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उत्तराखंड के लाखों छात्र-छात्राओं की धड़कनें तेज: 24 से 27 अप्रैल के बीच बोर्ड परीक्षा 2026 के महापरिणाम का होगा भव्य शंखनाद

सचिव विनोद कुमार सिमल्टी ने दी हरी झंडी और अब 24 से 27 अप्रैल के बीच खुलेगा 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की किस्मत का पिटारा जहाँ पहली बार नई डिजिटल व्यवस्था से निकलेगा महापरिणाम का ऐतिहासिक जश्न।

रामनगर। देवभूमि उत्तराखंड के शैक्षिक गलियारों में इन दिनों केवल एक ही चर्चा जोरों पर है कि आखिर वह घड़ी कब आएगी जब लाखों विद्यार्थियों की मेहनत का फल उनके सामने होगा। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर ने अब उन तमाम अटकलों और उत्सुकता पर विराम लगाने का मन बना लिया है, जो पिछले कई हफ्तों से छात्रों और उनके अभिभावकों के जहन में कौंध रही थीं। परिषद के विश्वसनीय सूत्रों और स्वयं सचिव विनोद कुमार सिमल्टी की ओर से आए ताजा संकेतों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम अब किसी भी क्षण घोषित किया जा सकता है। शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के बीच मचे इस हलचल से यह साफ है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह की शुरुआत उत्तराखंड के लिए बड़ी खबर लेकर आने वाली है। परिषद ने यह लगभग तय कर लिया है कि आगामी 24 से 27 अप्रैल के बीच किसी भी शुभ मुहूर्त में नतीजों की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी, जिससे 2 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का लंबा और बेचैनी भरा इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है।

इस वर्ष की उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा केवल आंकड़ों के लिए नहीं, बल्कि अपनी आधुनिक और पारदर्शी कार्यप्रणाली के लिए भी याद की जाएगी। डिजिटल इंडिया के विजन को धरातल पर उतारते हुए, उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने पहली बार समूची आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से संपन्न कराया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ। इस नई व्यवस्था के बावजूद छात्रों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और आंकड़ों की जादुई दुनिया में नजर डालें तो हाईस्कूल की परीक्षा में इस बार 1 लाख 12 हजार 266 नौनिहालों ने अपनी किस्मत आजमाई है। वहीं, दूसरी ओर करियर की दहलीज पर खड़े इंटरमीडिएट के 1 लाख 2 हजार 986 छात्र-छात्राओं ने पूरे दमखम के साथ अपनी मेधा का प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर, 2 लाख 15 हजार 252 परीक्षार्थियों के भविष्य का फैसला अब बंद लिफाफों और डिजिटल सर्वरों में सुरक्षित है, जिसे सार्वजनिक करने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

परीक्षा के आयोजन से लेकर मूल्यांकन तक का सफर किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन विभाग की मुस्तैदी ने इसे एक मिसाल बना दिया। सत्र की शुरुआत से ही समयबद्धता का ऐसा अनुशासन देखा गया कि प्रयोगात्मक परीक्षाएं कड़ाके की ठंड के बीच 16 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक सफलतापूर्वक संपन्न कर ली गईं। इसके ठीक बाद, फरवरी के तीसरे सप्ताह से मुख्य लिखित परीक्षाओं का बिगुल फूंका गया जो 20 मार्च तक अनवरत रूप से चलता रहा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया को केवल एक ही पाली में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित किया गया, जिससे छात्रों को मानसिक शांति और एकाग्रता के साथ पेपर हल करने का भरपूर समय मिला। नकल विहीन और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामनगर बोर्ड ने जो चक्रव्यूह रचा था, वह पूरी तरह सफल रहा और अब परिणाम की गुणवत्ता पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

पूरे उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा केंद्रों का जाल बिछाना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, जिसे परिषद ने बखूबी अंजाम दिया। प्रदेश के कोने-कोने में शिक्षा की अलख जगाने के उद्देश्य से कुल 1,261 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे, जिनमें 50 एकल केंद्र और 1,211 मिश्रित केंद्रों का समावेश था। सुरक्षा और संवेदनशीलता के लिहाज से प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतते हुए 156 केंद्रों को संवेदनशील और 6 अति संवेदनशील श्रेणी में सूचीबद्ध किया था, जहां निगरानी के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिलावार आंकड़ों का विश्लेषण करें तो टिहरी गढ़वाल ने शिक्षा के प्रति अपनी जागरूकता का परिचय देते हुए सबसे अधिक 136 केंद्रों के साथ अग्रणी भूमिका निभाई, जबकि चंपावत में सबसे कम 44 केंद्रों पर परीक्षार्थियों ने अपनी लेखनी का जादू बिखेरा। प्रत्येक केंद्र पर अनुशासन की कमान इतनी सख्त थी कि पूरी परीक्षा अवधि के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

वर्तमान स्थिति की बात करें तो बोर्ड सचिव विनोद कुमार सिमल्टी ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि कॉपियों को जांचने का महायज्ञ 10 अप्रैल तक पूरी तरह संपन्न हो चुका है। राज्य के विभिन्न मूल्यांकन केंद्रों से सभी उत्तर पुस्तिकाएं अब सुरक्षित तरीके से परिषद के मुख्यालय रामनगर तक पहुंच चुकी हैं। इस समय मुख्यालय के भीतर का नजारा किसी युद्ध स्तर की तैयारी जैसा है, जहां कर्मचारी और विशेषज्ञ दिन-रात डेटा पंचिंग और अंकों की गहन जांच (क्रॉस-चेकिंग) के काम में जुटे हुए हैं। परिणाम में किसी भी तरह की त्रुटि की गुंजाइश न रहे, इसके लिए सॉफ्टवेयर आधारित जांच के साथ-साथ मैनुअल सत्यापन का कार्य भी अपने अंतिम पड़ाव पर है। जैसे ही यह तकनीकी प्रक्रिया पूरी होगी, परिषद की उच्च स्तरीय परिणाम समिति की एक औपचारिक बैठक आहूत की जाएगी, जिसमें अंतिम मोहर लगते ही रिजल्ट की तारीख और समय का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

डिजिटल युग के इस दौर में छात्रों को अपने अंक देखने के लिए साइबर कैफे या लंबी लाइनों में न भटकना पड़े, इसके लिए उत्तराखंड बोर्ड ने इस बार एक क्रांतिकारी और बेहद सुविधाजनक नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। परिषद की इस अनूठी पहल के तहत प्रदेश के सभी संबंधित स्कूलों को एक विशेष पोर्टल और उनका व्यक्तिगत पासवर्ड प्रदान किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से अब छात्र अपने संबंधित स्कूल में ही जाकर शिक्षकों की मदद से अपना रिजल्ट पलक झपकते ही देख सकेंगे, जिससे दूर-दराज के पहाड़ी क्षेत्रों में इंटरनेट की समस्या से जूझने वाले बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, बोर्ड की पुरानी और भरोसेमंद आधिकारिक वेबसाइट पर भी नतीजे हमेशा की तरह उपलब्ध रहेंगे, लेकिन स्कूल स्तर पर पासवर्ड आधारित पहुंच ने इस प्रक्रिया को और अधिक व्यक्तिगत और सुरक्षित बना दिया है। कुल मिलाकर, उत्तराखंड बोर्ड 2026 की यह सुनहरी सुबह अब बस दस्तक देने ही वाली है, जो लाखों परिवारों के आंगन में खुशियों और उम्मीदों का नया सवेरा लेकर आएगी।

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