काशीपुर। शहर बुधवार को उस समय दहशत में डूब गया जब अचानक यह भयावह खबर फैल गई कि नगर के कुंडेश्वरी क्षेत्र स्थित गुरू नानक इंटर कॉलेज में कक्षा 9 के एक छात्र ने अपने ही शिक्षक गगनदीप सिंह कोहली पर गोली चला दी। विद्यालय के शांत वातावरण में घटी इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि पूरे शिक्षा जगत को झकझोर दिया। 35 वर्षीय गगनदीप सिंह कोहली को गोली दाहिने कंधे के पीछे लगी और उन्हें तत्काल चामुंडा मंदिर के पास कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे आईसीयू में उपचाराधीन हैं और फिलहाल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। शिक्षक पर हुए इस जानलेवा हमले की गूंज हर तरफ सुनाई दी और लोगों के मन में यह प्रश्न उठने लगे कि आखिरकार एक नाबालिग छात्र किस परिस्थितियों में इस तरह के कदम उठाने पर उतारू हो सकता है। इस घटना के बाद गगनदीप सिंह कोहली के परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके आधार पर छात्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया और जांच शुरू हो गई।
आक्रोश और चिंता का माहौल इतना गहरा गया कि गुरुवार को तराई इंडिपेंडेंट स्कूल्स वेलफेयर सोसाइटी, ऊधमसिंह नगर इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन और उत्तराखंड बोर्ड रजिस्टर्ड स्कूल एसोसिएशन काशीपुर ने स्थानीय प्रशासन के साथ एक आपात बैठक बुलाई। नगर के तमाम प्रमुख विद्यालयों के प्रिंसिपल, अध्यापक और अध्यापिकाओं की भारी मौजूदगी में हुई इस सभा में गुस्से के स्वर साफ सुनाई दिए। शिक्षकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह हमला केवल एक शिक्षक पर नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर है और ऐसी घटनाओं ने अध्यापकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दौरान एसडीएम अभय प्रताप सिंह, एडीएम कौस्तुभ मिश्रा, एसपी अभय सिंह और महापौर दीपक बाली को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें चार बड़ी मांगें रखी गईं। इनमें शिक्षकों की सुरक्षा की गारंटी, दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई, शिक्षकों व निजी स्कूलों की नकारात्मक छवि बनाने से रोक और शिक्षा जगत की गरिमा बनाए रखने के संकल्प की मांग की गई।

गंभीर माहौल उस समय और भावुक हो गया जब कुछ अध्यापकों ने खुद यूनियन की नीतियों पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि शिक्षक दिन-रात मेहनत करके विद्यार्थियों को अपने बच्चों की तरह शिक्षा देते हैं, लेकिन वही छात्र अगर अध्यापक पर गोली चला दें तो यह समाज और अभिभावकों की परवरिश दोनों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है। शिक्षकों की पीड़ा से भरी आवाजें यह भी पूछ रही थीं कि आखिर कोई भी अध्यापक पच्चीस हजार की सैलरी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर क्यों हो। उनके शब्दों ने उपस्थित सभी को गहराई से झकझोर दिया। हालांकि इस दौरान एडीएम कौस्तुभ मिश्रा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर वातावरण को शांत करने का प्रयास किया और शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि न्याय में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
सभा में मौजूद महापौर दीपक बाली ने स्पष्ट किया कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं और उन पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दोषी को कानून के अनुसार कठोरतम सजा दिलाई जाएगी ताकि भविष्य में कोई इस तरह की घटना को अंजाम देने की हिम्मत न कर सके। वहीं एडीएम कौस्तुभ मिश्रा, एसपी अभय सिंह और अन्य अधिकारियों ने भी दुख व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि इस मामले में प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ काम करेगा। इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी बी.एस. रावत, सोसाइटी अध्यक्ष अनुराग कुमार सिंह, उपाध्यक्ष पंकज भल्ला, सचिव ललित रौतेला समेत बड़ी संख्या में अध्यापक, अध्यापिकाएं और विद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोग मौजूद रहे।

गौर करने वाली बात यह है कि इंस्टीट्यूशन अधिनियम, प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज टू प्रॉपर्टी एक्ट 2009 के भाग-3 में प्रावधान है कि यदि विद्यालय स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार, धमकी या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होती हैं तो दोषी को तीन वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। बावजूद इसके शिक्षकों का कहना है कि हालात ऐसे हैं कि वे असुरक्षा के साए में पढ़ाने को विवश हैं। कई अध्यापकों ने यह सवाल उठाया कि जब घटना के बाद स्कूल बंद करने का आदेश दिया गया था तो रात 11 बजे अचानक कौन सी सुरक्षा व्यवस्था बदल गई कि सुबह होते ही विद्यालय खोलने का संदेश भेज दिया गया। उनके मुताबिक यह केवल शिक्षा जगत का ही नहीं बल्कि पूरे समाज और प्रशासन का सवाल है कि आखिर कब तक अध्यापक असुरक्षित माहौल में विद्यार्थियों को पढ़ाते रहेंगे।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विद्यालयों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की खामियां अब किसी बड़े खतरे का संकेत बन चुकी हैं। अध्यापकों ने कहा कि कौन जानता है कब कोई छात्र अपने लंच बॉक्स में पिस्तौल लेकर आ जाए और शिक्षा का मंदिर खून-खराबे का गवाह बन जाए। काशीपुर की इस वारदात ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बच्चों की परवरिश और अनुशासन का ढांचा किस दिशा में जा रहा है। उपस्थित शिक्षकों ने यह भी दोहराया कि अब समय आ गया है जब केवल नीतिगत बातें नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि शिक्षा और शिक्षक दोनों की गरिमा को सुरक्षित रखा जा सके।

सभा में एडीएम कौस्तुभ मिश्रा, सीईओ बी.एस. रावत, एएसपी अभय सिंह, एसडीएम अभय प्रताप, प्रभारी निरीक्षक अमर चंद शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी धीरेन्द्र शाहु, पूर्व जिला अध्यक्ष गुंजन सुखीजा, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन जिला अध्यक्ष धालीवाल और जिला सचिव मनोज खेड़ा सहित बड़ी संख्या में स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में इस घटना की कड़ी निंदा की और यह कहा कि यह हमला केवल एक शिक्षक पर नहीं बल्कि पूरे समाज की आत्मा पर आघात है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कानून किस स्तर की सख्ती दिखाता है और समाज इस घटना से किस प्रकार सबक लेता है, क्योंकि शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखना अब केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है।



