काशीपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है और इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के लगभग हर मार्ग पर अवैध रूप से चल रही डग्गामारी यानी आर्टिगा, इनोवा और स्विफ्ट जैसी टैक्सियाँ खुलेआम सवारी ढो रही हैं। यह टैक्सियाँ टूरिस्ट परमिट के नाम पर बिना किसी रोक-टोक के यात्रियों को लुभा रही हैं और उनके भरोसे का फायदा उठाते हुए निगम की बसों को पूरी तरह प्रभावित कर रही हैं। हालात यह हैं कि निगम की बसें आधी-अधूरी सवारियों के साथ चलने को मजबूर हैं और यात्रियों की संख्या कम होने से भारी आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस गैरकानूनी गतिविधि ने निगम की रीढ़ तोड़कर रख दी है और यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो निगम पूरी तरह से चरमरा जाएगा और उसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा।
प्रदेश के पर्वतीय मार्गों से लेकर दिल्ली, देहरादून और यहां तक कि पंजाब तक जाने वाले मार्गों में भी इन डग्गामारी वाहनों का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है। यह स्थिति केवल एक जिले या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह समस्या पार-राज्यीय स्तर पर भी फैल चुकी है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन की ढिलाई और संबंधित विभागों की लापरवाही ने इन गाड़ियों को और ज्यादा बढ़ावा दिया है। यात्रियों की सुविधाओं और निगम की विश्वसनीयता पर यह सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। यदि स्थिति पर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल निगम का संचालन प्रभावित होगा बल्कि रोजगार और आजीविका पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
चिंता की बात यह भी है कि इस गंभीर समस्या को लेकर अधिकारियों की भूमिका बेहद सवालों के घेरे में है। अधिकांश अधिकारी सिर्फ़ अपने दफ्तर में बैठकर कागजों पर हस्ताक्षर करने तक ही सीमित हैं। फील्ड में जाकर वास्तविक जांच करना और अवैध ढुलाई पर अंकुश लगाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन यह जिम्मेदारी लगभग गायब होती दिख रही है। नतीजा यह है कि सड़कों पर चल रही अवैध टैक्सियाँ बिना किसी रोक-टोक के यात्रियों को उठा रही हैं और परिवहन निगम की बसों की हालत दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है। असली काम होना चाहिए कि अधिकारी सीधे मार्गों पर जाकर जांच करें, स्टेशन और बस स्टैंड पर मौजूदगी दर्ज कराएँ और जहाँ-जहाँ नियम तोड़े जा रहे हैं वहाँ सख्त चालान करें।
अब समय आ गया है कि एआरटीओ, एसडीएम और अन्य सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएँ और इस मामले में तत्काल संज्ञान लें। कार्यालय में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर करने से समस्या का हल नहीं निकल सकता, बल्कि वास्तविक सुधार तभी आएगा जब अधिकारी मैदान में उतरकर कार्रवाई करेंगे। हर मार्ग पर निगरानी रखी जाए, टूरिस्ट परमिट का दुरुपयोग बंद किया जाए और डग्गामारी करने वालों पर ठोस कदम उठाए जाएँ। यदि यह कड़ा कदम तुरंत नहीं उठाया गया तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी और परिवहन निगम का भविष्य पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगा। कर्मचारियों में भी इस बात को लेकर गहरी बेचौनी है कि यदि निगम का घाटा बढ़ता रहा तो उनकी नौकरियों पर सीधा असर पड़ सकता है।
उत्तराखंड परिवहन निगम को बचाने और इसे मजबूत स्थिति में लाने के लिए सरकार और प्रशासन को मिलकर रणनीति बनानी होगी। केवल दिखावे की कार्रवाई से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि स्थायी समाधान तभी निकलेगा जब अवैध परिचालन को पूरी तरह खत्म किया जाएगा। प्रदेश की सड़कों पर चल रही डग्गामारी को रोकना बेहद जरूरी है ताकि निगम की बसों में सवारियों की संख्या फिर से बढ़ सके और आर्थिक स्थिति सुधर सके। इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती और तत्काल सख्ती के बिना निगम की स्थिति और बिगड़ जाएगी।



