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दीपक बाली के नेतृत्व में काशीपुर नगर निगम का कमाल और एसटीपी भ्रमण से जागी जल क्रांति

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के तहत महापौर की अनूठी पहल से स्कूली बच्चों ने सीखा गंदे पानी को शुद्ध करने का विज्ञान, अब आधुनिक तकनीक और अर्बन चैलेंज फंड से बदलेगी काशीपुर की सूरत और औद्योगिक जल प्रबंधन।

काशीपुर। शहरों में बढ़ती आबादी के साथ स्वच्छता और जल प्रबंधन की चुनौती लगातार गंभीर होती जा रही है। ऐसे समय में काशीपुर नगर निगम द्वारा सीवरेज के गंदे पानी को शुद्ध कर उपयोगी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भविष्य की पीढ़ी को जागरूक करने का भी माध्यम बन रहे हैं। इसी सोच के साथ ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26’ के अंतर्गत नगर निगम काशीपुर द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के दो प्रमुख शिक्षण संस्थानों-‘‘लिटिल स्कॉलर स्कूल और गुरुकुल विद्यालय’’ के लगभग एक सौ तीस छात्र-छात्राओं को अली खाँ स्थित धोबीघाट सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का शैक्षिक भ्रमण कराया गया। इस कार्यक्रम के पीछे मुख्य प्रेरणा काशीपुर के महापौर दीपक बाली की रही, जिन्होंने माना कि स्वच्छता और जल संरक्षण की असली समझ तब विकसित होती है जब नई पीढ़ी इन व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखती और समझती है। विद्यार्थियों को यहां यह बताया गया कि शहर के घरों और नालों से निकलने वाला गंदा पानी किस प्रकार वैज्ञानिक प्रक्रिया से साफ कर पुनः उपयोग के योग्य बनाया जाता है। भ्रमण के दौरान छात्रों ने न केवल मशीनों और टैंकों को देखा, बल्कि विशेषज्ञों से संवाद करते हुए यह भी जाना कि सीवेज जल को उपचारित कर खेती और अन्य उपयोगों के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है। इस अनोखे अनुभव ने बच्चों में पर्यावरण के प्रति गहरी रुचि और जिम्मेदारी का भाव पैदा किया।

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार काशीपुर में सीवरेज के गंदे पानी को वैज्ञानिक तरीके से शुद्ध करने के लिए अब तक चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से तीन संयंत्र ‘नमामि गंगे’ योजना के अंतर्गत स्थापित किए गए हैं, जबकि एक प्लांट ‘अमृत मिशन’ योजना के तहत लगाया गया है। इन सभी संयंत्रों का मूल उद्देश्य शहर के नालों और घरों से निकलने वाले दूषित पानी को शोधन प्रक्रिया के माध्यम से साफ कर उसे दोबारा उपयोग के लायक बनाना है। अली खाँ के धोबीघाट क्षेत्र में स्थापित एसटीपी प्लांट इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन दस मिलियन लीटर पानी को उपचारित करने की है। वर्तमान समय में यहां लगभग सात मिलियन लीटर सीवेज जल को शुद्ध कर सिंचाई के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है। छात्रों को बताया गया कि शहर के गैंबिया नाला और बर्फ फैक्ट्री नाला से आने वाला अत्यधिक प्रदूषित पानी इस प्लांट में पहुंचता है, जहां कई चरणों से गुजरने के बाद यह काफी हद तक स्वच्छ हो जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि लगभग 300 पीपीएम तक प्रदूषित पानी को उपचारित कर करीब 10 पीपीएम तक शुद्ध किया जा सकता है, जिससे वह कृषि उपयोग के लिए उपयुक्त बन जाता है। बच्चों ने जब इस पूरी प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखा तो उनके लिए यह अनुभव बेहद रोचक और आश्चर्यजनक साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने अब तक इस प्रक्रिया के बारे में केवल किताबों में ही पढ़ा था।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों की उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। वे अलग-अलग टैंकों, पाइपलाइन और मशीनों को देखकर लगातार सवाल पूछ रहे थे कि आखिर किस तरह गंदा पानी धीरे-धीरे साफ होकर उपयोग योग्य बन जाता है। विशेषज्ञों ने उन्हें सरल भाषा में समझाया कि इस प्रक्रिया में कई चरण होते हैं, जिनमें प्रारंभिक छानना, जैविक उपचार, तलछट हटाना और अंतिम शुद्धिकरण शामिल है। इस क्रम में गंदे पानी में मौजूद ठोस कचरे और हानिकारक तत्वों को अलग किया जाता है और बैक्टीरिया की सहायता से पानी को स्वच्छ बनाया जाता है। छात्रों को यह भी बताया गया कि उपचार के बाद तैयार पानी को नजदीकी खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है, जिससे भूजल पर निर्भरता कम होती है और पानी का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है। लगभग 30 से 40 मीटर की दूरी पर स्थित खेतों तक यह पानी पहुंचाया जाता है, जहां किसान इसका उपयोग खेती में करते हैं। इस जानकारी ने छात्रों को यह एहसास कराया कि जो पानी रोजमर्रा की जिंदगी में बेकार समझकर नालों में बहा दिया जाता है, वही पानी वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद फिर से उपयोगी बन सकता है। बच्चों के लिए यह अनुभव केवल एक शैक्षिक भ्रमण नहीं था, बल्कि पर्यावरण और संसाधनों के महत्व को समझने का एक जीवंत पाठ भी था।

