रामनगर। रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय में लगातार सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी अव्यवस्थाओं और मरीजों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध न होने के मुद्दे ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों, पैरामेडिकल कर्मचारियों और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की कमी को लेकर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के साथ विभिन्न जन संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिक प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की। इसी क्रम में एक प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तपन शर्मा से उनके कार्यालय में विस्तार से मुलाकात कर अस्पताल की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चर्चा की और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रामनगर और आसपास के पर्वतीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों लोगों के लिए यह अस्पताल जीवन रेखा के समान है, लेकिन वर्तमान समय में यहां उपलब्ध सुविधाएं लोगों की अपेक्षाओं और सरकारी मानकों से काफी पीछे दिखाई देती हैं। प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि अस्पताल में पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक, प्रशिक्षित स्टाफ और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं होंगे तो मरीजों को मजबूर होकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वार्ता के दौरान अस्पताल की वास्तविक परिस्थितियों, मरीजों की परेशानियों और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तपन शर्मा के माध्यम से प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखंड तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन भी प्रेषित किया गया, जिसमें अस्पताल की सभी प्रमुख समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की मांग की गई।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी तथा नगर संयोजक आसिफ ने किया। उनके साथ विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक, श्रमिक और महिला संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अस्पताल की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। बातचीत के दौरान प्रतिनिधियों ने अस्पताल प्रशासन के समक्ष विस्तार से बताया कि वर्तमान में सौ शैय्या क्षमता वाले इस चिकित्सालय में स्वीकृत पदों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अनेक महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े हैं, जिसका सीधा असर मरीजों के उपचार और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से बताया कि अस्पताल में फिजिशियन, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, ईएमओ, चर्म रोग विशेषज्ञ, चीफ फार्मासिस्ट, स्वास्थ्य निरीक्षक, नर्सिंग सहायक तथा लैब टेक्नीशियन सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर पर्याप्त नियुक्तियां नहीं हैं। परिणामस्वरूप मरीजों को समय पर विशेषज्ञ परामर्श नहीं मिल पाता और कई मामलों में उन्हें हल्द्वानी अथवा अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां नहीं की गईं तो भविष्य में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। उन्होंने सरकार से अस्पताल को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए त्वरित निर्णय लेने की मांग की ताकि क्षेत्रवासियों को अपने ही शहर में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो सकें।
बैठक के दौरान अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आज के समय में सीटी स्कैन जैसी अत्यंत आवश्यक जांच सुविधा का अस्पताल में उपलब्ध न होना मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बना हुआ है। दुर्घटनाओं, सिर की चोट, ब्रेन स्ट्रोक तथा अन्य गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को निजी केंद्रों या दूरस्थ अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे उपचार में अनावश्यक देरी होती है और कई बार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भारी खर्च वहन करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त अस्पताल में स्थापित आईसीयू और वेंटिलेटर जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं का भी अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाने पर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि करोड़ों रुपये की लागत से उपलब्ध कराए गए संसाधन यदि पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं तो उनका उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है। उन्होंने इस स्थिति को स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि केवल भवन और उपकरण उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें संचालित करने के लिए योग्य चिकित्सकों, तकनीकी कर्मचारियों और नियमित रखरखाव की भी समान रूप से आवश्यकता होती है। प्रतिनिधियों ने अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करने, आवश्यक मशीनों को शीघ्र चालू कराने तथा मरीजों को सभी आवश्यक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रशासन को यह भरोसा भी दिलाया कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए यदि सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता होगी तो वे हर स्तर पर प्रशासन के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी अस्पताल की मजबूती केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि समाज और प्रशासन के साझा सहयोग से संभव होती है। प्रतिनिधिमंडल ने इस दौरान अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को होने वाली दैनिक परेशानियों का भी उल्लेख किया तथा सुझाव दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नियमित समीक्षा, रिक्त पदों की शीघ्र पूर्ति, आधुनिक जांच सुविधाओं का विस्तार तथा आवश्यक दवाओं की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तपन शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना और स्पष्ट किया कि उन्हें अस्पताल का कार्यभार संभाले अभी मात्र एक सप्ताह ही हुआ है। उन्होंने कहा कि सीमित समय में अस्पताल की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है और जहां-जहां सुधार की आवश्यकता होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विश्वास दिलाया कि अस्पताल आने वाले प्रत्येक मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सकों और कर्मचारियों की पूरी टीम के साथ निरंतर प्रयास किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के सुझावों का स्वागत किया जाएगा तथा उच्च अधिकारियों तक सभी मांगों को नियमानुसार पहुंचाया जाएगा ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में अपेक्षित सुधार लाया जा सके।
ज्ञापन सौंपने और अस्पताल प्रशासन से विस्तृत वार्ता करने वाले प्रतिनिधिमंडल में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभात ध्यानी, नगर संयोजक आसिफ, देवभूमि व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल, इंकलाबी मज़दूर केंद्र के रोहित रुहेला, समाजवादी लोक मंच के गिरीश आर्या, महिला एकता मंच की सरस्वती जोशी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिम्बाल, सामाजिक कार्यकर्ता पराग गर्ग, सुबोध चमोली, गोपाल असनोडा, किरन आर्या तथा महेश चंद्र सहित अन्य नागरिक भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि रामनगर क्षेत्र की बढ़ती आबादी और आसपास के ग्रामीण एवं पर्वतीय इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पताल को संसाधनों से सशक्त बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका कहना था कि यदि समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आधुनिक जांच सुविधाओं की उपलब्धता और रिक्त पदों की पूर्ति नहीं की गई तो आम लोगों की कठिनाइयां लगातार बढ़ती जाएंगी। प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि प्रदेश सरकार, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारी इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र प्रभावी कदम उठाएंगे, जिससे रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय वास्तव में क्षेत्र की जनता को गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्रमुख सरकारी चिकित्सालय बन सके।





