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राष्ट्रीय गतका चैंपियनशिप में उत्तराखंड के खिलाड़ियों की शानदार जीत पर खालसा फाउंडेशन ने किया सम्मान

खालसा फाउंडेशन ने प्रदेश के विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित, प्रभजोत सिंह समेत खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर जताया गर्व, भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद जताई

काशीपुर। झारखंड में आयोजित 13वीं राष्ट्रीय गतका चौंपियनशिप में शानदार सफलता हासिल कर उत्तराखंड लौटे खिलाड़ियों का काशीपुर रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया, जहां खालसा फाउंडेशन की टीम ने सभी विजेता खिलाड़ियों को फूल मालाओं से लादकर उनका मनोबल बढ़ाया। खिलाड़ियों के आगमन पर स्टेशन परिसर तालियों और जयघोष से गूंज उठा। उत्साह से भरे इन युवा खिलाड़ियों के चेहरों पर जीत की चमक साफ झलक रही थी। फाउंडेशन की ओर से प्रदेश प्रवक्ता ’’जगमोहन सिंह बंटी’’ ने स्वयं पूरी टीम का स्वागत किया और कहा कि उत्तराखंड के इन युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से यह सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश की धरती पर खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि 13वीं राष्ट्रीय गतका चौंपियनशिप, जो हाल ही में झारखंड में 11 से 13 अक्टूबर तक आयोजित हुई, उसमें राज्य के खिलाड़ियों ने छह स्वर्ण, एक रजत और 16 कांस्य पदक जीतकर उत्तराखंड का नाम ऊँचा किया।

इस प्रतियोगिता में उत्तराखंड की टीम के 20 खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से न केवल राज्य बल्कि देशभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। टीम का नेतृत्व कर रहे असिस्टेंट जनरल सेक्रेटरी और कोच ’’हरप्रीत सिंह’’ ने बताया कि यह प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ के दुर्ग में आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 17 से 18 राज्यों की टीमें शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि मुकाबले बेहद कठिन थे क्योंकि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे राज्यों के खिलाड़ी अपनी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे थे। फिर भी उत्तराखंड की टीम ने अपने दमदार प्रदर्शन से नदकमत-14 कैटेगरी में पूरे भारत में पहला स्थान, नदकमत-17 में दूसरा स्थान और नदकमत-19/20 में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य के खिलाड़ियों की दृढ़ इच्छाशक्ति और वर्षों की मेहनत का परिणाम है।

’’हरप्रीत सिंह’’ ने बताया कि टीम 7 अक्टूबर को काशीपुर से रवाना हुई थी और वहां आयोजित मुकाबलों में 11 तारीख से खेल शुरू हुआ। 15 अक्टूबर को पूरी टीम वापस उत्तराखंड लौटी। उन्होंने बताया कि यह मंच बच्चों के लिए केवल खेल नहीं बल्कि एक परीक्षा थी, जहां पूरे साल की मेहनत और अनुशासन की सच्ची परख हुई। उन्होंने कहा कि ऐसे परिणाम घर बैठकर नहीं मिलते, इसके लिए निरंतर अभ्यास, आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि काशीपुर से गए छह खिलाड़ियों में से तीन ने स्वर्ण पदक और एक ने रजत पदक हासिल किया, जो न केवल काशीपुर बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। कोच ने कहा कि नदकमत-19 कैटेगरी में तीसरे स्थान पर आने का कारण यह रहा कि इस समूह में शामिल कुछ खिलाड़ी अभी अनुभव में थोड़े नए थे, लेकिन उनकी लगन और आत्मविश्वास प्रशंसनीय है।

खिलाड़ी ’’प्रभजोत सिंह’’ ने भी अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में हुए मुकाबलों में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपने राज्य का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि फाइनल मैच उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि उनका सामना छत्तीसगढ़ की टीम से हुआ। लेकिन लगातार अभ्यास और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने जीत दर्ज की। प्रभजोत ने अपने कोच की सराहना करते हुए कहा कि ’’हरप्रीत सिंह’’ ने बचपन से ही उन्हें और बाकी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कोच के मार्गदर्शन और उनकी मेहनत के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। उन्होंने बताया कि कोच का समर्पण और उनकी कड़ी मेहनत ही है जिसने बच्चों में आत्मविश्वास और जीत की भावना को जन्म दिया। प्रभजोत ने यह भी कहा कि अब उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर भारत का नाम ऊँचा करना है।

वहीं, ’’जगमोहन सिंह बंटी’’ ने बताया कि उत्तराखंड की टीम ने इस बार जो उपलब्धि हासिल की है, वह प्रदेश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल खिलाड़ियों की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जीत है। खालसा फाउंडेशन ने इन खिलाड़ियों का भव्य स्वागत कर उन्हें सम्मानित किया ताकि उनका मनोबल और बढ़ सके। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी लगन और साहस के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले आठ वर्षों से ’’हरदीप सिंह’’ के मार्गदर्शन में यह खिलाड़ी लगातार अभ्यास कर रहे हैं और उनके प्रयासों का परिणाम आज सबके सामने है।

’’जगमोहन सिंह बंटी’’ ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को न केवल आर्थिक सहायता बल्कि उचित प्रशिक्षण और प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए ताकि वे आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत का झंडा ऊँचा लहरा सकें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य से इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर और समर्थन मिले तो यहाँ की प्रतिभाएँ किसी से पीछे नहीं हैं। खालसा फाउंडेशन आगे भी ऐसे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने और उनके लिए संसाधन उपलब्ध कराने का कार्य करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह केवल खिलाड़ियों की सफलता का जश्न नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और संघर्ष की सराहना का प्रतीक है, जिसने पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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