spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडमंडी समिति की दुकानों के आवंटन की हो निष्पक्ष जांच : घिल्डियाल

मंडी समिति की दुकानों के आवंटन की हो निष्पक्ष जांच : घिल्डियाल

मंडी में दुकानों के बंटवारे और कथित अतिरिक्त वसूली पर उठे सवालों से गरमाया मामला, नेकी की दीवार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग प्रशासन से उठाई।

रामनगर। मंडी समिति में दुकानों के आवंटन को लेकर व्यापारियों में बढ़ता आक्रोश अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। दुकानों के आवंटन में कथित अनियमितताओं, निर्धारित ₹2 लाख से अधिक धनराशि वसूले जाने के आरोपों और पात्र आवेदकों को दुकान आवंटित नहीं किए जाने की शिकायतों को लेकर नेकी की दीवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर संगठन की ओर से रामनगर के एसडीएम गोपाल सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपकर दुकानों के आवंटन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई। ज्ञापन के माध्यम से मांग उठाई गई कि आवेदन प्रक्रिया से लेकर पात्रता निर्धारण, चयन, दुकान आवंटन और आवेदकों से ली गई धनराशि तक प्रत्येक बिंदु की गहनता से पड़ताल होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई है तो जांच के बाद स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि कहीं नियमों की अनदेखी अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि मंडी समिति की दुकानों के आवंटन को लेकर व्यापारियों के बीच लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है। शिकायतों के अनुसार निर्धारित ₹2 लाख से अधिक धनराशि लिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा ऐसे आवेदकों को दुकान नहीं मिलने की बात भी सामने आई है, जिन्हें स्वयं को निर्धारित मानकों के अनुरूप पात्र होने का दावा है। इन शिकायतों ने आवंटन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेकी की दीवार की ओर से प्रशासन से आग्रह किया गया कि मामले की जांच केवल शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। इसके लिए आवेदन पत्रों, पात्रता संबंधी दस्तावेजों, चयन प्रक्रिया, आवंटन सूची, निर्धारित शुल्क और आवेदकों से वास्तव में वसूल की गई राशि का मिलान किए जाने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संचालित हुई या किसी स्तर पर अनियमितता हुई।

तारा चन्द्र घिल्डियाल ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े किसी भी आवंटन में पारदर्शिता और समानता सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी व्यापारियों और आवेदकों के लिए एक समान नियम निर्धारित होने चाहिए तथा किसी के साथ पक्षपात या भेदभाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार नियम एक हों, शुल्क एक हो और आवेदन से लेकर दुकान आवंटन तक पूरी प्रक्रिया स्पष्ट एवं निष्पक्ष तरीके से संचालित की जाए। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी पात्र व्यक्ति ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया है तो उसके आवेदन पर समान मानकों के आधार पर विचार होना चाहिए। इसी तरह यदि किसी आवेदक से निर्धारित राशि से अधिक धनराशि ली गई है तो उसकी भी दस्तावेजों के आधार पर जांच होनी चाहिए। घिल्डियाल ने प्रशासन से यह भी मांग की कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि व्यापारियों और आम लोगों के बीच मंडी समिति की कार्यप्रणाली को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे और वास्तविक स्थिति सभी के सामने आ सके।

ज्ञापन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि दुकानों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच किसी सक्षम स्तर से कराई जाए। नेकी की दीवार का कहना है कि आवेदन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पात्रता का परीक्षण निर्धारित मानकों के आधार पर होना चाहिए और चयन प्रक्रिया में अपनाए गए मापदंड भी स्पष्ट होने चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को दुकान आवंटित की गई है तो उसके चयन का आधार क्या था और किसी अन्य पात्र आवेदक को दुकान क्यों नहीं मिल सकी, इसकी जानकारी भी जांच का हिस्सा बनाई जानी चाहिए। इसी प्रकार निर्धारित ₹2 लाख से अधिक धनराशि वसूल किए जाने के आरोपों की भी गंभीरता से पड़ताल जरूरी है। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि शुल्क से संबंधित सभी रसीदों, रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि आवेदकों से कितनी राशि ली गई और क्या वसूली निर्धारित नियमों के अनुरूप थी। संगठन का मानना है कि निष्पक्ष जांच से न केवल वर्तमान विवाद का समाधान संभव होगा, बल्कि भविष्य में भी ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।

रामनगर के एसडीएम गोपाल सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपते हुए नेकी की दीवार की ओर से प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई। ज्ञापन देने वालों में राजेन्द्र सिंह रावत, पूरन नैनवाल, तारा दत्त रिखाड़ी, नन्दा बल्लभ पाण्डे, भुवन चन्द्र जोशी, हेमन्त देवधानी, प्रकाश चन्द्र तिवारी और हेमन्त खुल्बे शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष कहा कि दुकानों के आवंटन से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे सीधे तौर पर व्यापारियों के हित प्रभावित होते हैं। तारा चन्द्र घिल्डियाल ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यदि किसी व्यक्ति अथवा जिम्मेदार स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि व्यापारियों के लिए समान नियम, समान शुल्क और निष्पक्ष प्रक्रिया ही किसी भी आवंटन व्यवस्था की बुनियाद होनी चाहिए। अब इस ज्ञापन के बाद मंडी समिति की दुकानों के आवंटन से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रिया की जांच को लेकर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर व्यापारियों और संबंधित पक्षों की नजरें टिकी हैं।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!