रामनगर। देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में शनिवार का सवेरा हजारों छात्र-छात्राओं के लिए सुनहरी उम्मीदें और जश्न की सौगात लेकर आया, जब उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने रामनगर बोर्ड मुख्यालय से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के बहुप्रतीक्षित परिणामों का आधिकारिक ऐलान कर दिया। इस बार के नतीजों ने न केवल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाया है, बल्कि समाज के उस बदलते स्वरूप की भी गवाही दी है जहाँ बेटियाँ सफलता के शिखर पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रही हैं। बोर्ड मुख्यालय में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल सती और उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद कुमार सिमल्टी की गौरवमयी उपस्थिति में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने जैसे ही परिणाम जारी किए, पूरे प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई। हाईस्कूल की परीक्षा में जहाँ कुल पास प्रतिशत 92.10% दर्ज किया गया, वहीं इंटरमीडिएट में भी सफलता का ग्राफ 85.11% के सराहनीय स्तर पर रहा। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से संकेत दे रहे हैं कि उत्तराखंड के युवा अपनी मेधा और परिश्रम के बल पर भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और यही कारण है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी तत्काल प्रभाव से सभी सफल विद्यार्थियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
सफलता की इस ऐतिहासिक दास्तां में सबसे उज्ज्वल पक्ष हमारी लाड़लियों का रहा, जिन्होंने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उनकी उड़ान के लिए आसमान भी छोटा है। हाईस्कूल के नतीजों पर नजर डालें तो बालिकाओं ने 96.07% की धमाकेदार सफलता दर के साथ बालकों के 88.03% के प्रदर्शन को काफी पीछे छोड़ दिया है। इसी तरह इंटरमीडिएट की दहलीज पर भी छात्राओं ने 88.09% का शानदार स्कोर कर छात्रों के 81.93% के आंकड़े पर अपनी बढ़त बरकरार रखी। गौर करने वाली बात यह है कि इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाएं कई मायनों में ऐतिहासिक रहीं, क्योंकि पहली बार संपूर्ण आवेदन प्रक्रिया को अत्याधुनिक ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराया गया, जिससे लाखों परीक्षार्थियों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली और व्यवस्था में पारदर्शिता आई। शिक्षा मंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि हाईस्कूल में इस बार 1 लाख 12 हजार 266 और इंटरमीडिएट में 1 लाख 2 हजार 986 यानी कुल मिलाकर 2 लाख 15 हजार 252 परीक्षार्थियों ने अपना भविष्य दांव पर लगाया था, और उनके परिश्रम का फल आज सबके सामने एक सुखद परिणाम के रूप में मौजूद है।
हाईस्कूल की प्रावीण्य सूची में इस बार रामनगर के गौरव अक्षत गोपाल ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 500 में से 491 अंक (98.20%) हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान झटक लिया। अक्षत की इस कामयाबी ने एमपी हिंदू इंटर कॉलेज का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया है। वहीं, सफलता की दौड़ में उत्तरकाशी के ईशान कोठारी और जीआईसी खेरना, नैनीताल की मेधावी छात्रा भूमिका पांडे ने 490 अंकों (98%) के साथ संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर कब्जा जमाया। विशेष रूप से भूमिका पांडे की सफलता ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा क्योंकि उन्होंने न केवल राज्य स्तर पर दूसरा स्थान पाया, बल्कि बालिकाओं की विशिष्ट मेरिट सूची में भी सर्वोच्च शिखर हासिल किया। इनके ठीक पीछे मंडल-रामबाग, बागेश्वर के योगेश जोशी ने 489 अंकों (97.80%) के साथ तृतीय स्थान प्राप्त कर अपने जिले का मान बढ़ाया। जनपदों के प्रदर्शन की बात करें तो बागेश्वर जिला इस बार भी शिक्षा का असली केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ हाईस्कूल का कुल परिणाम 96.98% रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ राज्य में नंबर वन पायदान पर है।
इंटरमीडिएट की परीक्षा में भी बागेश्वर जिले की मेधा ने अपना डंका बजाया, जहाँ सरस्वती शिशु मंदिर की गीतिका पंत और उधम सिंह नगर स्थित भंजूराम अमर इंटर कॉलेज, भूरारानी की होनहार छात्रा सुशीला मेहंदीरत्ता ने 490 अंकों (98%) के साथ प्रदेश की श्रेष्ठता सूची में संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। इन दोनों बेटियों की जुगलबंदी ने राज्य में शिक्षा के प्रति बढ़ते उत्साह को प्रतिबिंबित किया है। इनके बाद सरस्वती विद्या मंदिर आवास विकास, ऋषिकेश के आर्यन ने 489 अंकों (97.80%) के साथ द्वितीय स्थान और सरस्वती विद्या मंदिर, मायापुर हरिद्वार की वंशिका ने 485 अंकों (97%) के साथ तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी सफलता की कहानी लिखी। इंटरमीडिएट के परिणामों में खास बात यह रही कि सम्मान सहित उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 7,814 रही, जबकि 41,507 छात्रों ने प्रथम श्रेणी में अपनी जगह बनाई। बागेश्वर जनपद ने यहाँ भी बाजी मारी और 94.81% के साथ राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, वहीं इंटर का कुल परिणाम पिछले साल की अपेक्षा 1.88% बेहतर रहा, जो शिक्षा विभाग की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
परीक्षाओं के व्यवस्थित और पारदर्शी संचालन के लिए बोर्ड ने इस बार सूक्ष्म रणनीति तैयार की थी, जिसके तहत पूरे उत्तराखंड में 1,261 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे। इनमें 1,211 मिश्रित केंद्रों के साथ-साथ 50 एकल केंद्र भी बनाए गए थे ताकि भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार छात्रों को दिक्कत न हो। सुरक्षा और शुचिता के लिहाज से 156 केंद्रों को संवेदनशील और 6 को अति संवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। जिलों की बात करें तो टिहरी गढ़वाल 136 केंद्रों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि चंपावत में मात्र 44 केंद्रों पर परीक्षा संपन्न हुई। 16 जनवरी से शुरू हुई प्रयोगात्मक परीक्षाओं के बाद फरवरी के तीसरे सप्ताह से 20 मार्च तक चली लिखित परीक्षाओं के दौरान अनुशासन का विशेष ध्यान रखा गया। अब परिणामों की सुलभता के लिए बोर्ड ने नई तकनीक अपनाई है, जहाँ हर स्कूल को अलग पोर्टल और पासवर्ड दिया गया है ताकि छात्र अपने विद्यालय में ही रिजल्ट देख सकें। इसके अलावा आधिकारिक वेबसाइट www.ubse.uk.gov.in पर भी नतीजे उपलब्ध हैं। शिक्षा मंत्री ने असफल छात्रों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि यह केवल एक परीक्षा है, जीवन नहीं; इसलिए वे निराश होने के बजाय दोगुनी शक्ति से फिर प्रयास करें।





