिल्म टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई लोगों ने कहा कि यह पहला मौका है जब उनके गांव में इस स्तर की फिल्म शूट हो रही है, जिससे स्थानीय युवाओं में भी उत्साह और गर्व की भावना जगी है। कुछ युवाओं को फिल्म की टीम ने असिस्टेंट के रूप में जोड़ा भी, ताकि वे तकनीकी अनुभव प्राप्त कर सकें। इस पहल ने यह साबित किया कि “ऐना” केवल एक कलात्मक रचना नहीं बल्कि एक सामाजिक मिशन भी है, जो पहाड़ी युवाओं को फिल्म जगत से जोड़ने का सेतु बनेगा। पहाड़ की ताजी हवा, हरियाली और लोगों की आत्मीयता ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया, मानो प्रकृति खुद इस कहानी का हिस्सा बन गई हो।
फिल्म के शुभारंभ के बाद अभिनेता हेमंत पाण्डेय ने कहा कि उन्हें इस प्रोजेक्ट से जुड़ना अपने लिए गर्व और आत्मसंतोष का क्षण लगता है, क्योंकि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज के लिए एक सार्थक संदेश लेकर आ रही है। उन्होंने कहा कि “उत्तराखण्ड केवल मनमोहक पर्वतों और हरे-भरे जंगलों का प्रदेश नहीं है, बल्कि यहां की मिट्टी में बसी संस्कृति, परंपराएं और मानवीय संवेदनाएं इतनी गहरी हैं कि उन्हें शब्दों में बयान करना कठिन है। ‘ऐना’ उन भावनाओं का सजीव प्रतिबिंब है जो हर इंसान के भीतर छिपी सच्चाई को दर्शाती हैं।” अभिनेता हेमंत पाण्डेय ने कहा कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी सादगी और यथार्थता है, जो दर्शकों को अपनी कहानी लगेगी। निर्देशक जगदीश तिवारी ने भी कहा कि फिल्म का हर पात्र और संवाद आम लोगों के जीवन से प्रेरित है, जो दर्शकों के दिलों में गहराई से उतरेंगे और लंबे समय तक प्रभाव छोड़ेंगे।
उत्तराखण्ड में सिनेमा का यह नया अध्याय इस बात का जीवंत उदाहरण है कि अब यहां के फिल्मकार अपनी मिट्टी की कहानियों को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह मुहूर्त शॉट केवल एक शॉर्ट फिल्म की शुरुआत नहीं था, बल्कि उस आत्मविश्वास का प्रतीक भी बना जिसने यह साबित किया कि पहाड़ की धरती में जन्मी कहानियां भी राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं। फिल्म “ऐना” के माध्यम से स्थानीय कलाकारों को न सिर्फ अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, बल्कि यह परियोजना उत्तराखण्ड के फिल्म टूरिज्म को भी नई दिशा देगी। यह पहल स्थानीय युवाओं को सृजनात्मक क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सिनेमा के ज़रिए व्यापक स्तर पर स्थापित करेगी। यह फिल्म यह भी दर्शाएगी कि उत्तराखण्ड की धरती केवल प्राकृतिक सौंदर्य की नहीं, बल्कि समृद्ध परंपराओं और मानवीय संवेदनाओं की भी केंद्र है।
अंततः, “ऐना” की शुरुआत ने यह साबित कर दिया है कि जब संवेदनाएं, संस्कृति और सिनेमा एक साथ आते हैं, तो एक ऐसा दृश्य बनता है जो सिर्फ देखा नहीं, महसूस किया जाता है। शीतलाखेत में हुई इस फिल्म की शुरुआत ने यह संदेश दिया कि उत्तराखण्ड केवल प्रकृति का नहीं, बल्कि भावनाओं और रचनात्मकता का भी घर है। आने वाले महीनों में जब “ऐना” का प्रदर्शन होगा, तो यह फिल्म निस्संदेह दर्शकों के दिलों में अपनी गहरी छाप छोड़ेगी कृ क्योंकि यह कहानी सिर्फ परदे पर नहीं, बल्कि हर उस दिल में लिखी जाएगी जो रिश्तों और संवेदनाओं की सच्ची तस्वीर देखना चाहता है।



