काशीपुर। उधम सिंह नगर जनपद के काशीपुर क्षेत्र में हाल के दिनों में घटित घटनाओं और स्थानीय समस्याओं को लेकर राजनीतिक सरगर्मी उस समय तेज़ हो गई, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। रुद्रपुर क्षेत्र में बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा एक नमाजी के साथ कथित रूप से की गई अभद्रता के विरोध में कांग्रेस ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसी मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कांग्रेस कमेटी की महानगर अध्यक्ष अलका पाल के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तहसील परिसर पहुँचे, जहाँ उन्होंने नारेबाजी के साथ प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इस प्रकार की घटनाएँ सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। काशीपुर की सड़कों पर उतरे कांग्रेसजनों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि पार्टी अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि जनहित के मुद्दों को लेकर सीधे मैदान में उतरकर संघर्ष करेगी।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसर में पहुँचकर तहसीलदार चंदोला का घेराव किया और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में रंगा दिखाई दिया, जहाँ एक ओर नारेबाज़ी से परिसर गूंज रहा था, वहीं दूसरी ओर स्थानीय नागरिक भी रुककर इस घटनाक्रम को देख रहे थे। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं अलका पाल ने कहा कि क्षेत्र में लगातार जनता की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे आम लोग परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन और प्रशासन जनता के बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रहा। प्रदर्शनकारियों ने महाराणा प्रताप चौक से हेमपुर गौशाला मोड़ तक बुरी तरह क्षतिग्रस्त नेशनल हाईवे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और कहा कि इस मार्ग की हालत लंबे समय से खराब है, जिससे रोज़ाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि यदि शीघ्र ही इस सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने होली और रमज़ान जैसे पवित्र पर्वों के समय बिजली, पानी और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि त्योहारों के दौरान अक्सर आपूर्ति बाधित रहती है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम और संबंधित विभाग त्योहारों के समय भी लापरवाही बरतते हैं, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। इसी क्रम में अतिक्रमण के नाम पर ठेला और फुटपाथ पर छोटे स्तर पर रोज़गार करने वाले कामगारों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गरीब और मेहनतकश लोगों को उजाड़ना किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कार्रवाई करना अमानवीय है।
प्रदर्शन के दौरान यह मांग भी प्रमुख रूप से सामने आई कि नगर के अंदरूनी इलाकों में दोपहिया वाहनों की चेकिंग के नाम पर आम नागरिकों को बेवजह परेशान न किया जाए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि पुलिस द्वारा की जा रही चेकिंग कई बार उत्पीड़न का रूप ले लेती है, जिससे आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा ट्रेड लाइसेंस के नाम पर उपभोक्ताओं को जुर्माना और नोटिस का डर दिखाए जाने का आरोप भी लगाया गया। नेताओं ने कहा कि छोटे व्यापारियों पर इस तरह का दबाव डालना गलत है और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कांग्रेस ने यह भी मांग की कि नैनीताल जनपद की तर्ज पर काशीपुर में भी धान की फसल की बुवाई की अनुमति दी जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
इस पूरे प्रदर्शन के दौरान एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश महासचिव अनुपम शर्मा ने भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के भीतर धार्मिक उन्माद फैलाकर प्रदेश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी। उनका कहना था कि समाज को बांटने वाली राजनीति से प्रदेश का विकास नहीं हो सकता और ऐसी सोच के खिलाफ कांग्रेस मजबूती से खड़ी रहेगी। अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है और सरकार इस पर नियंत्रण पाने में विफल साबित हो रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाज़ी तेज़ कर दी।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने एक-एक कर प्रशासन और सत्ताधारी दल पर तीखे सवाल खड़े किए। मंच से बोलते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरीश कुमार सिंह ने कहा कि भाजपा शासनकाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। इसी क्रम में विमल गुड़िया, संजय चतुर्वेदी और ब्रह्मपाल ने भी भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि शासन की प्राथमिकता जनता की समस्याएं नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ तक सीमित रह गई है। नेताओं ने कहा कि धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिशों से प्रदेश की शांतिपूर्ण छवि को नुकसान पहुंच रहा है और इसका सीधा असर सामाजिक सौहार्द पर पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना था कि जनता अब इन सब बातों को समझने लगी है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
इस दौरान कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार काशीपुर को क्षेत्र की समस्याओं से संबंधित सात सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। मांग-पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि महाराणा प्रताप चौक से हेमपुर गौशाला मोड़ तक नेशनल हाईवे की स्थिति अत्यंत दयनीय है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके साथ ही त्योहारों के दौरान बिजली, पानी और सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने, अतिक्रमण के नाम पर छोटे ठेला-फुटपाथ व्यवसायियों का उत्पीड़न बंद करने, नगर के अंदरूनी क्षेत्रों में दोपहिया वाहन चेकिंग के नाम पर आम नागरिकों को परेशान न करने, ट्रेड लाइसेंस के नाम पर जुर्माना और नोटिस का भय न दिखाने तथा काशीपुर में भी धान की बुवाई की अनुमति दिए जाने जैसी मांगें प्रमुख रूप से शामिल थीं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये सभी मांगें सीधे आम जनता से जुड़ी हुई हैं और यदि प्रशासन ने इन पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन में मौजूद कई अन्य वरिष्ठ और युवा नेताओं ने भी अपने-अपने विचार रखते हुए भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण आम आदमी त्रस्त है और जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं अरुण चौहान, सुभाष पाल, इकबाल अदीब और डॉ. रमेश कश्यप ने कहा कि प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, न कि सत्ता के दबाव में काम करना चाहिए। नेताओं ने यह भी कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस सड़कों पर उतरकर संघर्ष करेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भी एक स्वर में भाजपा सरकार के खिलाफ नाराज़गी जाहिर की। पार्षद अब्दुल कादिर, रशीद फारूकी, शाह आलम, मोहम्मद आरिफ, साबिर हुसैन, जफर मुन्ना और फिरोज हुसैन सहित कई नेताओं ने कहा कि भाजपा शासन में केवल घोषणाएं हो रही हैं, ज़मीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ बनना है और इसी संकल्प के साथ पार्टी कार्यकर्ता लगातार संघर्ष करते रहेंगे।
समापन की ओर बढ़ते इस आंदोलन में माहौल पूरी तरह राजनीतिक चेतना से भरा दिखाई दिया। महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह प्रदर्शन केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि आम जनता की भावनाओं को भी अभिव्यक्त कर रहा था। अलका पाल ने अंत में कहा कि कांग्रेस हर वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी और किसी भी कीमत पर सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा। तहसील परिसर से लौटते समय कार्यकर्ताओं ने यह संदेश दिया कि यदि प्रशासन ने सात सूत्रीय मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। काशीपुर में हुआ यह प्रदर्शन आने वाले समय में राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है, जिसने स्थानीय मुद्दों को एक बार फिर केंद्र में ला खड़ा किया है।





