काशीपुर। रविवार को किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण की जांच में एक अहम कड़ी उस समय जुड़ी, जब विशेष जांच दल यानी एसआईटी की टीम चम्पावत के एसपी अजय गणपति के नेतृत्व में मृतक किसान के आवास पर पहुंची। सुबह से ही गांव में हलचल का माहौल देखने को मिला, क्योंकि जांच एजेंसियों की मौजूदगी ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया। एसआईटी टीम ने दिवंगत किसान सुखवंत सिंह के परिजनों से गहन बातचीत की और उनके बयान दर्ज किए। यह पूरी प्रक्रिया बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ की गई, ताकि परिवार के सदस्यों द्वारा पहले और अब दिए गए बयानों में किसी भी तरह का विरोधाभास स्पष्ट रूप से सामने आ सके। टीम ने परिजनों से घटनाक्रम से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू पर सवाल किए और यह समझने का प्रयास किया कि सुखवंत सिंह किन परिस्थितियों से गुजर रहे थे। गांव में मौजूद लोगों के अनुसार, एसआईटी की यह कार्रवाई केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि जांच को निर्णायक दिशा देने की कोशिश मानी जा रही है।
बीते दिनों काशीपुर क्षेत्र के किसान सुखवंत सिंह द्वारा की गई आत्महत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया था। जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी के एक मामले में खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे किसान ने मानसिक दबाव और निराशा के चलते नैनीताल जिले के काठगोदाम स्थित एक होटल में खुद को गोली मारकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति थी, बल्कि किसानों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करने वाली साबित हुई। बताया जाता है कि सुखवंत सिंह लंबे समय से अपनी जमीन से जुड़े विवाद को लेकर परेशान थे और लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिल पा रहा था। इसी बीच उन्होंने आत्महत्या से पहले एक वीडियो प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने अपनी पीड़ा और कथित धोखाधड़ी का जिक्र किया। इस वीडियो के सामने आते ही प्रदेश भर में हड़कंप मच गया और मामले ने राजनीतिक तथा प्रशासनिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया।
सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या से पहले जारी किया गया वीडियो इस पूरे प्रकरण का सबसे संवेदनशील और अहम पहलू माना जा रहा है। वीडियो में किसान ने बेहद भावुक अंदाज में अपनी बात रखते हुए जमीन से जुड़े कथित घोटाले और उससे उत्पन्न मानसिक तनाव का उल्लेख किया था। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते आम लोगों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को व्यवस्था की विफलता बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदेश सरकार पर भी दबाव बढ़ा कि मामले की गहराई से जांच कराई जाए और दोषियों को कठोर सजा मिले। वीडियो में सुखवंत सिंह की आवाज और आंखों में झलकता दर्द हर किसी को विचलित कर देने वाला था। यही कारण रहा कि यह मामला केवल एक आत्महत्या तक सीमित न रहकर, किसानों की सुरक्षा, भूमि विवादों और प्रशासनिक संवेदनशीलता जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ता चला गया।
प्रदेश भर में बढ़ते आक्रोश और सवालों के बीच सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी के गठन का फैसला किया। आईजी एसआईटी निलेश आनंद भरने के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न जिलों के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया। एसआईटी को इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुखवंत सिंह को आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए किन परिस्थितियों ने मजबूर किया। जांच दल के गठन के बाद से ही मामले में तेजी देखने को मिली और अधिकारियों ने साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। सरकार की ओर से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसआईटी के गठन को लेकर जहां एक ओर परिजनों और आम जनता में उम्मीद जगी, वहीं दूसरी ओर इस बात पर भी नजर रखी जा रही थी कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
कल आईजी निलेश आनंद भरने स्वयं काठगोदाम पहुंचे और उस होटल का निरीक्षण किया, जहां सुखवंत सिंह ने आत्महत्या की थी। एसआईटी की पूरी टीम ने घटनास्थल का बारीकी से अवलोकन किया और वहां मौजूद हर संभावित साक्ष्य को अपने कब्जे में लिया। होटल के कमरे से लेकर आसपास के इलाके तक, हर पहलू की जांच की गई ताकि किसी भी तथ्य को नजरअंदाज न किया जाए। टीम ने होटल कर्मचारियों से भी पूछताछ की और उस दिन की गतिविधियों से संबंधित जानकारी जुटाई। इस दौरान यह भी देखा गया कि कहीं कोई ऐसा तथ्य तो नहीं है, जो अब तक सामने न आया हो। एसआईटी की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि जांच केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर हर तथ्य को परखने की कोशिश है। घटनास्थल निरीक्षण के बाद टीम ने सभी दस्तावेज और साक्ष्य सुरक्षित कर लिए, जिन्हें आगे की जांच में शामिल किया जाएगा।
घटनास्थल निरीक्षण के अगले ही दिन एसआईटी की टीम चम्पावत में एसपी के तौर पर तैनात और एसआईटी के सदस्य अजय गणपति के नेतृत्व में मृतक किसान के घर पहुंची। यहां टीम ने परिजनों से आमने-सामने बैठकर बातचीत की और उनके बयान दोबारा दर्ज किए। परिजनों से यह जानने की कोशिश की गई कि सुखवंत सिंह किन लोगों के संपर्क में थे, जमीन विवाद की स्थिति क्या थी और आत्महत्या से पहले उनके व्यवहार में क्या बदलाव देखने को मिले थे। बयान दर्ज करने की प्रक्रिया के दौरान टीम ने बेहद सतर्कता बरती, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या दबाव की स्थिति न बने। गांव में मौजूद अन्य लोगों और संभावित साक्षियों से भी पूछताछ की गई। इस पूरी कार्रवाई ने यह संकेत दिया कि एसआईटी मामले के हर पहलू को जोड़कर एक स्पष्ट तस्वीर सामने लाना चाहती है।
मीडिया से बातचीत करते हुए एसपी अजय गणपति ने जांच की स्थिति को लेकर अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों मामलों से जुड़े तथ्यों की जांच आईजी निलेश आनंद भरने के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय एसआईटी कर रही है। अजय गणपति के अनुसार, मामले से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज टीम ने अपने कब्जे में ले लिए हैं और हर साक्ष्य की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीते रोज पूरी टीम ने काठगोदाम स्थित वास्तविक घटनास्थल का निरीक्षण किया था और आज मृतक के घर पहुंचकर परिजनों व अन्य साक्षियों के बयान दोबारा दर्ज किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि जांच का उद्देश्य किसी निर्दाेष को परेशान करना नहीं, बल्कि सच्चाई तक पहुंचना है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
कुल परिदृश्य पर नजर डालें तो काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण में एसआईटी की बढ़ती सक्रियता यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि जांच अब निर्णायक दिशा में आगे बढ़ चुकी है। परिजनों के विस्तृत बयान, काठगोदाम स्थित घटनास्थल से एकत्र किए गए भौतिक और तकनीकी साक्ष्य, साथ ही जमीन से जुड़े विवादों के दस्तावेजों को जोड़कर एसआईटी हर कड़ी को आपस में मिलाने का प्रयास कर रही है। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इन तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कई अहम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं, जो अब तक छिपे रहे हैं। यह मामला केवल एक किसान की दर्दनाक मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भूमि विवादों में उलझे किसानों की असुरक्षा, मानसिक दबाव और न्याय प्रणाली की जटिलताओं को भी उजागर कर रहा है। मौजूदा हालात में आम जनता, किसान संगठनों और पीड़ित परिवार की निगाहें एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सुखवंत सिंह को आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने के लिए आखिर किन परिस्थितियों और किन लोगों की भूमिका ने मजबूर किया।





