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प्रशासन से सहमति के बाद टूटा गतिरोध, किसान सुखवंत सिंह के परिवार ने दाह संस्कार को दी मंजूरी

काशीपुर। किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद उपजे गहरे शोक, आक्रोश और असहज हालात के बीच आखिरकार प्रशासन और मृतक के परिवार के बीच सहमति बन गई है। इस सहमति के बाद जहां एक ओर लंबे समय से रुकी दाह संस्कार की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की गई, वहीं दूसरी ओर पूरे घटनाक्रम ने जिले में प्रशासनिक संवेदनशीलता, जवाबदेही और किसान हितों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया। आत्महत्या जैसी हृदयविदारक घटना के बाद से ही परिवार गहरे सदमे में था और न्याय की मांग को लेकर अड़ा हुआ था। प्रशासन की ओर से किए गए आश्वासनों और ठोस कदमों की बात सामने आने के बाद परिवार ने बातचीत के जरिए समाधान की राह अपनाने पर सहमति जताई। यह घटनाक्रम केवल एक परिवार और प्रशासन के बीच संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने पूरे इलाके का ध्यान अपनी ओर खींच लिया, जहां हर कोई यह जानना चाहता था कि आखिर इस दुखद घटना के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है और पीड़ित परिवार को किस तरह की राहत दी जाती है।

बीती शाम जब मृतक सुखवंत सिंह का शव उनके घर पहुंचा, तो माहौल बेहद भावुक और दर्दनाक हो गया था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ था। इसी दौरान परिवार की ओर से प्रशासन के सामने तीन अहम मांगें रखी गईं, जिनमें दोषियों पर सख्त कार्रवाई, धोखाधड़ी की रकम की रिकवरी और परिवार को न्याय दिलाने से जुड़े मुद्दे शामिल थे। परिवार ने इन मांगों को लेकर स्पष्ट अल्टीमेटम दिया था कि यदि दोपहर 12 बजे तक ठोस आश्वासन और कार्रवाई का भरोसा नहीं मिला, तो वे आगे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि मामला पहले ही संवेदनशील हो चुका था और किसी भी तरह की टकराव की स्थिति कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती थी। ऐसे हालात में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया था कि वह तत्काल संवाद की पहल करे और पीड़ित परिवार को भरोसे में ले।

इसी दबाव और हालात को देखते हुए आज सुबह स्थानीय प्रशासन की ओर से मृतक सुखवंत सिंह के परिवार के साथ औपचारिक वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में एसडीएम काशीपुर अभय प्रताप सिंह, एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह और एडिशनल एसपी/सीओ दीपक सिंह मौजूद रहे। बातचीत के दौरान प्रशासन ने परिवार की पीड़ा को समझने का प्रयास किया और यह स्पष्ट किया कि उनकी मांगों को गंभीरता से लिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को आश्वस्त किया कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी और जो भी कानूनी व प्रशासनिक कदम आवश्यक होंगे, उन्हें अमल में लाया जाएगा। इस वार्ता का माहौल शुरुआत में तनावपूर्ण रहा, लेकिन धीरे-धीरे संवाद के जरिए स्थिति को संभाल लिया गया। अधिकारियों ने परिवार को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि शासन इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना प्राथमिकता है।

वार्ता के दौरान एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मृतक सुखवंत सिंह के परिजनों द्वारा रखी गई मांगें पूरी तरह जायज हैं और प्रशासन उन्हें पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। एसपी ने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार की कानूनी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी और पीड़ित परिवार को हर स्तर पर सहयोग दिया जाएगा। उनके इस बयान को परिवार ने ध्यान से सुना और उम्मीद जताई कि प्रशासन अपने वादों पर खरा उतरेगा। इस आश्वासन के बाद वार्ता का माहौल कुछ हद तक शांत हुआ और परिवार ने प्रशासन की मंशा को समझने की कोशिश की।