शैक्षिक भ्रमण के दौरान जब छात्र-छात्राओं ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के भीतर विभिन्न टैंकों और मशीनों को करीब से देखा, तो उनके मन में कई सवाल पैदा हुए। विशेषज्ञों ने उन्हें सरल और रोचक तरीके से बताया कि शहर के घरों, नालों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी सबसे पहले पाइपलाइन के माध्यम से इस प्लांट तक लाया जाता है। यहां आने के बाद पानी को कई चरणों में साफ किया जाता है। प्रारंभिक चरण में बड़े-बड़े कचरे और ठोस पदार्थों को अलग किया जाता है, इसके बाद जैविक प्रक्रिया के माध्यम से पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों को कम किया जाता है। आगे के चरणों में पानी को टैंकों में ठहराकर तलछट को नीचे बैठाया जाता है और साफ पानी को अलग किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को देखकर बच्चों को यह समझने में आसानी हुई कि वैज्ञानिक तकनीक किस प्रकार गंदे पानी को उपयोग योग्य बना सकती है। विद्यार्थियों ने यह भी देखा कि किस तरह प्लांट के अलग-अलग हिस्सों में मशीनें और पाइपलाइन लगातार काम कर रही हैं और पानी को एक चरण से दूसरे चरण तक पहुंचा रही हैं। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि उपचारित पानी का रंग और गंध दोनों में बड़ा परिवर्तन आ जाता है। जो पानी शुरू में अत्यंत गंदा और दुर्गंधयुक्त होता है, वही प्रक्रिया पूरी होने के बाद साफ दिखाई देने लगता है और सिंचाई के लिए सुरक्षित बन जाता है। बच्चों ने इस पूरी व्यवस्था को देखकर आश्चर्य व्यक्त किया और माना कि पानी को बर्बाद करने के बजाय उसका पुनः उपयोग करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान महापौर दीपक बाली ने भी विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्हें जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने में केवल प्रशासनिक तंत्र की भूमिका ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी होती है। खासतौर पर नई पीढ़ी यदि पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक हो जाए तो आने वाले समय में शहरों की तस्वीर बदल सकती है। महापौर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का जिम्मेदार नागरिक बनेगा और वही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने घरों और मोहल्लों में भी स्वच्छता का संदेश फैलाएं और पानी की बर्बादी रोकने के लिए लोगों को प्रेरित करें। महापौर दीपक बाली ने यह भी कहा कि नगर निगम काशीपुर लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिनका उद्देश्य लोगों को स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे इस तरह की व्यवस्थाओं को स्वयं देखकर समझते हैं तो उनके मन में शहर के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यही कारण है कि नगर निगम ने स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम शुरू किए हैं, ताकि वे किताबों में पढ़ी गई जानकारी को वास्तविक रूप में समझ सकें।

