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महासम्मेलन में उठी पूरे देश में पूर्ण शराबबंदी और कड़े चुनाव नियमों की ऐतिहासिक मांग

जैन धर्मशाला में जुटे पांच राज्यों के 55 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिबंधित सूखे नशे के सरेआम बिकने पर जताया गहरा आक्रोश और उत्तराखंड में संयुक्त आंदोलन के लिए बनाई नई कड़क कमेटी।

देहरादून। देवभूमि के राजनैतिक और सामाजिक गलियारों में उस वक्त एक बहुत बड़ी और निर्णायक हलचल शुरू हो गई जब उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय (24-25 मई) अंतर राज्यीय महासम्मेलन में ‘नशा मुक्त भारत-नशा मुक्त उत्तराखंड’ के पावन संकल्प को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किए गए। इस बेहद महत्वपूर्ण और बड़े स्तर के सम्मेलन में समूचे देश के भीतर पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू करने की एक बेहद संवेदनशील और कड़क मांग केंद्र व राज्य सरकारों के सामने रख दी गई है, जिसने शासन-प्रशासन के अधिकारियों को गहरे चिंतन में डाल दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राज्यों के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों के इस जुटान में समाज को खोखला कर रहे नशे के काले सिंडिकेट के खिलाफ सीधे तौर पर एक खुली जंग का ऐलान किया गया है। राजधानी के इस मंच से न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदुस्तान को इस सामाजिक बुराई से पूरी तरह निजात दिलाने के लिए एक अभूतपूर्व कानूनी और सामाजिक ढांचा तैयार करने की रूपरेखा खींची गई है, जिसकी गूंज अब देश के कोने-कोने में सुनाई देने लगी है।

इस दो दिवसीय महामंथन के शानदार समापन के बाद कुमाऊं के मुख्य प्रवेश द्वार रामनगर पहुंचने पर आयोजन समिति के बेहद सक्रिय सदस्य और सम्मानित राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी ने स्थानीय मीडिया और प्रेस को एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी करते हुए सम्मेलन की तमाम बड़ी रणनीतियों का खुलासा किया। उन्होंने बेहद संजीदगी के साथ बताया कि नशा मुक्त भारत और नशा मुक्त उत्तराखंड के इस महान और पवित्र संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित इस बड़े अंतर राज्यीय सम्मेलन में उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न कोनों से आए 55 से भी अधिक प्रबुद्ध और कद्दावर सामाजिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। इन सभी समाजसेवियों ने दो दिनों तक चले इस गहन चिंतन शिविर में समाज के भीतर तेजी से पैर पसार रही नशे की इस भयावह बीमारी पर बेहद कड़ा और विचलित करने वाला आक्रोश व्यक्त किया और सर्वसम्मति से ऐसे कड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी जो आने वाले दिनों में देश और प्रदेश की सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाले हैं।

सम्मेलन के दौरान पारित किए गए प्रस्तावों में सबसे क्रांतिकारी और ऐतिहासिक मांग यह उठाई गई है कि देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को एक बेहद मजबूत कानूनी ज्ञापन भेजा जाएगा, जिसमें यह अनिवार्य शर्त जोड़ी जाए कि जिस क्षण से किसी भी प्रदेश, जनपद, नगर पालिका, नगर निगम, पंचायत या कोऑपरेटिव सोसाइटी के चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू की जाए, बिल्कुल उसी क्षण से संबंधित भौगोलिक क्षेत्र में पूर्ण रूप से शराब की बिक्री और वितरण पर शत-प्रतिशत प्रतिबंध लगा दिया जाए। इस ऐतिहासिक मुहिम की शुरुआत करने के पीछे प्रतिनिधियों का यह साफ तर्क है कि चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर शराब और अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था को दूषित करने के लिए किया जाता है। इसलिए अब इस सामाजिक मंच ने साफ फैसला किया है कि वे जनता के बीच जाकर एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएंगे ताकि देश की आम जनता खुद इस बात को समझे और चुनावों के दौरान आचार संहिता के साथ-साथ पूर्ण शराबबंदी की इस जायज और जरूरी मांग के पक्ष में एक अभूतपूर्व जन-आंदोलन खड़ा हो सके।

