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अनुपम शर्मा ने कहा सीएम धामी की सीबीआई जांच मंजूरी अतीत की गलतियों को साबित किया

अंकिता भंडारी मामले में लगातार संघर्ष और जनता की आवाज के दबाव से मिली सीबीआई जांच, कांग्रेस ने न्याय की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट न्यायाधीश की देखरेख की मांग उठाई।

काशीपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (AICC) के सदस्य अनुपम शर्मा ने “हिंदी दैनिक सहर प्रजातंत्र” से विशेष बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की मंजूरी देना साबित करता है कि अतीत में सरकार ने इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की थी। उनका कहना था कि पिछले समय में सरकार की लापरवाहियों और न्यायिक प्रक्रियाओं में देरी ने इस संवेदनशील मामले में जनता का भरोसा कमजोर किया था। अनुपम शर्मा ने यह भी बताया कि अब जब सरकार ने सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार कर लिया है, यह केवल एक आदेश नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के संघर्ष और जनता की आवाज का परिणाम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह निर्णय उन लोगों के धैर्य और संघर्ष की जीत है जो अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग लगातार करते रहे।

अनुपम शर्मा ने आगे कहा कि इस सफलता में सिर्फ आम जनता का योगदान ही नहीं है, बल्कि इसके पीछे अंकिता भंडारी के माता–पिता की अटूट हिम्मत और संघर्ष भी है। उन्होंने बताया कि माता–पिता ने इस मामले में लगातार सरकार और प्रशासन पर दबाव बनाए रखा, तब जाकर आज सीबीआई जांच का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों के प्रयासों को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने लगातार इस मामले को उठाया, प्रदर्शन और मांगों के माध्यम से सरकार को मजबूर किया कि वह सीबीआई जांच के लिए कदम उठाए। अनुपम शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया सबके संयुक्त प्रयास का परिणाम है, जिसमें सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल और आम नागरिक शामिल थे। यही कारण है कि अब यह फैसला केवल एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि पूरे समाज की जागरूकता और संघर्ष का प्रमाण है।

साथ ही अनुपम शर्मा ने यह भी उल्लेख किया कि हालांकि सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण सवाल बने हुए हैं। उनका कहना था कि जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह देखा जाना आवश्यक है कि क्या सुप्रीम कोर्ट कोर्ट के किसी न्यायाधीश को इस जांच की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है, क्योंकि जांच केवल आदेश देकर पूरी नहीं होती, बल्कि उसकी निष्पक्षता और न्यायसंगत परिणाम सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। अनुपम शर्मा ने जोर देकर कहा कि जनता की उम्मीदें और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के किसी माननीय न्यायाधीश की देखरेख में ही जांच पूरी हो।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि सीबीआई जांच की मंजूरी केवल सरकार का आदेश नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के तमाम सामाजिक संगठन और राजनीतिक दल लंबे समय से इस मांग को लेकर आवाज उठाते रहे। उनका कहना था कि यह निर्णय साबित करता है कि जब जनता और समाज का दबाव संगठित रूप में उत्पन्न होता है, तब सरकारें भी मजबूर होकर कार्रवाई करती हैं। अनुपम शर्मा ने इस अवसर पर यह भी कहा कि यदि न्यायधीश की निगरानी में जांच होती है, तो न केवल मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में ऐसे संवेदनशील मामलों के लिए भी एक मजबूत मिसाल बनेगी।

इसके अलावा अनुपम शर्मा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मामले में सतर्क रहेगी और जांच की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखेगी। उनका कहना था कि केवल जांच का आदेश देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह जरूरी है कि जांच पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ संपन्न हो। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कोई पक्षपात या अनदेखी होती है, तो कांग्रेस इसे सामने लाने के लिए पूरी ताकत से प्रयास करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंकिता भंडारी के माता–पिता और समाज की भावनाओं का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसी दृष्टिकोण से कांग्रेस यह मांग कर रही है कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश की देखरेख में जांच हो।

अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि इस मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया और लोगों में न्याय की उम्मीद पैदा की। उनका कहना था कि जनता और राजनीतिक दलों के संघर्ष के बिना सरकार को यह कदम उठाने में इतना समय लग सकता था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केवल आदेश देने से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा, बल्कि इसकी निगरानी और निष्पक्षता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य न केवल मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है, बल्कि यह भी देखना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर समाज और प्रशासन की संवेदनशीलता बनी रहे।

वह आगे कहते हैं कि यह मामला एक चेतावनी भी है कि संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व वाले मामलों में सरकारों की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अतीत में कुछ गलतियां की हैं, लेकिन अब सीबीआई जांच के आदेश के माध्यम से यह साबित हो गया कि जनता और समाज के दबाव में सरकार भी कदम उठा सकती है। अनुपम शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह समाज और प्रशासन के बीच एक भरोसेमंद संवाद का हिस्सा बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस प्रक्रिया में पूर्ण रूप से सतर्क रहेगी और सुनिश्चित करेगी कि जांच का परिणाम न्यायसंगत और पारदर्शी हो।

अंत में अनुपम शर्मा ने यह दोहराया कि उनकी मांग यह है कि इस संवेदनशील जांच में सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी न्यायाधीश की देखरेख हो। उनका कहना था कि केवल सीबीआई को आदेश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसकी निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह मांग न्याय सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है, ताकि अंकिता भंडारी के माता–पिता और पूरे समाज को न्याय की पूर्ण आश्वस्ति मिल सके। अनुपम शर्मा ने कहा कि यह केवल राजनीतिक प्रयास नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता और संघर्ष का परिणाम है, जो अब न्याय की राह में निर्णायक साबित होगा।

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कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

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