भ्रमण के दौरान महापौर दीपक बाली ने यह भी बताया कि काशीपुर में स्थापित एसटीपी प्लांट शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच और सरकार की योजनाओं के तहत काशीपुर को चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मिले हैं, जिनमें अलग-अलग क्षमता के संयंत्र कार्य कर रहे हैं। अली खाँ के धोबीघाट क्षेत्र में स्थित 10 एमएलडी क्षमता का यह प्लांट करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा एक 18 एमएलडी क्षमता का प्लांट भी स्थापित किया गया है, जिसकी लागत लगभग 32 करोड़ रुपये बताई जाती है और वह कॉर्बेट क्षेत्र के पास संचालित हो रहा है। इसके साथ ही शहर में दो अन्य छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी कार्य कर रहे हैं, जिनकी क्षमता क्रमशः एक एमएलडी और तीन एमएलडी है। इन सभी संयंत्रों के माध्यम से शहर के सीवेज पानी को नालों से जोड़कर उपचारित किया जा रहा है। महापौर ने कहा कि पहले यह गंदा पानी सीधे नदियों या खुले क्षेत्रों में चला जाता था, जिससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता था, लेकिन अब वैज्ञानिक प्रणाली के जरिए इसे साफ कर उपयोग के योग्य बनाया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यह व्यवस्था शहर को स्वच्छ बनाने के साथ-साथ जल संसाधनों के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

इस अवसर पर महापौर दीपक बाली ने विद्यार्थियों को एक अनोखा प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी तकनीक और नए विचारों से भरपूर है, इसलिए यदि किसी छात्र के पास शहर को बेहतर बनाने के लिए कोई सुझाव हो तो वह नगर निगम तक जरूर पहुंचाए। उन्होंने बच्चों को बताया कि वे व्हाट्सएप, सोशल मीडिया, ईमेल या पत्र के माध्यम से अपने सुझाव भेज सकते हैं। महापौर ने कहा कि नगर निगम हर अच्छे सुझाव का स्वागत करेगा और यदि कोई सुझाव शहर के हित में होगा तो उसे लागू करने का भी प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शहर की व्यवस्था को बेहतर बनाने में जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है और बच्चे इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। महापौर के इस संदेश को सुनकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्होंने भी आश्वासन दिया कि वे जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक रहेंगे तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए महापौर दीपक बाली ने भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में काशीपुर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में उपचारित पानी को साफ करने के बाद नदियों अथवा अन्य स्थानों पर छोड़ा जा रहा है, लेकिन नगर निगम की अगली योजना इससे कहीं आगे की है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस पानी का और अधिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विशेष परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। महापौर ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में बजट में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के नाम से एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य शहरों में ऐसे नवाचारपूर्ण और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहन देना है जो शहरी जीवन को बेहतर बना सकें। इसी योजना के अंतर्गत काशीपुर नगर निगम भी एक महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार कर रहा है, जिसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी को औद्योगिक इकाइयों और अन्य उपयोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा। महापौर ने कहा कि इस परियोजना के लिए परामर्शदाता नियुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और फरवरी माह में इसके लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। उनका कहना था कि यदि यह योजना सफल होती है तो शहर के लिए जल प्रबंधन का एक नया मॉडल विकसित होगा, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि उद्योगों को भी एक वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध हो सकेगा।

