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मुंशी प्रेमचंद सम्मान से अलंकृत हुए उत्तराखंड के कथाकार विनोद भगत साहित्य जगत में बढ़ा गौरव

बिजनौर में आयोजित गरिमामय समारोह में साहित्यकारों ने मुंशी प्रेमचंद की अमर साहित्यिक विरासत को किया नमन, डॉ. पंकज भारद्वाज ने विनोद भगत की जनपक्षधर लेखनी को यथार्थवादी परंपरा का सशक्त विस्तार बताया।

बिजनौर। हिंदी साहित्य के युगपुरुष, सामाजिक यथार्थ के अप्रतिम शिल्पी और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर बिजनौर में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह साहित्य, संस्कृति और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम बन गया। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति द्वारा साहित्यकार डॉ. पंकज भारद्वाज के आवास पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने सहभागिता कर प्रेमचंद के विचारों और साहित्यिक विरासत को नमन किया। समारोह की अध्यक्षता सुरेन्द्र प्रकाश भटनागर ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व रितेश भटनागर ने प्रभावशाली ढंग से निभाया। कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद केवल हिंदी साहित्य के महान लेखक नहीं थे, बल्कि वे समाज के दर्द, संघर्ष, असमानता और मानवीय मूल्यों के सबसे प्रखर प्रवक्ता थे। इसी अवसर पर उत्तराखंड के काशीपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं ‘शब्द दूत’ के संपादक विनोद भगत को साहित्य, पत्रकारिता और हिंदी भाषा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति की ओर से शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान की घोषणा होते ही सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा और उपस्थित अतिथियों ने इसे साहित्य तथा जनपक्षधर पत्रकारिता का गौरवपूर्ण सम्मान बताया।

गरिमामय आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि विनोद भगत द्वारा कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने और दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ। दीप की पावन ज्योति प्रज्ज्वलित होते ही पूरा वातावरण साहित्यिक गरिमा, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और हिंदी भाषा के सम्मान की भावना से आलोकित हो उठा। उपस्थित साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और बुद्धिजीवियों ने भी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम के प्रारंभिक सत्र में वक्ताओं ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य केवल कथा-साहित्य तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय समाज का जीवंत इतिहास है, जिसमें किसानों, मजदूरों, महिलाओं, शोषितों और वंचित वर्ग की वास्तविक पीड़ा को संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ अभिव्यक्ति मिली है। वक्ताओं ने कहा कि बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बावजूद प्रेमचंद की रचनाओं की प्रासंगिकता तनिक भी कम नहीं हुई है। उनका साहित्य आज भी सामाजिक न्याय, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की मशाल बनकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहा है।

विचार गोष्ठी के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने मुंशी प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज की उस सच्चाई को शब्द दिए, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता था। उनकी रचनाओं में केवल कहानी नहीं, बल्कि समाज की आत्मा की आवाज सुनाई देती है। ‘ईदगाह’, ‘गोदान’, ‘कफन’ और ‘दोपहर का भोजन’ जैसी कालजयी कृतियों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन रचनाओं में आज भी भारतीय समाज का यथार्थ उसी गहराई से दिखाई देता है, जैसा उनके लेखन काल में था। इस अवसर पर मुकेश गुप्ता, केके पाठक, जीएस भटनागर, गोपाल खन्ना, अरुण गर्ग, हरपाल सिंह, पूर्व प्रधानाचार्य सुरेश शर्मा तथा सुनील कोठारी सहित अन्य साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आज के सामाजिक परिवेश में प्रेमचंद की रचनाओं का अध्ययन पहले से अधिक आवश्यक हो गया है, क्योंकि उनका साहित्य समाज में समानता, न्याय, संवेदना और नैतिक मूल्यों की स्थापना का संदेश देता है।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. पंकज भारद्वाज ने मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भगत की साहित्यिक एवं पत्रकारिता संबंधी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी लेखनी में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की यथार्थवादी साहित्यिक परंपरा की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि विनोद भगत ने पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर लेखनी के माध्यम से अलग पहचान बनाई है। उनकी रचनाओं में समाज के अंतिम व्यक्ति की पीड़ा, संघर्ष, मानवीय संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार अत्यंत प्रभावशाली रूप से अभिव्यक्त होते हैं। डॉ. पंकज भारद्वाज ने कहा कि जिस प्रकार मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया, उसी प्रकार विनोद भगत भी अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक जागरूकता और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उनकी साहित्य साधना आने वाले समय में भी हिंदी साहित्य और पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करेगी तथा युवा पीढ़ी को सार्थक लेखन के लिए प्रेरित करती रहेगी।

