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रामनगर रोड की सूरत बदलने के साथ ‘हाईटेक विजन’ पर महापौर दीपक बाली का बड़ा दांव

17 करोड़ से चमकेगी रामनगर रोड, 165 करोड़ की भव्य योजनाओं और हाईटेक अक्षय पात्रा किचन के साथ महापौर दीपक बाली का ऐतिहासिक 'मिशन विकास' अब धरातल पर उतरेगा, बदलेगी शहर की पूरी तस्वीर।

काशीपुर। उत्तराखंड के उभरते औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र की बदहाल सड़कों और नागरिक सुविधाओं को लेकर नगर सरकार अब आर-पार के मूड में नजर आ रही है। नगर निगम कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान महापौर दीपक बाली ने शहर की जनता और मीडिया के सामने विकास का एक ऐसा खाका पेश किया, जो न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूती देगा बल्कि काशीपुर को एक आधुनिक शहर की कतार में खड़ा कर देगा। महापौर ने अपनी चिरपरिचित संवेदनशीलता का परिचय देते हुए साफ किया कि शहर की हर सड़क उनका अपना घर है और जनता की तकलीफ उनकी निजी चिंता है। विशेष रूप से रामनगर रोड (NH 309) की जर्जर स्थिति पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह राष्ट्रीय राजमार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन है, किंतु उन्होंने इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष मजबूती से पैरवी की है। उन्होंने बताया कि इस सड़क के सुधारीकरण के लिए पहले 16 करोड़ का प्रस्ताव था, जिसे अब संशोधित कर 17 करोड़ 51 लाख रुपये कर दिया गया है और यह केंद्र सरकार के पास अंतिम स्वीकृति के लिए पहुँच चुका है। महापौर ने भरोसा दिलाया कि आगामी वर्षा ऋतु से पूर्व ही इस सड़क का कायाकल्प कर दिया जाएगा ताकि पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को गड्ढों से निजात मिल सके।

विकास की इस बयार में केवल सड़कें ही नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर भी एक क्रांतिकारी पहल की जा रही है। महापौर दीपक बाली ने अक्षय पात्रा फाउंडेशन के माध्यम से निर्मित होने वाली हाईटेक किचन का विवरण साझा करते हुए बताया कि लगभग 18 से 20 करोड़ की लागत से तैयार यह रसोई घर आधुनिक तकनीक का बेजोड़ नमूना होगा। सिडकुल क्षेत्र में बन रही इस रसोई के माध्यम से काशीपुर और आसपास के सरकारी स्कूलों के लगभग 50,000 बच्चों को प्रतिदिन गरमा-गरम और पौष्टिक मिड-डे मील उपलब्ध कराया जाएगा। जमीन संबंधी कुछ तकनीकी बाधाओं और अनापत्ति प्रमाण पत्र की समस्याओं को लेकर महापौर ने स्वयं मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था, जिस पर पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभाव से अधिकारियों को विसंगतियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। यह परियोजना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार करेगी बल्कि शिक्षा के प्रति उनके उत्साह को भी बढ़ाएगी। महापौर ने जोर देकर कहा कि इस किचन का काम अंतिम चरणों में है और अगले 15-20 दिनों में इसे क्रियाशील कर दिया जाएगा, जिससे क्षेत्र के हजारों परिवारों को राहत मिलेगी।

शहर की स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को लेकर भी महापौर ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिसमें हाईटेक शौचालयों का निर्माण प्रमुखता से शामिल है। दीपक बाली ने जानकारी दी कि निदेशालय से तीन हाईटेक शौचालयों की मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से दो के लिए धनराशि भी आवंटित कर दी गई है। ये शौचालय खड़कपुरा-देवीपुरा तिराहे और चैती मेला प्रांगण जैसे व्यस्त इलाकों में बनाए जाएंगे, जिनकी लागत क्रमशः 81 लाख और 76 लाख रुपये से अधिक होगी। इसके अतिरिक्त, टांडा तिराहे के स्थान पर अब धो सागर क्षेत्र में एक नया शौचालय प्रस्तावित किया गया है। पुराने और निष्प्रयोज्य शौचालयों की स्थिति पर मीडिया के तीखे सवालों का जवाब देते हुए महापौर ने स्वीकार किया कि सुलभ शौचालय संचालकों के साथ जल्द ही एक समीक्षा बैठक की जाएगी ताकि बंद पड़े पिंक शौचालयों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को दुरुस्त किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों पर कोई समझौता नहीं होगा और व्यापारियों की शिकायतों पर यूरिनल्स के वेंटिलेशन और रखरखाव में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएंगे।

