काशीपुर। संपूर्ण भारत में पहली बार देवभूमि उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता कानून की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर काशीपुर नगर निगम परिसर में एक विशेष और वैचारिक रूप से प्रभावशाली कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसने सामाजिक समानता और संवैधानिक चेतना को नए सिरे से मजबूती प्रदान की। “समानता द्वारा समरसता” नाम से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानून की वर्षगांठ मनाना नहीं था, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक इसके महत्व, उपयोगिता और दूरगामी प्रभावों को पहुंचाना रहा। नगर निगम सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशासन, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनकी सहभागिता ने आयोजन को गंभीरता और गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समान नागरिक संहिता को सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम बताते हुए कहा कि यह कानून नागरिकों के बीच भेदभाव को समाप्त करने और समान अधिकार सुनिश्चित करने का मजबूत आधार है। आयोजन में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की उपस्थिति इस बात का संकेत रही कि यह कानून विशेष रूप से महिलाओं के हितों से गहराई से जुड़ा हुआ है और उन्हें समान अधिकारों की वास्तविक अनुभूति कराता है।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने बताया कि उत्तराखंड वह पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता को विधायी स्वरूप देकर देश को नई राह दिखाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कानून लागू हुआ, जिसे सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है। कार्यक्रम में कहा गया कि यह पहल केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति का उदाहरण नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और न्याय के मूल सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने का प्रयास है। समान नागरिक संहिता के एक वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि कानून के क्रियान्वयन के दौरान प्रशासन ने जिस गंभीरता और पारदर्शिता के साथ काम किया, वह अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। नगर निगम परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने आम नागरिकों को यह समझाने का प्रयास किया कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या समुदाय के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान नियम और अधिकार सुनिश्चित करने का माध्यम है।
नगर निगम सभागार में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में उत्तराखंड महिला आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो, नगर आयुक्त रविन्द्र बिष्ट, तहसीलदार पंकज चंदोला, ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा, एसएनए विनोद लाल, सांसद प्रतिनिधि विजय बॉबी, पार्षद पुष्कर बिष्ट, पार्षद अब्दुल कादिर, पार्षद दीपा पाठक सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने मंच से अपने विचार साझा करते हुए समान नागरिक संहिता के सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि यह कानून समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने के साथ-साथ नागरिकों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने का कार्य करता है। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में इस कानून के सफल क्रियान्वयन से यह सिद्ध हुआ है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो जटिल से जटिल कानून भी प्रभावी ढंग से लागू किए जा सकते हैं। आयोजन के दौरान सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ वक्ताओं के विचारों का समर्थन किया।
काशीपुर नगर निगम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में महापौर दीपक वाली ने समान नागरिक संहिता को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस कानून ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समान नागरिक संहिता समाज में समान अधिकारों की स्थापना की दिशा में एक मजबूत कदम है और इससे महिलाओं को विशेष लाभ मिला है। महापौर दीपक वाली ने यह भी कहा कि यह कानून किसी भी प्रकार से सामाजिक सौहार्द को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच समानता और समरसता की भावना को और मजबूत करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भविष्य में यह कानून पूरे देश में एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जाएगा। उनके वक्तव्य के दौरान सभागार में मौजूद लोगों ने समर्थन में तालियां बजाईं और इस पहल को दूरदर्शी निर्णय बताया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ की गई, जिसमें उत्तराखंड महिला आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो, महापौर दीपक बाली, नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट, तहसीलदार पंकज चंदोला, ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा और सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल शाह ने सहभागिता की। इसके बाद समान नागरिक संहिता कानून को लेकर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत की गई, जिसमें कानून के विभिन्न प्रावधानों, नियमों और प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार यह कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और पारिवारिक मामलों में समान नियम लागू करता है। उपस्थित लोगों ने इस प्रस्तुति को ध्यानपूर्वक देखा और इसे बेहद उपयोगी बताया। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि इस तरह की प्रस्तुतियां आम नागरिकों को कानून की सही जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और भ्रम की स्थिति को समाप्त करती हैं।
राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता कानून महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से लागू हुए इस कानून ने विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को नई शक्ति दी है। सायरा बानो ने कहा कि मुस्लिम समाज में वर्षों से चली आ रही कुरीतियों जैसे हलाला और तीन तलाक पर प्रतिबंध लगने से महिलाओं को न्याय और सम्मान मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाता है और उन्हें कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। उनके संबोधन के दौरान सभागार में मौजूद महिलाओं ने इस कानून को सकारात्मक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक उपलब्धियों को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। नगर निगम में नियुक्त समान नागरिक संहिता कानून के उपनिबंधक अंकित खर्कवाल को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। बताया गया कि उनके प्रयासों के चलते काशीपुर नगर निगम क्षेत्र में समान नागरिक संहिता से संबंधित कुल 5280 आवेदनों का शत प्रतिशत पंजीकरण और समाधान किया गया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के कारण काशीपुर नगर निगम प्रदेश में चौथे स्थान पर रहा। मंच से वक्ताओं ने कहा कि यह सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि प्रशासन और जनता के सहयोग से किसी भी कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। सम्मान समारोह के दौरान अंकित खर्कवाल के कार्य की सराहना करते हुए इसे अन्य नगर निकायों के लिए प्रेरणादायक बताया गया।
सब रजिस्ट्रार अंकित खर्कवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि 27 जनवरी 2025 को राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए इस महत्वपूर्ण कानून के तहत बीते एक वर्ष में नगर निगम क्षेत्र से लगभग 5300 आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन की सक्रियता और पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते इनमें से 5000 से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अंकित खर्कवाल ने आगे बताया कि समान नागरिक संहिता कानून के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विशेष आयोजन किया गया, जिसमें आम नागरिकों को कानून से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से दी गई और व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। उन्होंने कहा कि आयोजन के दौरान ही 50 से अधिक नए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि आवेदन प्रक्रिया अभी भी निरंतर जारी है। सब रजिस्ट्रार के अनुसार, जांच के दौरान करीब 60 आवेदनों को नियमों के अनुरूप न पाए जाने पर निरस्त किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह नियमबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में आवेदन संख्या और अधिक बढ़ेगी और यह कानून समाज में समानता और न्याय की मजबूत नींव साबित होगा।

नगर निगम परिसर में समान नागरिक संहिता की जानकारी देने के लिए एक विशेष स्टॉल भी लगाया गया, जहां आम नागरिकों को कानून से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। स्टॉल पर मौजूद कर्मचारियों ने लोगों को आवेदन प्रक्रिया, पंजीकरण की विधि और कानून के लाभों के बारे में विस्तार से समझाया। बड़ी संख्या में लोगों ने स्टॉल पर पहुंचकर जानकारी ली और अपने सवालों के जवाब प्राप्त किए। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि समान नागरिक संहिता के उद्देश्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। आयोजन ने यह संदेश दिया कि समानता और समरसता के बिना विकसित समाज की कल्पना अधूरी है और समान नागरिक संहिता इस दिशा में एक मजबूत आधार है।
समान नागरिक संहिता के अंतर्गत कराए जा रहे विवाह पंजीकरण को लेकर हरिद्वार जिला प्रदेश में प्रथम स्थान पर है, जबकि काशीपुर का उत्तराखंड में चौथे स्थान पर पहुंचना अपने आप में एक बड़ी और उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह बात काशीपुर महापौर दीपक बाली ने कही। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे महत्वपूर्ण कानून को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करना आसान कार्य नहीं था, लेकिन नगर निगम, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से काशीपुर ने यह मुकाम हासिल किया है। महापौर दीपक बाली ने कहा कि 5280 से अधिक आवेदनों का शत प्रतिशत पंजीकरण और निस्तारण यह दर्शाता है कि जनता का इस कानून पर भरोसा बढ़ा है और लोग स्वेच्छा से इससे जुड़ रहे हैं। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और सशक्त प्रशासनिक व्यवस्था का परिणाम बताया। साथ ही कहा कि आने वाले समय में काशीपुर और बेहतर प्रदर्शन कर प्रदेश में अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा।