साहित्यिक समारोह के सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण उस समय सामने आए जब डॉ. पंकज भारद्वाज ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति की ओर से वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं ‘शब्द दूत’ के संपादक विनोद भगत को शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थित साहित्यकारों, पत्रकारों तथा बुद्धिजीवियों ने खड़े होकर उनका अभिनंदन किया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सम्मान केवल एक साहित्यकार का अभिनंदन नहीं, बल्कि उस प्रतिबद्ध और जनपक्षधर लेखनी का सम्मान है, जिसने वर्षों से पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में समाज की समस्याओं, मानवीय मूल्यों और हिंदी भाषा के संवर्धन को अपनी प्राथमिकता बनाया है। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी लेखक की वास्तविक पहचान उसकी सामाजिक जिम्मेदारी और सत्य के प्रति उसकी निष्ठा से होती है तथा विनोद भगत ने अपनी रचनाओं और पत्रकारिता के माध्यम से इन मूल्यों को सदैव जीवित रखा है। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकार नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं, जो शब्दों को केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम मानते हैं।

सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भगत ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पत्रकारिता, साहित्य और हिंदी भाषा के प्रति समर्पित प्रत्येक कलमकार का सम्मान है। उन्होंने कहा कि कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की लेखनी आज भी समाज को सत्य का साथ देने, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि साहित्य और पत्रकारिता दोनों का मूल उद्देश्य समाज को सही दिशा देना तथा जनचेतना को मजबूत करना है। यदि कलम सत्य, संवेदना और जनहित के प्रति पूरी निष्ठा से समर्पित रहे तो वह किसी भी सकारात्मक परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है। विनोद भगत ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद स्मृति समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक प्रतिबद्धता, ईमानदारी और समर्पण के साथ समाज, साहित्य और हिंदी भाषा की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लेखक और पत्रकार का दायित्व है कि वह समाज के वंचित, पीड़ित और उपेक्षित वर्ग की आवाज को अपनी लेखनी के माध्यम से मजबूती से उठाए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यकारों ने भी विनोद भगत की साहित्यिक यात्रा और उनकी रचनात्मक प्रतिबद्धता की मुक्तकंठ से सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उनकी लेखन शैली में मुंशी प्रेमचंद की साहित्यिक परंपरा की स्पष्ट छाप दिखाई देती है। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाएं, जनसरोकार और समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण देखने को मिलता है। साहित्यकारों ने कहा कि जिस प्रकार प्रेमचंद ने साहित्य को समाज की पीड़ा का स्वर बनाया था, उसी प्रकार विनोद भगत भी अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं। उपस्थित विद्वानों ने कहा कि हिंदी साहित्य को ऐसे रचनाकारों की आवश्यकता है, जो केवल साहित्य सृजन तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए भी अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विनोद भगत की साहित्य साधना भविष्य में भी हिंदी भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।

समापन सत्र में समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आयोजित इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य की समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की सबसे सशक्त विधा है। उपस्थित सभी साहित्यप्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, साहित्यकारों, पत्रकारों और आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। बिजनौर में आयोजित यह समारोह केवल एक सम्मान समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिंदी साहित्य, सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और जनपक्षधर पत्रकारिता के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उत्सव बन गया। वहीं, उत्तराखंड के काशीपुर निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार विनोद भगत को मिला ‘मुंशी प्रेमचंद सम्मान’ इस बात का सशक्त प्रमाण बनकर उभरा कि समाज, साहित्य और हिंदी भाषा की निष्ठापूर्वक सेवा करने वाली प्रतिबद्ध कलम का सम्मान समय अवश्य करता है।

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