काशीपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अलीगंज बुरहानपुर के ग्राम मुंझरपुरी निवासी सरजीत अपनी पत्नी रेनू को दूसरे बच्चे के जन्म के लिए काशीपुर के सरकारी अस्पताल ले गए थे, जहां से उन्हें किसी अन्य अस्पताल रेफर करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें आशा कार्यकत्री ने चंद पैसे के लालच में दोपहर करीब तीन बजे अलीगंज रोड स्थित वरदान हॉस्पिटल भेज दिया। हॉस्पिटल की महिला चिकित्सक ने उन्हें साधारण प्रसव का आश्वासन दिया, लेकिन अगले दिन सुबह पांच बजे बड़ा ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद लगातार ब्लीडिंग शुरू हो गई और रेनू की मौत हो गई। आरोप है कि इसके बाद हॉस्पिटल संचालकों ने सुनियोजित तरीके से उन्हें अन्यत्र रेफर कर दिया, जहां दो अस्पतालों में ले जाने के बाद रेनू को मृत घोषित कर दिया गया। मृतक महिला के परिजनों ने शव लेकर दोबारा वरदान हॉस्पिटल पहुंचकर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमरजीत सिंह साहनी ने मौके पर पहुंचकर मामले की गंभीरता का आकलन किया। उन्होंने बताया कि भारती कराने के बाद हॉस्पिटल में कोई स्टाफ मौजूद नहीं था, जिसके कारण ऑपरेशन के बाद आंतरिक ब्लीडिंग से रेनू की मौत हुई। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि हॉस्पिटल पहले आशीर्वाद हॉस्पिटल के नाम से संचालित था, जिसे सील कर दिया गया था। संचालकों ने नए नाम वरदान हॉस्पिटल से इसे पुनः खोला। इस हॉस्पिटल का लाइसेंस केवल एलोपैथी के नाम से था, जिसका मतलब था कि मरीजों को केवल देखा जा सकता है, भर्ती नहीं किया जा सकता, फिर भी यहां मरीजों को भर्ती कर ऑपरेशन किए जा रहे थे। अधिकारियों ने रजिस्ट्रेशन निरस्त कर हॉस्पिटल को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही हॉस्पिटल संचालकों और संबंधित आशा कार्यकत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
समाजसेवी गगन कांबोज ने हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि डॉ. शिफा तनवीर ने रेनू का ऑपरेशन किया जबकि वह इस कार्य के लिए योग्य नहीं थीं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही और कमीशन की लालच ने एक नवजात को उसकी मां से अलग कर दिया। गगन कांबोज ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि जिन लोगों के पास योग्यता और व्यवस्था नहीं है, वे हॉस्पिटल संचालित कर लोगों की जान से खेल रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों और आशा कार्यकत्रियों पर भी आरोप लगाया कि वे गरीब मरीजों को निजी हॉस्पिटल में भेजकर लाभ कमाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर कमजोरियों को उजागर कर दिया है। नागरिकों में आक्रोश है और वे मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार और प्रशासन ऐसे हॉस्पिटल संचालकों और उनके समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। गगन कांबोज ने चेतावनी दी कि अगर हॉस्पिटल को किसी और नाम से खोला गया तो वह इसे आग के हवाले करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में रेफर करते समय ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
अधिकारी और समाजसेवी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही, अवैध संचालन और निजी लाभ के लिए मरीजों की जान जोखिम में डालना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही है। इस त्रासदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि अस्पतालों की जिम्मेदारी केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मरीजों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। सरकारी और निजी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार और निगरानी की सख्त जरूरत अब और भी स्पष्ट हो गई है।