वहीं एसडीएम काशीपुर अभय प्रताप सिंह ने बातचीत के दौरान घटना को अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस मामले को स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने जानकारी दी कि मंडल आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके। एसडीएम ने कहा कि मृतक के परिजनों द्वारा दोषियों पर कार्रवाई और धोखाधड़ी की रकम की रिकवरी को लेकर जो मांगें रखी गई हैं, उन पर विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन और परिवार के बीच सहमति बन चुकी है और अब सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इस बयान ने परिवार को कुछ हद तक संतोष दिया और उन्होंने दाह संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

प्रशासन के आश्वासन के बाद यह तय हुआ कि परिवार की तीन मांगों में से दो मांगों को पूरा करने पर सहमति बन गई है, जबकि तीसरी मांग को लेकर भी समयबद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि जो भी कदम कानून के दायरे में आते हैं, उन्हें पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा। इस सहमति के बाद परिवार ने यह संकेत दिया कि वे फिलहाल प्रशासन को समय देना चाहते हैं, ताकि वादों को जमीन पर उतारा जा सके। दाह संस्कार की तैयारी शुरू होने की सूचना के साथ ही इलाके में फैली तनाव की स्थिति में भी कुछ कमी आई। हालांकि, लोग अभी भी इस बात को लेकर सतर्क नजर आए कि प्रशासन अपने आश्वासनों पर कितना खरा उतरता है और पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय कब तक मिलता है।

पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने भी प्रशासन और परिवार के बीच हुई वार्ता को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि सुबह हुई बातचीत में यह स्पष्ट हुआ है कि मृतक सुखवंत सिंह के साथ करीब 3 करोड़ 80 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई थी, जिसमें से 25 प्रतिशत रकम पहले ही परिवार को दिलाई जा चुकी है। इस पर प्रशासन ने औपचारिक रूप से सहमति जता दी है। जितेंद्र सिंह जीतू के अनुसार शेष 75 प्रतिशत राशि की रिकवरी के लिए प्रशासन ने 20 जनवरी को पड़ने वाले भोग से एक दिन पूर्व, यानी 19 जनवरी तक का समय मांगा है। यह रकम दोषियों से वसूल की जाएगी और परिवार को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सहमति परिवार के लिए एक बड़ी राहत है, हालांकि अंतिम परिणाम पूरी तरह राशि की वसूली पर निर्भर करेगा।

किसान नेता जितेंद्र सिंह जीतू ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी के इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी चल रही है, जिस पर मृतक के परिवार ने सहमति दे दी है। उन्होंने कहा कि परिवार अब चाहता है कि केवल आश्वासन ही नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई भी नजर आए। जितेंद्र सिंह जीतू ने प्रशासन को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 19 जनवरी तक शेष राशि की रिकवरी नहीं कराई जाती है, तो 20 जनवरी को होने वाला भोग हाईवे पर ही किया जाएगा और हाईवे जाम कर दिया जाएगा। उनके इस बयान से यह साफ हो गया है कि किसान संगठन इस मामले में पीछे हटने के मूड में नहीं हैं और प्रशासन पर लगातार दबाव बनाए रखेंगे, ताकि पीड़ित परिवार को उसका हक मिल सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि किसानों से जुड़े मामलों में समय रहते न्याय क्यों नहीं मिल पाता और क्यों उन्हें ऐसे कठोर कदम उठाने पड़ते हैं। सुखवंत सिंह की आत्महत्या केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की कमजोरी का प्रतीक बन गई है, जहां आर्थिक शोषण और प्रशासनिक देरी मिलकर किसी को इस हद तक तोड़ देती है। प्रशासन और परिवार के बीच बनी सहमति से फिलहाल हालात संभलते नजर आ रहे हैं, लेकिन असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि दिए गए आश्वासन कितनी ईमानदारी से पूरे किए जाते हैं। जिले की जनता, किसान संगठन और पीड़ित परिवार सभी की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि यह मामला केवल आश्वासनों तक सीमित रहता है या वास्तव में न्याय की दिशा में एक ठोस कदम साबित होता है।

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