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महाशिवरात्रि पर पशुपतिनाथ मंदिर में निकली भव्य शिव बारात से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र

श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, पारंपरिक लोकगीतों की गूंज, नगाड़ों की ताल और शिव-पार्वती की मनमोहक झांकी ने पशुपति विहार में आध्यात्मिक उत्साह, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

काशीपुर। शहर में महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आस्था और उल्लास का ऐसा अनुपम दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय ऊर्जा से भर दिया। पशुपति विहार वार्ड नंबर 2 स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में इस विशेष अवसर पर धार्मिक उत्सव का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर अपनी आस्था प्रकट की। पर्व के दौरान मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से संवार दिया गया था, जहां रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों की सजावट और धार्मिक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस आयोजन का संचालन पशुपति संस्कृत धार्मिक एवं सामाजिक सेवा समिति द्वारा किया गया, जिसने पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ भगवान शिव की भव्य बारात का आयोजन किया। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उनकी भक्ति भावना ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक परंपराओं का जीवंत केंद्र बन गया।

पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहरों को जीवंत रूप देने वाली इस शिव बारात का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आकर्षक और भावनात्मक रहा। भगवान भोलेनाथ का स्वरूप धारण कर सजी श्रुति शर्मा ने अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं माता पार्वती के रूप में सजी पावनी नेगी की उपस्थिति ने बारात की शोभा को और अधिक दिव्य बना दिया। नगाड़ों और ढोल की मधुर ध्वनि के बीच “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया। बारात के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन कर अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने इस आयोजन को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर धार्मिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम का आकर्षण और भी बढ़ गया।

धार्मिक आस्था के इस विशाल आयोजन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान महिलाएं पारंपरिक गढ़वाली और कुमाऊनी लोकगीतों पर नृत्य करती दिखाई दीं, जिससे शिव बारात का वातावरण सांस्कृतिक रंगों से सराबोर हो गया। युवा वर्ग ने भी पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ बारात में भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को पारिवारिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना दिया। श्रद्धालुओं का जोश और उत्साह इस बात का प्रमाण था कि धार्मिक परंपराएं आज भी समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं। बारात के दौरान भक्त नाचते-गाते और भगवान शिव की भक्ति में लीन दिखाई दिए, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बन गया। इस आयोजन ने समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाकर धार्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने का संदेश दिया।

शिव बारात की शुरुआत मंदिर प्रांगण से अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर यात्रा का शुभारंभ किया। बारात पशुपति विहार क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होकर निकली, जहां श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बारात का भव्य स्वागत किया। मार्ग में स्थानीय लोगों ने धार्मिक गीतों और भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। बारात के दौरान श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो भगवान शिव के दर्शन के लिए उत्सुक दिखाई दे रही थीं। इस धार्मिक यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से भर दिया और श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया। बारात के पुनः मंदिर परिसर में पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आरती और पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख और शांति की कामना की।

पशुपति सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महाशिवरात्रि के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला का आयोजन किया गया था। शिव बारात के अलावा रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। रुद्राभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक कर अपनी आस्था प्रकट की। भजन-कीर्तन कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के भक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। प्रसाद वितरण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया। समिति के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना था।

धार्मिक उत्सव के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष ध्यान रखा गया। समिति के स्वयंसेवकों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक प्रबंध किए। बारात के मार्ग पर यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया गया ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण और प्रसाद वितरण की व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से संचालित किया गया। आयोजन की सफलता में स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता की। स्थानीय लोगों ने समिति और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए आयोजन को सफल और अनुकरणीय बताया।

महाशिवरात्रि का यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक समरसता का भी प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के लोगों ने भाग लेकर धार्मिक एकता और भाईचारे का संदेश दिया। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। इस आयोजन ने यह दर्शाया कि धार्मिक पर्व समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम बन सकते हैं। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहयोग और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं।

शिव बारात के दौरान धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का सुंदर समन्वय देखने को मिला। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की ध्वनि और भक्तों के उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के स्वरूप का दर्शन कर अपने जीवन में सुख और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भावनात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से भर दिया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया और भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।

पशुपतिनाथ मंदिर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई पहचान दी। आयोजन के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिला। समिति के सदस्यों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा दिया जा सके। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।

महाशिवरात्रि के इस दिव्य आयोजन ने काशीपुर क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से भर दिया और धार्मिक आस्था की नई मिसाल प्रस्तुत की। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति और उनकी भक्ति भावना ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक परंपराएं आज भी समाज के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पशुपतिनाथ मंदिर में आयोजित यह शिव बारात धार्मिक उत्साह, सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई। इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया बल्कि समाज में धार्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का कार्य भी किया।

इस पावन धार्मिक आयोजन को सफल और भव्य बनाने में क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान पवन जोशी, राकेश बिष्ट, सुरेश जोशी, दरबान डफोटी, राजेंद्र कोटनाला, लीलाधर सनवाल, जगत रावत, हिमांशु राजपूत, सुनील जखवाल, रणवीर रावत, ब्रजपाल रावत, कविता शर्मा, अंजू बिष्ट, भावना नेगी, जस्सा देवी, कमलेश जोशी, पूजा राजपूत, चंद्र सिंह रावत, जगदीश जोशी, अनिल कुमार, कैलाश जोशी, हेमा मेहता, लक्ष्मी रावत, रेखा रावत, भावना रावत, माला कांडपाल, सावित्री रावत, दीप्ती जोशी, मंजू रावत तथा जयदीप ढौंडियाल महामंत्री, आवास विकास मंडल भाजपा ने विशेष सहयोग और सहभागिता प्रदान की। सभी ने पूरे उत्साह और समर्पण के साथ आयोजन की व्यवस्थाओं में योगदान देते हुए धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सहभागिता ने आयोजन को सामाजिक एकता, धार्मिक आस्था और सामूहिक सहयोग का प्रेरणादायक उदाहरण बना दिया।

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