काशीपुर। महानगर में मानसून की दस्तक के साथ ही नगर निगम काशीपुर प्रशासन ने संक्रामक रोगों के खिलाफ एक बड़ा और व्यापक अभियान छेड़ने का बिगुल फूंक दिया है। बारिश के इस भीगे मौसम में जरा सी सुस्ती अथवा अनदेखी आपके हंसते-खेलते परिवार को गंभीर महामारियों के जाल में धकेल सकती है, इसी गंभीर चुनौती को भांपते हुए नगर निगम काशीपुर के आला अधिकारियों ने जनता के नाम एक बेहद जरूरी और बेहद संवेदनशील चेतावनी पत्र जारी किया है। प्रशासनिक अमले का साफ कहना है कि बादलों की रिमझिम बौछारें जहां एक तरफ चिलचिलाती गर्मी से राहत लेकर आती हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने साथ जानलेवा मच्छरों की फौज भी तैयार करती हैं, जो जरा सा मौका मिलते ही आपके घरों में पैठ बना लेती हैं। नगर निगम काशीपुर ने काशीपुर के प्रत्येक नागरिक से सीधे संवाद स्थापित करते हुए यह जोरदार अपील की है कि वे अपने स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की कोताही न बरतें और इस बदलते मौसम को बीमारी का जरिया न बनने दें। शहर के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखने और मौसमी बीमारियों पर लगाम कसने के लिए यह बेहद आवश्यक हो गया है कि जनता और प्रशासन कंधे से कंधा मिलाकर इस जंग में उतरें।
प्रशासनिक स्तर पर जारी इस विशेष जनहित संदेश में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि नगर निगम काशीपुर के बाशिंदे अपने निजी और सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी कीमत पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न न होने दें। अक्सर देखा जाता है कि बरसात की शुरुआती बूंदें गिरते ही लोग छतों, गलियों और खुले मैदानों में जमा होने वाले पानी को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में चलकर मच्छरों की सबसे मुफीद नर्सरी में तब्दील हो जाता है। नगर निगम काशीपुर ने जनता से सीधे तौर पर मुखातिब होते हुए साफ शब्दों में कहा है कि ठहरा हुआ पानी ही इन जानलेवा बीमारियों की जड़ है, जिसे समय रहते सुखाया जाना बेहद अनिवार्य है। यदि हम अपने आसपास पानी को एकत्रित होने से रोकने में सफल हो जाते हैं, तो हम आधी जंग वहीं जीत लेते हैं, क्योंकि गतिहीन जल ही वह प्राथमिक स्रोत है जहां ये कीट अपनी वंशवृद्धि करते हैं। इसलिए शहर के हर जिम्मेदार नागरिक का यह पहला दायित्व बनता है कि वह अपने घर की चौखट से लेकर मुख्य सड़क तक कहीं भी गंदे या साफ पानी को ठहरने न दे और निकासी की व्यवस्था को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त बनाए रखे।
इस महाअभियान के अंतर्गत नगर निगम काशीपुर ने विशेष रूप से घरेलू उपकरणों और सजावटी बर्तनों जैसे कि हमारे घरों में ठंडी हवा देने वाले उपकरणों, पेड़-पौधों के पात्रों और पानी संचय करने वाली बड़ी टंकियों की लगातार और गहन स्वच्छता करने की पुरजोर पैरवी की है। अमूमन लोग सोचते हैं कि इन बर्तनों के भीतर मौजूद साफ पानी से कोई खतरा नहीं है, परंतु यही सबसे बड़ी भूल साबित होती है क्योंकि डरावने रोगों के वाहक हमेशा साफ और स्थिर पानी में ही अपने अंडे देना पसंद करते हैं। नगर निगम काशीपुर ने कड़े लहजे में आगाह किया है कि इन सभी जलपात्रों को सप्ताह में कम से कम एक बार पूरी तरह खाली करके, रगड़कर साफ किया जाना चाहिए और कुछ समय के लिए धूप में सुखाया जाना चाहिए ताकि अदृश्य रूप से चिपके हुए कीटाणु भी पूरी तरह नष्ट हो जाएं। घरों के भीतर सजे सुंदर गमले और छतों पर रखी पानी की विशाल टंकियां अगर समय पर साफ नहीं की गईं, तो वे खुद हमारे लिए एक अदृश्य मौत का कुआं बन सकती हैं, लिहाजा इस विषय पर बेहद सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

