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भारत ने चंद्रमा दक्षिणी ध्रुव पर इतिहास रचाया राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर देशभर में उत्सव

अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की ऐतिहासिक सफलता की दूसरी वर्षगांठ पर पूरे देश में उत्साह कार्यक्रम आयोजित कर वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और राष्ट्र के गौरव को किया गया सलाम

रामनगर। आज का दिन पूरे देश के लिए गर्व और उल्लास का अवसर बन गया है, क्योंकि ठीक दो साल पहले भारत ने अंतरिक्ष जगत में वह कारनामा किया था, जिसकी गूंज आज भी हर भारतीय के दिल में सुनाई देती है। 23 अगस्त 2023 का दिन भारतीय विज्ञान और तकनीक के इतिहास में अमर हो गया, जब भारत ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने भारत को न सिर्फ एशिया बल्कि वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। इसी दिन भारत चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला चौथा देश और साउथ पोल तक पहुंचने वाला पहला राष्ट्र बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तारीख को सदैव यादगार बनाने के लिए इसे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया, और आज पूरा भारत अपना दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के विभिन्न केंद्रों पर आज खास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि को देशवासियों के बीच बांटा जा रहा है।

भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत बहुत पहले ही हो गई थी, जब स्वतंत्रता के बारह वर्ष बाद वर्ष 1962 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी। उसी साल Indian National Committee for Space Research (INCOSPAR) की स्थापना हुई, जिसके पहले अध्यक्ष महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई बने। इसके बाद 21 नवंबर 1963 को केरल के थुम्बा से भारत ने पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा। कुछ साल बाद 15 अगस्त 1969 को विक्रम साराभाई की अगुवाई में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का गठन हुआ। उस दौर में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं और 1972 में इसरो को औपचारिक रूप से Department of Space के तहत संरचित किया गया। इन प्रारंभिक कदमों ने भारत को उस राह पर ला खड़ा किया जहां आगे चलकर वह वैश्विक स्पेस पावर की कतार में शामिल हुआ।

अंतरिक्ष उपलब्धियों की फेहरिस्त में सबसे यादगार तारीख 19 अप्रैल 1975 मानी जाती है, जब भारत ने अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट लॉन्च किया। सोवियत रॉकेट Kosmos-3M से यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण हुआ और इस क्षण को भारतीय विज्ञान के गौरवपूर्ण इतिहास में दर्ज कर लिया गया। उसी वर्ष NASA की मदद से Satellite Instructional Television Experiment (SITE) भी सफल रहा, जिसने देश के लोगों को पहली बार टेलीविजन और दूरदर्शन का अनुभव कराया। इसके बाद 3 अप्रैल 1984 को राकेश शर्मा अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने। रूस के Soyuz T-11 स्पेसक्राफ्ट से गए राकेश शर्मा ने वहां से “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा” कहकर करोड़ों भारतीयों के दिलों को गर्व से भर दिया। इन उपलब्धियों ने भारत को यह विश्वास दिलाया कि अंतरिक्ष की दुनिया में भी वह किसी से कम नहीं है।

साल 2008 ने भारत को फिर अंतरिक्ष में नई ऊंचाई दिलाई, जब इसरो ने 22 अक्टूबर को Chandrayaan-1 मिशन लॉन्च किया। PSLV-XL से प्रक्षेपित यह सैटेलाइट आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से उड़ान भरकर 10 नवंबर को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके साथ ही भारत चंद्रमा की ऑर्बिट तक पहुंचने वाला दुनिया का पांचवां देश बना। इसके बाद 5 नवंबर 2013 को भारत ने मंगल ग्रह पर पहली ही कोशिश में अपना उपग्रह भेजकर पूरी दुनिया को चकित कर दिया। Mangalyaan मिशन न सिर्फ भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण था, बल्कि इसकी लागत ने भी सबको हैरान कर दिया। लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत में पूरा हुआ यह अभियान सबसे किफायती अंतरिक्ष मिशनों में से एक था। इस दौरान भारत दुनिया का पहला देश बना जिसने मंगल की कक्षा में पहली कोशिश में ही सफलता पाई।

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम ने आगे बढ़ते हुए 15 फरवरी 2017 को एक और रिकॉर्ड बनाया, जब एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को लॉन्च कर पूरी दुनिया को अचंभित कर दिया गया। इसके बाद 22 जुलाई 2019 को Chandrayaan-2 मिशन भेजा गया। हालांकि 6 सितंबर को लैंडर से संपर्क टूट गया और वह चांद की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, फिर भी इसरो ने इस प्रयास से अनमोल अनुभव हासिल किया और हार न मानते हुए अगले मिशन की तैयारी शुरू कर दी। अंततः 14 जुलाई 2023 को Chandrayaan-3 को लॉन्च किया गया और 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरकर भारत को अंतरिक्ष के इतिहास में अमर कर दिया। इस सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर वर्ष 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की।

आज जब भारत अपना दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है, तब देशभर में विभिन्न संस्थानों, विश्वविद्यालयों और स्कूलों में इसरो के वैज्ञानिकों की मेहनत और भारत की उपलब्धियों को याद किया जा रहा है। बीते दो सालों में भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भी तेजी से आगे बढ़ी है और आने वाले वर्षों में गगनयान जैसे मानव मिशन के साथ देश नई बुलंदियों को छूने की ओर अग्रसर है। यह अवसर हर भारतीय को यह याद दिलाता है कि अंतरिक्ष की असीम संभावनाओं को साधने में भारत लगातार कामयाब हो रहा है और वैज्ञानिकों के साहस, दूरदृष्टि और संकल्प ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष शक्तियों की पंक्ति में विशेष स्थान दिलाया है। इस दिन का महत्व केवल अतीत की उपलब्धियों का जश्न मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है कि वे भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नई ऊंचाइयों को छूने का सपना देखें और देश को और आगे ले जाएं।

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