हरिद्वार। उत्तराखंड की राजनीति में एक नए और चर्चित अध्याय की शुरुआत तब हुई, जब समाजवादी पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में बड़ा और अलग तरह का प्रयोग करते हुए एक युवा संत को अहम जिम्मेदारी सौंपी। हरिद्वार से सामने आए इस फैसले ने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ संत समाज और आम जनता का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महंत शुभम गिरी को उत्तराखंड का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। खड़खड़ी, हरिद्वार में रहने वाले 35 वर्षीय महंत शुभम गिरी संत परंपरा से जुड़े हुए हैं और उन्होंने संस्कृत में आचार्य की डिग्री के साथ वैदिक शिक्षा भी ग्रहण की है। उत्तराखंड जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक राज्य में एक संत को राजनीतिक संगठन की बागडोर सौंपना सपा की रणनीति में नए संकेत देता है। पार्टी के इस फैसले को संगठन विस्तार, सामाजिक संतुलन और वैचारिक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद महंत शुभम गिरी ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी की विचारधारा, नीतियों और कार्यक्रमों को वे पूरे समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि वे लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए हैं और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम करते हुए पार्टी की जमीनी हकीकत को नजदीक से देखा है। महंत शुभम गिरी ने कहा कि पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए ही हाईकमान ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो भरोसा पार्टी नेतृत्व ने उन पर जताया है, उस पर खरा उतरने के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे और संगठन को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर बात करते हुए महंत शुभम गिरी ने स्वीकार किया कि उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी का संगठन इस समय कमजोर अवस्था में है। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रदेश की सभी कमेटियां भंग पड़ी हैं, जिसके कारण पार्टी की गतिविधियां सीमित हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी के हाईकमान के निर्देशों के अनुसार जल्द ही नई कमेटियों का गठन किया जाएगा। उनका कहना है कि संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है, ताकि पार्टी को जमीनी स्तर पर सक्रिय किया जा सके। महंत शुभम गिरी ने कहा कि उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी को नई ऊर्जा के साथ खड़ा किया जाएगा और इसके लिए कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में संगठनात्मक फैसले तेजी से लिए जाएंगे, ताकि पार्टी की मौजूदगी हर जिले और हर क्षेत्र में महसूस की जा सके।

देवभूमि उत्तराखंड की सामाजिक और धार्मिक पहचान का जिक्र करते हुए महंत शुभम गिरी ने कहा कि यह राज्य संतों, साधुओं और धार्मिक परंपराओं का केंद्र रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी भी इस वास्तविकता को समझते हुए संत समाज को अपने साथ जोड़ने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं संत समाज से आते हैं, इसलिए उनकी भूमिका इस दिशा में सेतु का काम कर सकती है। महंत शुभम गिरी ने बताया कि पार्टी में अन्य साधु-संतों को जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे समाजवादी पार्टी की पहुंच धार्मिक और सामाजिक वर्गों तक बढ़ सके। उनका मानना है कि संत समाज का राजनीति में सकारात्मक योगदान हो सकता है, बशर्ते उसे सही दिशा और मंच मिले। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय और समानता की बात करती है, जो उत्तराखंड की आत्मा से मेल खाती है, और इसी आधार पर पार्टी को मजबूत किया जाएगा।
आगामी चुनावी संभावनाओं को लेकर महंत शुभम गिरी ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी उन्हें अवसर देती है, तो वे हरिद्वार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हैं। उनके अनुसार, हरिद्वार धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां समाजवादी पार्टी की उपस्थिति को मजबूत करना जरूरी है। महंत शुभम गिरी ने कहा कि वे केवल पद की राजनीति में विश्वास नहीं रखते, बल्कि जनता के बीच जाकर काम करने और उनकी समस्याओं को समझने को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में उत्तराखंड में पार्टी प्रभारी की नियुक्ति की जाएगी, जिससे संगठनात्मक कार्यों को और गति मिलेगी। नई कमेटी के गठन के बाद पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।
उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी के इतिहास पर नजर डालें तो राज्य गठन के बाद पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है। हालांकि, राज्य गठन से पहले समाजवादी पार्टी के विधायक बने हैं और एक समय हरिद्वार सीट से पार्टी का सांसद भी चुना गया था। राजेंद्र बाडी के सांसद बनने के बाद हरिद्वार में समाजवादी पार्टी कोई बड़ा चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकी। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व मानता है कि उत्तराखंड में संभावनाएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। महंत शुभम गिरी ने कहा कि बीते वर्षों की कमजोरियों से सबक लेकर अब नए सिरे से रणनीति तैयार की जाएगी। उनका कहना है कि संगठन को मजबूत किए बिना चुनावी सफलता संभव नहीं है, इसलिए पहले संगठन पर फोकस किया जाएगा और फिर जनता के बीच मुद्दों को लेकर जाया जाएगा।

राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच समाजवादी पार्टी का यह फैसला कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक युवा संत को प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि वह परंपरागत राजनीति से हटकर नए प्रयोग करने को तैयार है। महंत शुभम गिरी की शैक्षिक पृष्ठभूमि, धार्मिक पहचान और राजनीतिक अनुभव को देखते हुए पार्टी उनसे बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है। उन्होंने खुद भी यह भरोसा दिलाया है कि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ पार्टी को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। आने वाले समय में नई कमेटियों का गठन, प्रभारी की नियुक्ति और जनाधार बढ़ाने की योजनाएं यह तय करेंगी कि समाजवादी पार्टी उत्तराखंड की राजनीति में किस हद तक अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल कर पाती है। फिलहाल, महंत शुभम गिरी की नियुक्ति ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस और उत्सुकता जरूर पैदा कर दी है।





