काशीपुर। दलितों के खिलाफ लगातार हो रहे अत्याचार और शोषण के मुद्दे को लेकर आज काशीपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जन्मोत्सव समारोह समिति ने गंभीर कदम उठाया। समिति के अध्यक्ष अखिलेश कुमार आजाद के नेतृत्व में सर्व समाज के लोगों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी काशीपुर के माध्यम से सौंपा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन में विशेष रूप से उस युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई, जिसने सर्वाेच्च न्यायालय का अपमान किया और हरियाणा के सीनियर आईपीएस वाई पूर्ण सिंह के साथ अन्य अधिकारियों द्वारा की गई दुर्व्यवहारपूर्ण कार्रवाई को उजागर किया गया। समिति के सदस्य मानते हैं कि यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि जातिवादी और संरचनात्मक भेदभाव का परिणाम है, जो एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोगों के साथ हो रहा है।
शुकलेश कुमार आजाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह ज्ञापन भारत सरकार और राष्ट्रपति को भेजा गया है ताकि दलित और पिछड़े वर्गों के खिलाफ जारी अन्याय और शोषण को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी पदों पर काम कर रहे एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोग लगातार मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग, जो ईमानदारी से अपने दायित्वों का पालन करते हैं, उन्हें अक्सर गलत परिस्थितियों में फंसाया जाता है और उन्हें काम में बाधा डालने के लिए विवश किया जाता है। अखिलेश कुमार ने जोर देते हुए कहा कि देश में समानता और न्याय का सिद्धांत लागू होना चाहिए और इस प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए स्पष्ट और कठोर नियम बनाए जाने चाहिए।
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह से सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर हरियाणा के अधिकारियों द्वारा किए गए उत्पीड़न की घटनाएँ उजागर हुई हैं, उससे स्पष्ट होता है कि केवल उच्च जातियों और पदों पर बैठे लोगों को ही संरक्षण मिलता है जबकि पिछड़े और अनुसूचित वर्गों के लोग लगातार अन्याय का सामना करते हैं। अखिलेश कुमार ने बताया कि ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अगर ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो समाज में आंदोलन और सशक्त संघर्ष किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल आवाज़ उठाना और न्याय दिलवाना है ताकि भविष्य में कोई भी दलित या पिछड़ा वर्ग अपने अधिकारों के लिए हतोत्साहित न हो।
ज्ञापन सौंपते समय उपस्थित लोगों ने कहा कि यह केवल एक कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने का प्रयास है। अखिलेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस ज्ञापन के माध्यम से यह संदेश जाना चाहिए कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों के साथ किए जा रहे शोषण और अत्याचार को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला न केवल स्थानीय स्तर का है, बल्कि पूरे देश में समानता और न्याय की भावना को चुनौती दे रहा है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि इस मामले में गंभीर और त्वरित कार्रवाई की जाए।
समिति के सदस्य इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि यह ज्ञापन केवल एक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो आगे भी आंदोलन और विरोध जारी रहेगा। अखिलेश कुमार ने बताया कि उनका लक्ष्य केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि समाज में ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें किसी भी वर्ग के लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने से डरें नहीं। उन्होंने कहा कि दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों को अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने का पूरा हक है और किसी भी प्रकार का उत्पीड़न सहन नहीं किया जाएगा।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि जो लोग ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन पर होने वाले किसी भी प्रकार के अनुचित दबाव और शोषण को तुरंत रोका जाना चाहिए। अखिलेश कुमार ने कहा कि यह ज्ञापन राष्ट्रपति के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके और एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाले अन्याय को समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि ज्ञापन सौंपने के दौरान सभी उपस्थित सदस्य गंभीर और शांतिपूर्ण तरीके से उपस्थित थे। अखिलेश कुमार ने कहा कि यह प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए किया गया है और इसका उद्देश्य केवल न्याय की मांग करना है। उन्होंने कहा कि इस ज्ञापन के माध्यम से यह संदेश भी गया है कि देश में किसी भी प्रकार का जातिवाद और भेदभाव सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वह इस मुद्दे को व्यापक रूप से उठाएं और समाज में समानता और न्याय के लिए जागरूकता फैलाएं।
शुकलेश कुमार आजाद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह ज्ञापन भारत सरकार और राष्ट्रपति को भेजा गया है ताकि दलित और पिछड़े वर्गों के खिलाफ जारी अन्याय और शोषण को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी पदों पर काम कर रहे एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय के लोग लगातार मानसिक और सामाजिक दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग, जो ईमानदारी से अपने दायित्वों का पालन करते हैं, उन्हें अक्सर गलत परिस्थितियों में फंसाया जाता है और उन्हें काम में बाधा डालने के लिए विवश किया जाता है। अखिलेश कुमार ने जोर देते हुए कहा कि देश में समानता और न्याय का सिद्धांत लागू होना चाहिए और इस प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए स्पष्ट और कठोर नियम बनाए जाने चाहिए।कुमार आजाद ने कहा कि दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और शोषण की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और इसे रोकने के लिए निर्णायक कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह ज्ञापन एक ऐसे प्रयास का हिस्सा है, जो समाज में न्याय, समानता और अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और सरकार इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो आगे भी समिति संघर्ष जारी रखेगी और देश में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक प्रयास करेगी।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह मांग की गई है कि जो अधिकारी और कर्मचारी दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों के खिलाफ अन्याय और उत्पीड़न कर रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई की जाए। अखिलेश कुमार ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि किसी भी वर्ग के लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने में स्वतंत्र और सुरक्षित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय और समानता की यह लड़ाई पूरे समाज के हित में है।
समिति के सदस्य और समाज के अन्य लोग भी इस ज्ञापन में शामिल हुए और उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल ज्ञापन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि उचित कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आंदोलन और विरोध और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। अखिलेश कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें किसी भी वर्ग के लोग अपने अधिकारों के लिए डर के बिना संघर्ष कर सकें और किसी भी प्रकार का अन्याय सहन न करें।
ज्ञापन सौंपने के बाद समिति ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि यह कार्रवाई समाज में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। अखिलेश कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजना इस दिशा में पहला और निर्णायक प्रयास है और इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसे सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
समिति ने आश्वासन दिया कि यदि इस ज्ञापन के माध्यम से न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ, तो आगे भी समाज के अन्य वर्गों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। अखिलेश कुमार ने कहा कि यह लड़ाई केवल दलितों और पिछड़े वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए है, ताकि देश में समानता और न्याय की भावना मजबूत हो। उन्होंने कहा कि समिति लगातार इस दिशा में प्रयास करती रहेगी और समाज में समानता और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।