महापौर दीपक बाली ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि काशीपुर में बड़ी संख्या में पेपर उद्योग संचालित हो रहे हैं, जिन्हें उत्पादन प्रक्रिया के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यदि एसटीपी प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी को इन उद्योगों तक पहुंचाया जाए तो इससे भूजल के अत्यधिक दोहन को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि नगर निगम इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रहा है और इसके लिए विस्तृत परियोजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में तकनीकी सुधारों के माध्यम से इस पानी को और अधिक शुद्ध कर पीने योग्य बनाने की संभावना पर भी काम किया जा सकता है। महापौर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में जब वे सूरत गए थे तो वहां उन्होंने देखा कि किस प्रकार सीवेज के पानी को आधुनिक तकनीक से उपचारित कर पीने योग्य बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद कई महापौरों के साथ उन्होंने स्वयं उस पानी का स्वाद भी चखा और यह देखकर आश्चर्य हुआ कि पूरी प्रक्रिया के बाद पानी बिल्कुल स्वच्छ और सुरक्षित हो जाता है। इसी मॉडल से प्रेरणा लेकर काशीपुर में भी ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में विचार किया जा रहा है, जिससे शहर के जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम के दौरान महापौर दीपक बाली ने यह भी कहा कि आज की नई पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सबसे बड़ी शक्ति है और यदि बच्चों को सही दिशा और जानकारी दी जाए तो वे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के सबसे प्रभावी दूत बन सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल इस भ्रमण तक सीमित न रहें, बल्कि अपने घर, विद्यालय और आसपास के क्षेत्रों में भी जल संरक्षण तथा स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करें। महापौर ने कहा कि नगर निगम की कोशिश है कि शहर के अधिक से अधिक स्कूलों के विद्यार्थियों को समय-समय पर ऐसे शैक्षिक भ्रमण कराए जाएं, ताकि वे प्रत्यक्ष रूप से देख सकें कि नगर निगम किस प्रकार शहर की स्वच्छता और जल प्रबंधन के लिए काम कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब बच्चे स्वयं इस प्रक्रिया को समझेंगे तो वे समाज में जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे और लोगों को गंदगी न फैलाने तथा पानी की बर्बादी रोकने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नागरिक और विशेष रूप से युवा पीढ़ी नगर निगम के प्रयासों में सहभागी बन जाए तो काशीपुर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार शहर बनाने का सपना निश्चित रूप से साकार हो सकता है।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस पहल की सराहना की। गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के छात्र शनि भंडारी ने कहा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी पहल सरकार द्वारा उठाया गया एक सराहनीय कदम है, क्योंकि इससे गंदे पानी को साफ कर दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है। उनका कहना था कि आज के समय में जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है, ऐसे में यदि गंदे पानी को पुनः उपयोग के योग्य बनाया जाए तो इससे पानी की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है। वहीं लिटिल स्कॉलर स्कूल की छात्रा वर्गिका ने बताया कि उन्होंने इस विषय के बारे में अपनी सातवीं कक्षा की किताबों में पढ़ा था, लेकिन आज पहली बार उन्हें वास्तविक रूप में इसे देखने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि किताबों में पढ़ी गई प्रक्रिया को अपनी आंखों के सामने होते देखना उनके लिए बेहद रोमांचक अनुभव रहा। कई अन्य विद्यार्थियों ने भी कहा कि अब उन्हें यह समझ में आया है कि पानी को बेकार समझकर नालियों में बहा देना कितना गलत है और किस तरह वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से उसी पानी को फिर से उपयोगी बनाया जा सकता है। बच्चों ने यह भी कहा कि वे अपने घरों और समाज में लोगों को पानी बचाने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। अधिकारियों के अनुसार ‘स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26’ के तहत नगर निगम लगातार स्कूलों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों के साथ मिलकर विभिन्न गतिविधियां आयोजित कर रहा है, ताकि शहर में स्वच्छता के प्रति व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसी क्रम में विद्यार्थियों को एसटीपी प्लांट का भ्रमण कराया गया, जिससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि नगर निगम शहर को स्वच्छ रखने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए किस प्रकार काम कर रहा है। कार्यक्रम में जल निगम की अपर सहायक अभियंता ज्योति रावत, एसएनए शालिनी नेगी, सफाई निरीक्षक मनोज कुमार बिष्ट, पार्षद अब्दुल कादिर, सांसद प्रतिनिधि विजय बॉबी, सादिक हुसैन, रियाज अहमद, पुष्कर बिष्ट, रवि प्रजापति, सतीश शर्मा, शिक्षिका मीनल बधवार, पारुल गोयल, नीति सिंगल, भावना सक्सेना, दीपक शर्मा, मंजुला अरोड़ा, गौरव शर्मा, संजय कुमार तथा पीएमयू नगर निगम से सुधाकर अग्रवाल और जावेद मंसूरी सहित कई अन्य लोग मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को शहर के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया और उम्मीद जताई कि इस प्रकार की गतिविधियों से काशीपुर में स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रति जागरूकता और अधिक बढ़ेगी।

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