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महानगर कांग्रेस की अध्यक्ष अलका पाल ने रेल मंत्री को भेजी अपनी 10 सूत्रीय धधकती मांगें

रेलवे की घोर उपेक्षा और यात्री सुविधाओं के अभाव पर भड़की अलका पाल ने केंद्र सरकार को ललकारते हुए काशीपुर स्टेशन पर भरी हुंकार और चेतावनी दी कि जनता के हक के लिए अब होगा महासंग्राम।

काशीपुर। उत्तराखंड के तराई अंचल में स्थित महत्वपूर्ण व्यापारिक और आवागमन के केंद्र काशीपुर में आज राजनीति की एक नई गर्माहट देखने को मिली, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने रेलवे की बदहाली और यात्री सुविधाओं की अनदेखी के खिलाफ हुंकार भरी। काशीपुर महानगर कांग्रेस के बैनर तले आयोजित इस विशाल धरने ने न केवल शासन-प्रशासन की नींद उड़ाई, बल्कि रेल मंत्रालय तक स्थानीय जनता की दबी हुई आवाज को पुरजोर तरीके से पहुंचाने का काम किया है। रेलवे परिसर के भीतर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन की कमान महानगर कांग्रेस की अध्यक्ष अलका पाल ने संभाली, जिन्होंने अपने संबोधन में केंद्र सरकार और रेल विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि काशीपुर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जनता के हितों के लिए कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करती रहेगी। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने रेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और स्टेशन परिसर में ही धरने पर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में संकल्प व्यक्त किया।

धरने को संबोधित करते हुए अलका पाल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि काशीपुर पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत उत्तराखंड के एक प्रमुख मंडल के रूप में स्थापित है, लेकिन इसके बावजूद यहां से यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को संबोधित एक विस्तृत 10 सूत्रीय मांग पत्र स्टेशन मास्टर के माध्यम से प्रेषित किया, जिसमें क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से काशीपुर और रामनगर से विभिन्न प्रमुख शहरों के लिए नई रेलगाड़ियों के संचालन पर जोर दिया गया है। अलका पाल ने बताया कि वर्तमान में काशीपुर से देहरादून, हरिद्वार, लखनऊ, कोलकाता, प्रयागराज, टनकपुर और पंजाब जैसे महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए पर्याप्त ट्रेनें नहीं हैं, जिसके कारण स्थानीय व्यापारियों, छात्रों और मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कांग्रेस का तर्क है कि यदि इन मार्गों पर सीधी रेल सेवा शुरू की जाए, तो इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

ज्ञापन में उठाई गई मांगों की फेहरिस्त काफी लंबी और व्यापक है, जिसमें मुरादाबाद की ओर जाने वाली उन ट्रेनों को फिर से शुरू करने की मांग प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें किन्हीं कारणों से बंद कर दिया गया था। महानगर कांग्रेस ने पुरजोर मांग की है कि रामनगर और काशीपुर से आगरा, मुंबई, दिल्ली, जैसलमेर और अमृतसर जैसे दूरदराज के क्षेत्रों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में साधारण कोचों (General Coaches) की संख्या बढ़ाई जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वर्तमान में इन ट्रेनों में आरक्षित सीटों की मारामारी रहती है और गरीब तबके का यात्री चाहकर भी इन शहरों तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए सामान्य श्रेणी के डिब्बे लगाना जनहित में अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, अनारक्षित गाड़ियों में भी एक्स्ट्रा कोच लगाने की मांग की गई है ताकि भीड़भाड़ के समय यात्रियों को भेड़-बकरियों की तरह ठंसकर सफर न करना पड़े। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले कुछ समय में कई ट्रेनों से जो महत्वपूर्ण कोच हटाए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पुनः जोड़ा जाना चाहिए ताकि रेल यात्रा सुगम और सुरक्षित हो सके।

समय सारणी में बदलाव और नई सेवाओं को लेकर भी कांग्रेस ने रेल मंत्री का ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें काशीपुर से मुरादाबाद के बीच रात्रि 11:30 बजे के आसपास एक अतिरिक्त रेल सुविधा उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराते हुए ज्ञापन में रामनगर-काशीपुर से सीधे बनारस और लखनऊ के लिए एक विशेष ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके साथ ही, आधुनिक युग की मांग को देखते हुए काशीपुर से चंडीगढ़ के लिए ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी देने की भी अपील की गई है। रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर कांग्रेस ने काशीपुर-जसपुर-धामपुर प्रस्तावित रेल लाइन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया और मांग की कि इस अटकी हुई परियोजना पर शीघ्र कार्य आरंभ किया जाए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस रेल मार्ग के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय विकास के नए द्वार खुलेंगे।

रेलवे स्टेशन के बुनियादी ढांचे और यात्री सुरक्षा को लेकर भी ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनमें बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की सुविधा के लिए स्टेशन पर एक्सीलेटर (स्वचालित सीढ़ी) लगाने की मांग सर्वोपरि है। अलका पाल ने कहा कि आधुनिक दौर में जब रेलवे वर्ल्ड क्लास स्टेशनों की बात कर रहा है, तब काशीपुर जैसे स्टेशन पर बुजुर्गों को सीढ़ियां चढ़ने में होने वाली दिक्कतें शर्मनाक हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी स्टेशन के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था करने का आग्रह किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। कांग्रेस कमेटी ने रेल मंत्री से यह भी विनम्र आग्रह किया कि इन सभी 19 मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जनहित में शीघ्र निर्णय लिया जाए। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेसी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो महानगर जिला कांग्रेस कमेटी काशीपुर अपने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने के लिए विवश होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी। इस विरोध प्रदर्शन ने निश्चित रूप से क्षेत्र में रेल सुविधाओं को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

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