इसी क्रम में शहर की खूबसूरती को बिगाड़ने वाले और बीमारियों को खुला न्यौता देने वाले अनुपयोगी सामानों तथा पुराने रबर के चक्कों को तत्काल प्रभाव से रिहायशी इलाकों से दूर हटाने की सख्त हिदायत नगर निगम काशीपुर द्वारा दी गई है। घरों के कबाड़खानों, छतों के कोनों या कबाड़ियों की दुकानों में पड़े पुराने टायर और टूटे-फूटे बर्तन इस मौसम में सबसे बड़े विलेन बनकर उभरते हैं क्योंकि इनमें बारिश का पानी बड़ी आसानी से जमा हो जाता है और हफ्तों तक सूखता नहीं है। नगर निगम काशीपुर ने काशीपुर के समस्त निवासियों से आग्रह किया है कि वे अपने परिसरों की सघन चेकिंग करें और ऐसे किसी भी कबाड़ को तुरंत नष्ट करें या बेच दें जो मच्छरों को छिपने और फलने-फूलने का सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराता हो। इन बेकार पड़ी वस्तुओं में जमा होने वाली पानी की एक-एक बूंद सैकड़ों घातक कीटों को जन्म देने की क्षमता रखती है, इसलिए इस प्रकार के कचरे का सही निस्तारण करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।
स्वच्छता की इस वृहद मुहिम को गति देते हुए नगर निगम काशीपुर ने आंतरिक और बाह्य परिवेश की समग्र शुचिता पर विशेष बल दिया है और इसे जन-जन का निजी संकल्प बनाने की पुरजोर वकालत की है। केवल अपने घर के भीतर झाड़ू लगा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि हमारे आशियाने के चारों ओर का वातावरण भी पूरी तरह गंदगी और कीचड़ से मुक्त होना चाहिए, तभी इस संक्रामक चक्र को तोड़ा जा सकता है। नगर निगम काशीपुर का मानना है कि जब तक काशीपुर का प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के दो गज के दायरे को साफ रखने की जिम्मेदारी स्वयं नहीं उठाएगा, तब तक सरकारी प्रयास भी पूरी तरह फलीभूत नहीं हो सकते। यह समय किसी पर दोषारोपण करने का नहीं बल्कि स्वयं आगे बढ़कर स्वच्छता दूत बनने का है, ताकि हमारे बच्चे और बुजुर्ग बिना किसी भय के खुले वातावरण में सांस ले सकें और बीमारियों के इस खौफनाक जाल से हमेशा के लिए सुरक्षित रह सकें।
प्रशासन ने सुरक्षात्मक उपायों की फेहरिस्त को और आगे बढ़ाते हुए आम जनमानस को यह बहुमूल्य मशविरा दिया है कि वे अपने मकानों की खिड़कियों, झरोखों और मुख्य द्वारों पर बारीक लोहे या नायलॉन की जालियां अवश्य स्थापित करवाएं। यह भौतिक अवरोध मच्छरों को घर के भीतर प्रवेश करने से रोकने का सबसे अचूक और पर्यावरण अनुकूल तरीका है, जिससे रात और दिन दोनों ही समय में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। नगर निगम काशीपुर ने स्पष्ट किया है कि बाहरी साफ-सफाई के साथ-साथ यह यांत्रिक घेराबंदी भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि शाम होते ही इन कीटों का हमला तेज हो जाता है और जालियां न होने की सूरत में ये सीधे हमारे शयनकक्षों तक पहुंच जाते हैं। यदि हम अपने घरों को इन सुरक्षा जालियों से कवर कर लेते हैं, तो हम सोते समय भी इन जानलेवा कीड़ों के डंक से पूरी तरह महफूज रह सकते हैं, जो कि स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से एक बेहद स्मार्ट और दूरदर्शी कदम साबित होगा।
अपील के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में नगर निगम काशीपुर ने संपूर्ण काशीपुर की जनता को एक सूत्र में पिरोने और सामूहिक चेतना जगाने का एक बेहद भावुक और ओजस्वी आह्वान किया है। इस संदेश के जरिए कहा गया है कि आइए, हम सब मिलकर एक जागरूक, सतर्क और जिम्मेदार समाज का निर्माण करें और अपने प्यारे परिवार के साथ-साथ पूरे काशीपुर को इन भयावह बीमारियों के प्रकोप से पूरी तरह प्रतिरक्षित कर दें। नगर निगम काशीपुर का यह दृढ़ विश्वास है कि जन-भागीदारी की ताकत से बड़ी कोई ताकत नहीं होती और जब काशीपुर का एक-एक नागरिक इस सुरक्षात्मक कवच को अपना लेगा, तो कोई भी बीमारी हमारे कदम नहीं डिगा पाएगी। अतः इस मानसूनी सीजन में भयभीत होने के बजाय सजग रहने का संकल्प लें, ताकि स्वास्थ्य और समृद्धि की एक नई सुबह इस ऐतिहासिक शहर में हमेशा मुस्कुराती रहे।





