काशीपुर। लंबे समय से शहर की सड़कों पर भटकते आवारा कुत्तों से परेशान काशीपुरवासियों को अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। जनता की लगातार उठती मांगों और नगर निगम के प्रयासों के बाद आखिरकार काशीपुर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर पूरी तरह कार्यशील हो गया है। करीब दो वर्ष पूर्व इस केंद्र की नींव रखी गई थी, लेकिन बीच में बजट और तकनीकी समस्याओं के कारण निर्माण कार्य ठप पड़ गया था। हालांकि मेयर दीपक बाली के प्रयासों से इस परियोजना ने नई रफ्तार पकड़ी और आठ अगस्त से यह केंद्र पूरी क्षमता के साथ काम करने लगा। अब तक यहां 600 से अधिक स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी और टीकाकरण किया जा चुका है, और प्रतिदिन करीब 15 कुत्तों का सफल ऑपरेशन किया जा रहा है। इस पहल से जहां शहर में आवारा कुत्तों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है, वहीं रेबीज के मामलों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
शहर के पशु चिकित्सालय परिसर में बने इस केंद्र का संचालन डॉ. शिव कुमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। उनके निर्देशन में सात सदस्यीय टीम निरंतर शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर आवारा कुत्तों को पकड़ती है, उनकी सर्जरी और वैक्सीनेशन के बाद उन्हें फिर से उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से उन्हें लाया गया था। इस केंद्र की शुरुआत के साथ ही काशीपुर में पशु नियंत्रण का एक संगठित और वैज्ञानिक तंत्र तैयार हुआ है। बीते वर्षों में लगातार शिकायतें आ रही थीं कि आवारा कुत्तों के कारण बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं डर के साए में जी रहे हैं। कई बार कुत्तों के हमले से लोग घायल भी हुए, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा था। अब इस सेंटर के शुरू होने से लोगों को भरोसा है कि काशीपुर की गलियां फिर से सुरक्षित होंगी।
मेयर दीपक बाली ने निरीक्षण के दौरान कहा कि “अगर नीयत और लगन हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं।” उन्होंने बताया कि उनके पदभार संभालने से पहले यह केंद्र बनकर तैयार तो था, मगर संसाधनों की कमी और उदासीनता के कारण चालू नहीं हो पा रहा था। उन्होंने खुद नगर निगम अधिकारियों से बैठक कर सारी अड़चनों को दूर कराया—चाहे वह उपकरणों की कमी हो, डॉक्टरों की नियुक्ति हो या कैचिंग वाहन की व्यवस्था। सभी कार्य पूरे होने के बाद अगस्त में इसे प्रारंभ किया गया और अब तक लगभग 700 कुत्तों का नसबंदी और वैक्सीनेशन किया जा चुका है। बाली ने बताया कि ऑपरेशन के बाद कुत्तों के बाएं कान पर विशेष निशान लगाया जाता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उन्हें टीका लगाया जा चुका है और वे अब किसी को काट भी लें तो जान का खतरा नहीं रहेगा।
उन्होंने बताया कि फिलहाल लक्ष्य बहुत बड़ा है, क्योंकि सर्वे के अनुसार काशीपुर नगर निगम क्षेत्र में लगभग 8000 से 10,000 आवारा कुत्ते हैं। वर्तमान में केंद्र प्रतिदिन केवल 15 कुत्तों की सर्जरी कर पा रहा है, इसलिए भविष्य में क्षमता बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मेयर ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो दो शिफ्टों में कार्य शुरू किया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द पूरे शहर के कुत्तों का नसबंदी और टीकाकरण हो सके। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई और यह भी तय किया गया कि केंद्र में उपकरणों और स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाएगी।
निरीक्षण के दौरान महापौर के साथ डॉ. अमरजीत सिंह साहनी, दीपा पाठक, पुष्कर बिष्ट, मानवेंद्र मानस चौधरी, समरपाल सिंह समेत कई पार्षद और नगर निगम अधिकारी भी मौजूद रहे। इस अवसर पर डॉ. शिव कुमार ने महापौर को केंद्र की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि फिलहाल केंद्र में केवल 85 कुत्तों को रखने की क्षमता है, लेकिन इसे और विस्तार देने की योजना पर काम चल रहा है। केंद्र अगस्त माह में औपचारिक रूप से शुरू हुआ था और पहले ही दिन तीन कुत्तों का बधियाकरण किया गया था। अब यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। करोड़ों रुपए की लागत से बने इस केंद्र की गति पहले धीमी थी, पर अब महापौर दीपक बाली की पहल से व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है।
महापौर ने केंद्र में उत्पन्न हुई विद्युत समस्याओं को लेकर भी तुरंत कदम उठाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि प्रकाश की कमी कार्य में बाधा डाल रही है। उन्होंने मौके पर ही आठ नई लाइटों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए और विद्युत विभाग के अधिकारियों से सीधी बात कर समाधान कराया। साथ ही, डॉक्टर शिव कुमार को आश्वासन दिया कि जल्द ही यहां आवश्यक उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जल्द ही इस परिसर में कुत्तों के लिए स्थायी आश्रय स्थल भी बनाया जाएगा, ताकि इलाज और निगरानी की प्रक्रिया और बेहतर हो सके।
महापौर ने बताया कि नगर निगम की यह टीम हर दिन कैचिंग वाहन के साथ शहर के अलग-अलग वार्डों में जाकर कुत्तों को पकड़ती है, उनका ऑपरेशन और टीकाकरण कर उन्हें पांच दिन तक रखती है और फिर वापस उनके क्षेत्र में छोड़ देती है। उन्होंने कहा कि अब समय अवश्य लगेगा, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब काशीपुर में आवारा कुत्तों की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे भी इस मुहिम में सहयोग करें और जहां कहीं भी आवारा कुत्तों की अधिकता दिखे, तुरंत निगम को सूचित करें।
डॉ. शिव कुमार ने बताया कि इस केंद्र में कुत्तों को साफ-सुथरे वातावरण में रखा जाता है और उन्हें पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। फिलहाल टीम में विनोद कुमार पप्पू, चंद्रा राजेश, राम अवतार, सुरेंद्र कुमार, शशांक कुमार दुबे (असिस्टेंट मैनेजर) सहित सात सदस्य कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 35 लाख रुपए की लागत से उपकरण, फर्नीचर, विद्युत व्यवस्था और वाहन आदि उपलब्ध कराए गए हैं। रेबीज का टीका लगाए जाने के बाद अब यदि कोई कुत्ता किसी को काट भी लेता है, तो संक्रमण का खतरा नगण्य रह जाता है। काशीपुर के लोग अब राहत की सांस ले रहे हैं, क्योंकि यह परियोजना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा ऐतिहासिक निर्णय है। नगर निगम की सक्रियता और मेयर दीपक बाली के नेतृत्व में अब उम्मीद है कि काशीपुर की सड़कों पर डर नहीं, बल्कि भरोसे का माहौल होगा — एक ऐसा शहर जहां इंसान और पशु दोनों सुरक्षित रह सकें।



