रामनगर। वन क्षेत्र में एक बार फिर बाघ के हमले ने इंसानी जिंदगी की असुरक्षा को उजागर कर दिया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से लगे रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत नया बायपास पुल के पास हुई इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में भय और दहशत का माहौल बन गया है। देर शाम सड़क से गुजर रहे एक व्यक्ति पर अचानक बाघ ने हमला कर दिया और उसे उठाकर जंगल के भीतर घसीट ले गया। यह दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोग सहम गए और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा और लोग देर रात तक सहमे रहे। सड़क किनारे खून के निशान और जंगल की ओर जाते बाघ के पगचिह्न इस बात की गवाही दे रहे थे कि हमला बेहद आक्रामक और अचानक हुआ था।
सूचना मिलते ही रामनगर वन प्रभाग की टीम सक्रिय हुई और बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गई। वनकर्मियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। बेला बीट क्षेत्र में फैले घने जंगल और अंधेरे के कारण अभियान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रात होते-होते जंगल में दृश्यता बेहद कम हो गई थी, जिससे कर्मचारियों की सुरक्षा को भी खतरा उत्पन्न हो गया। इसके बावजूद टीम ने कई घंटों तक जंगल के किनारे और संभावित रास्तों पर खोजबीन की। हालांकि अंधेरा अधिक बढ़ जाने और किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए देर रात सर्च अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। वन विभाग की ओर से पूरे इलाके को घेराबंदी में लेकर निगरानी बढ़ा दी गई, ताकि बाघ दोबारा आबादी की ओर न आ सके।
सुबह तड़के एक बार फिर रामनगर वन प्रभाग की टीम पूरी तैयारी के साथ जंगल में उतरी। सर्च ऑपरेशन को और अधिक सघन बनाया गया तथा बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई। फायरिंग और बम पटाखों की तेज आवाजों के बीच बाघ को डराकर उसकी लोकेशन का अंदाजा लगाया गया। वनकर्मियों ने बाघ के ताजे पगचिह्नों का पीछा करते हुए लगभग दो किलोमीटर अंदर तक जंगल में प्रवेश किया। यह इलाका बेहद घना और दुर्गम बताया जा रहा है, जहां हर कदम पर खतरा बना रहता है। इसी सघन तलाशी के दौरान जंगल के भीतर एक भयावह दृश्य सामने आया, जिसने पूरे अभियान में शामिल कर्मचारियों को भी झकझोर कर रख दिया।
सर्च टीम को जंगल के अंदर उस व्यक्ति का अधखाया शव बरामद हुआ, जिसे बाघ रात में उठाकर ले गया था। वन विभाग के अनुसार, शव की हालत अत्यंत दर्दनाक थी। जानकारी के मुताबिक केवल सिर ही बरामद हो सका, जबकि शेष शरीर के अंगों को बाघ खा चुका था। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद वनकर्मी भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। शव मिलने की सूचना मिलते ही उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया और पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि आगे की कार्रवाई बिना किसी बाधा के की जा सके।
घटना की पुष्टि करते हुए रामनगर वन प्रभाग के एसडीओ अंकित बडोला ने बताया कि यह हमला देर शाम का है, जब बाघ व्यक्ति को सड़क से उठाकर जंगल के भीतर ले गया था। उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और पूरी रात सर्च अभियान चलाया गया। हालांकि जंगल में अंधेरा अधिक होने और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अभियान को रात में रोकना पड़ा। एसडीओ अंकित बडोला के अनुसार, सुबह दोबारा पूरी रणनीति के साथ तलाशी अभियान शुरू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप जंगल के अंदर से अधखाया शव बरामद किया गया।
एसडीओ अंकित बडोला ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है और डीएनए सैंपलिंग भी कराई जाएगी, ताकि मृतक की शिनाख्त सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी है, क्योंकि शव की हालत ऐसी नहीं है जिससे पहचान तुरंत संभव हो सके। वन विभाग मृतक के परिजनों तक पहुंचने के लिए आसपास के थानों और गांवों से भी संपर्क कर रहा है। इसके साथ ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।
घटना के बाद रामनगर वन प्रभाग द्वारा क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बढ़ा दी गई है। जंगल से सटे गांवों में मुनादी कराई जा रही है और लोगों को जंगल की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। वन विभाग की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और बाघ की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो जाती, तब तक लोगों को जंगल से दूरी बनाए रखने की जरूरत है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और कई परिवारों ने अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने से रोक दिया है।
गौरतलब है कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और रामनगर वन प्रभाग व इसके आसपास के क्षेत्रों में बीते एक महीने के भीतर बाघों के हमलों में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघों की बढ़ती गतिविधियों के कारण उनका रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है। खेतों में काम करना, जंगल से गुजरना और यहां तक कि सड़क पर चलना भी अब जोखिम भरा हो गया है।
लगातार सामने आ रहे मामलों से यह स्पष्ट हो रहा है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास बसे गांवों में लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। वन विभाग की ओर से लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि वे जंगल की ओर न जाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें। इसके बावजूद घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे प्रशासन और वन विभाग दोनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
कुल मिलाकर रामनगर क्षेत्र में बाघ के हमले की यह घटना न केवल एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत का कारण बनी है, बल्कि पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल छोड़ गई है। जंगल और आबादी के बीच बढ़ती नजदीकी, बाघों की आवाजाही और इंसानी लापरवाही ने हालात को और जटिल बना दिया है। आने वाले समय में वन विभाग द्वारा क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और लोगों को भयमुक्त वातावरण मिल सके।