इस विराट आंदोलन को उत्तराखंड के जमीनी स्तर पर बेहद सुनियोजित और आक्रामक रूप से चलाने के लिए देवभूमि के तमाम छोटे-बड़े सामाजिक संगठनों, जागरूक नागरिकों और मातृशक्ति को एक मंच पर लाने का बड़ा फैसला किया गया है, जिसके लिए विशेष रूप से ‘नशा मुक्त जन जागरण संयुक्त अभियान समिति उत्तराखंड’ का गठन किया गया है। इस नवगठित समिति को धरातल पर पूरी मजबूती से संचालित करने की अहम जिम्मेदारी सदन द्वारा सर्वसम्मति से नैनीताल उच्च न्यायालय के वरिष्ठ एवं बेहद सम्मानित अधिवक्ता डी के जोशी बागेश्वर (व्यसन मुक्त समाज एवं सिविल सोसाइटी गरुड़ बागेश्वर) को बतौर प्रदेश संयोजक सौंपी गई है। इसके साथ ही, सामाजिक क्षेत्र में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान रखने वाले और ‘नेकी की दीवार’ के माध्यम से जनपद नैनीताल में लगातार मानवीय व कल्याणकारी कार्य कर रहे ताराचंद घिल्डियाल को इस पूरी समिति का सह संयोजक मनोनीत किया गया है। यह दोनों ही कद्दावर चेहरे अब उत्तराखंड के हर ब्लॉक, हर तहसील और हर गांव में जाकर नशे के खिलाफ एक संयुक्त और बेहद अभेद्य मोर्चा तैयार करेंगे ताकि युवाओं को इस दलदल से पूरी तरह बचाया जा सके।

सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने उत्तराखंड समेत देश के अलग-अलग राज्यों में शराबबंदी और नशे के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर ऐतिहासिक आंदोलन कर रही वीर महिलाओं और पुरुषों के प्रति गहरी एकजुटता प्रकट की और उन पर पुलिस व प्रशासन द्वारा दर्ज किए गए तमाम मुकदमों को तुरंत प्रभाव से बिना शर्त वापस लेने की पुरजोर वकालत की। इसके साथ ही, मंच से हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर, नोएडा और गुड़गांव जैसे प्रमुख औद्योगिक व व्यापारिक नगरों में अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे गरीब मजदूरों पर की गई शासन-प्रशासन की दमनात्मक व उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों की कड़े शब्दों में घोर निंदा की गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बेहद आक्रोश भरे लहजे में चेतावनी देते हुए सरकार से मांग की कि विभिन्न जेलों में बंद किए गए इन निर्दोष मजदूरों को अविलंब और बिना किसी शर्त के तुरंत रिहा किया जाए और उन पर लगाए गए तमाम तरह के झूठे मुकदमों को तत्काल निरस्त किया जाए, क्योंकि शांतिपूर्ण आंदोलन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

इस महासम्मेलन के आखिरी चरण में देश और प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था को पूरी तरह से खोखला कर रहे सूखे नशे के अवैध कारोबार पर सबसे तीखा और जोरदार प्रहार किया गया, जहाँ कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बावजूद चरस, अफीम, गांजा, स्मैक, हेरोइन और खतरनाक नशे के इंजेक्शनों की गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले और स्कूल-कॉलेजों के आसपास हो रही सरेआम बिक्री पर बेहद गंभीर चिंता और गहरा दुख प्रकट किया गया। प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब यह सारे नशीले पदार्थ कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं, तो फिर ये चंद रुपयों के लालच में हमारे नौजवानों तक इतनी आसानी से कैसे पहुंच रहे हैं। इसी खौफनाक जमीनी हकीकत को देखते हुए इस अंतर राज्यीय मंच ने सूबे के शासन, पुलिस महानिदेशक और स्थानीय जिला प्रशासनों से सीधे तौर पर यह कड़क मांग की है कि वे इस प्रतिबंधित नशे की तस्करी में लिप्त बड़े-बड़े सफेदपोश अपराधियों और उनके पूरे काले नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए तुरंत धरातल पर एक बेहद प्रभावी, पारदर्शी और कड़ा एक्शन प्लान तैयार करें ताकि देवभूमि की पावन संस्कृति को हमेशा-हमेशा के लिए सुरक्षित और नशा मुक्त बनाया जा सके।

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