ऐतिहासिक और पौराणिक चैती मेले के अस्तित्व को लेकर भी प्रेस वार्ता में गंभीर मंथन हुआ। महापौर ने स्थानीय पत्रकारों की इस चिंता से सहमति जताई कि मेले का बाजारीकरण और सरकारीकरण इसकी पौराणिकता को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने घोषणा की कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 13 करोड़ के फंड का उपयोग मेले के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में किया जाएगा। इस योजना में भारी कंक्रीट निर्माण के बजाय हरियाली (ग्रीनरी) और खुले स्थानों पर ध्यान दिया जाएगा ताकि यह स्थान साल भर मॉर्निंग वॉक और सामाजिक गतिविधियों के लिए उपयोग हो सके। दीपक बाली ने यह भी संकेत दिया कि यदि जनता और प्रबुद्ध वर्ग की राय बनती है, तो भविष्य में नगर निगम स्वयं इस मेले के आयोजन की जिम्मेदारी लेने पर विचार कर सकता है। उन्होंने मानसखंड कॉरिडोर योजना और चैती परिसर के विकास को अलग-अलग बताते हुए कहा कि आर्किटेक्ट्स के माध्यम से एक ऐसा डिजाइन तैयार किया जा रहा है जो भविष्य में मेलों के स्वरूप को और अधिक व्यवस्थित और आकर्षक बनाएगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों और मेलार्थियों दोनों को लाभ होगा।

जनता की प्यास बुझाने और आगामी भीषण गर्मी से निपटने के लिए नगर निगम ने जल आपूर्ति को लेकर भी अपनी कमर कस ली है। महापौर दीपक बाली ने बताया कि पूरे शहर में विभिन्न वार्डों और सार्वजनिक स्थानों पर लगभग 100 नए नल लगाने का टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कार्य प्रगति पर है। उन्होंने पार्षदों के साथ समन्वय बनाकर उन क्षेत्रों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं जहाँ पानी की किल्लत सबसे अधिक है। इसके अलावा, ड्रेनेज की समस्या के स्थाई समाधान के लिए 650 करोड़ रुपये के मास्टर प्लान पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग को पहली किस्त के रूप में 125 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। जब तक यह विशाल परियोजना धरातल पर नहीं आती, तब तक नगर निगम युद्ध स्तर पर नालों की सफाई सुनिश्चित करेगा ताकि बरसात में जलभराव की स्थिति पैदा न हो। स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए भारत सरकार के पीएसयू ‘ईईएसएल’ के साथ 30 करोड़ का प्रपोजल अंतिम चरण में है, जिससे शहर की गलियां दूधिया रोशनी से नहा उठेंगी।

प्रेस वार्ता के अंत में महापौर ने विपक्ष और आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि विकास कार्यों में राजनीति का समावेश नहीं होना चाहिए। उन्होंने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में काशीपुर में हो रहे अभूतपूर्व कार्यों, जैसे एआरटीओ कार्यालय का उद्घाटन और गिरिताल-ढैला पुल सौंदर्यीकरण का उल्लेख करते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि नए शामिल हुए 17 वार्डों के लिए 165 करोड़ की योजना पर काम चल रहा है, जिसके तहत सड़क और नालियों का जाल बिछाया जाएगा। दीपक बाली ने विश्वास दिलाया कि वे केवल घोषणाओं के मेयर नहीं हैं, बल्कि धरातल पर काम करने में विश्वास रखते हैं। गौशाला निर्माण, डॉग शेल्टर होम और वेंडिंग जोन जैसे प्रोजेक्ट्स की डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से जनता से अपील की कि वे विकास के इस सफर में सहभागी बनें और भरोसा रखें कि आने वाले कुछ महीनों में काशीपुर एक नई और आधुनिक पहचान के साथ सबके सामने होगा।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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