रामनगर। उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की शांत वादियों और बाघों के दीदार की हसरत रखने वाले बेगुनाह पर्यटकों के साथ डिजिटल जालसाजी का एक ऐसा सनसनीखेज खेल खेला गया है, जिसने पर्यटन जगत में खलबली मचा दी है। रामनगर की वादियों में घूमने का सपना देख रहे देशभर के पर्यटकों को अपनी मीठी बातों और फर्जी वेबसाइट के मायाजाल में फंसाकर लाखों की चपत लगाने वाले एक शातिर ठग का पर्दाफाश हुआ है। जानकारी के अनुसार, शक्तिनगर निवासी फरमान अली उर्फ फरमान नोशु नाम के एक शख्स ने खुद को कॉर्बेट का अधिकृत बुकिंग एजेंट बताकर न केवल पर्यटकों की जेबों पर डाका डाला, बल्कि देवभूमि की साख को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा आघात पहुंचाया है। आरोपी ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों को अपना शिकारगाह बनाया था, जहां वह बाघों के संरक्षण और जंगल सफारी के आकर्षक विज्ञापनों के जरिए लोगों को अपनी ओर खींचता था। यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब कई पर्यटक ठगी का शिकार होकर रामनगर पहुंचे और वहां उन्हें अपनी बुकिंग के फर्जी होने का कड़वा सच पता चला।
इस संगठित अपराध की कार्यप्रणाली इतनी शातिर थी कि आम पर्यटक चाहकर भी इसके झांसे से बच नहीं पा रहे थे। आरोपी फरमान अली उर्फ फरमान नोशु ने फेसबुक पर ‘Corbettvender’ नाम से एक आईडी बना रखी थी और इंस्टाग्राम पर ‘naija jungle safari’ के नाम से एक बेहद आकर्षक प्रोफाइल संचालित कर रहा था। इसके साथ ही उसने एक फर्जी वेबसाइट भी तैयार की थी, जो दिखने में बिल्कुल सरकारी पोर्टल की तरह विश्वसनीय लगती थी। इन डिजिटल औजारों के माध्यम से वह सफारी और रात्रि विश्राम की कन्फर्म बुकिंग का झूठा आश्वासन देकर पर्यटकों से भारी-भरकम एडवांस राशि अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लेता था। मासूम पर्यटक बाघों की दहाड़ सुनने और जंगल के बीच रात गुजारने के उत्साह में बिना किसी जांच-पड़ताल के हजारों रुपये आरोपी के खाते में डाल देते थे। आरोपी की हिम्मत इतनी बढ़ गई थी कि वह पैसे मिलते ही पर्यटकों के व्हाट्सएप पर हूबहू असली जैसे दिखने वाले फर्जी परमिट और दस्तावेज भी भेज देता था, जिससे किसी को शक की गुंजाइश ही न रहे।
जालसाजी की इस तपिश ने तब ज्वालामुखी का रूप ले लिया जब दिल्ली के निवासी निखिल मेहरा ने हिम्मत दिखाते हुए कोतवाली रामनगर में इस फर्जीवाड़े के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। निखिल मेहरा ने अपनी शिकायत में बताया कि कैसे उन्हें बुकिंग का झांसा देकर ठगा गया। इसी कड़ी में पुणे की रहने वाली हेमांगी विक्रांत वर्तक ने भी अपनी आपबीती सुनाते हुए पुलिस को बताया कि उनसे 1 लाख 20 हजार रुपये के आलीशान टूर पैकेज के नाम पर 20 हजार रुपये की अग्रिम राशि वसूली गई थी। जब हेमांगी विक्रांत वर्तक अपने पूरे उत्साह के साथ रामनगर पहुंचीं और उन्होंने रिजर्व के काउंटरों पर अपने दस्तावेज दिखाए, तो वहां तैनात कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके नाम की कोई भी वैध बुकिंग सिस्टम में दर्ज ही नहीं है। उस पल पर्यटकों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्हें एहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुके हैं। इस घटना ने न केवल पर्यटकों को आर्थिक चोट पहुंचाई, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी बुरी तरह तोड़ दिया।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने इस गंभीर मामले पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की अवैध गतिविधियां न केवल पर्यटकों के विश्वास को तोड़ रही हैं, बल्कि विश्वविख्यात कॉर्बेट पार्क की प्रतिष्ठा को भी धूमिल कर रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं से उत्तराखंड के पर्यटन उद्योग को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इको टूरिज्म यूनिट के वन क्षेत्राधिकारी ललित मोहन आर्य ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। ललित मोहन आर्य की ओर से कोतवाली रामनगर में आरोपी फरमान अली उर्फ फरमान नोशु के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 338, 336(3) और 340(2) के तहत मुकदमा दर्ज करने का औपचारिक अनुरोध किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की जालसाजी के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट भी हो सकता है, जिसकी तह तक जाना बहुत जरूरी है ताकि भविष्य में कोई दूसरा पर्यटक इस तरह के लुभावने विज्ञापनों की भेंट न चढ़ सके।
फिलहाल, रामनगर पुलिस ने इस पूरे मामले को अपनी प्राथमिकता पर लेते हुए आरोपी की तलाश के लिए जाल बिछा दिया है। पुलिस की साइबर सेल की टीमें आरोपी के बैंक खातों, सोशल मीडिया गतिविधियों और उसकी फर्जी वेबसाइट के आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुटी हुई हैं। कोतवाली पुलिस का कहना है कि आरोपी फरमान अली उर्फ फरमान नोशु जल्द ही कानून के शिकंजे में होगा। अधिकारियों ने इस घटना के बाद देशभर से आने वाले पर्यटकों से पुरजोर अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत सोशल मीडिया पेज या निजी बैंक खातों में पैसे न भेजें। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे केवल कॉर्बेट की आधिकारिक सरकारी वेबसाइट और मान्यता प्राप्त माध्यमों का ही उपयोग करें ताकि उनकी यात्रा सुरक्षित और सुखद रहे। इस खबर ने रामनगर के स्थानीय पर्यटन कारोबारियों के बीच भी रोष पैदा कर दिया है, जो चाहते हैं कि ऐसे ठगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि देवभूमि की छवि फिर से उज्ज्वल हो सके।





