spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडउत्तराखंड परिवहन निगम पर अवैध टैक्सियों का शिकंजा घाटे से जूझती बसें...

उत्तराखंड परिवहन निगम पर अवैध टैक्सियों का शिकंजा घाटे से जूझती बसें और बढ़ा संकट

अवैध आर्टिगा इनोवा और स्विफ्ट जैसी टैक्सियाँ यात्रियों को लुभाकर निगम की बसों को कर रहीं खाली प्रशासनिक लापरवाही से बढ़ा आर्थिक बोझ

काशीपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम इन दिनों गहरे संकट से गुजर रहा है और इसकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश के लगभग हर मार्ग पर अवैध रूप से चल रही डग्गामारी यानी आर्टिगा, इनोवा और स्विफ्ट जैसी टैक्सियाँ खुलेआम सवारी ढो रही हैं। यह टैक्सियाँ टूरिस्ट परमिट के नाम पर बिना किसी रोक-टोक के यात्रियों को लुभा रही हैं और उनके भरोसे का फायदा उठाते हुए निगम की बसों को पूरी तरह प्रभावित कर रही हैं। हालात यह हैं कि निगम की बसें आधी-अधूरी सवारियों के साथ चलने को मजबूर हैं और यात्रियों की संख्या कम होने से भारी आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ता जा रहा है। इस गैरकानूनी गतिविधि ने निगम की रीढ़ तोड़कर रख दी है और यदि जल्द ही इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो निगम पूरी तरह से चरमरा जाएगा और उसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा।

प्रदेश के पर्वतीय मार्गों से लेकर दिल्ली, देहरादून और यहां तक कि पंजाब तक जाने वाले मार्गों में भी इन डग्गामारी वाहनों का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है। यह स्थिति केवल एक जिले या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह समस्या पार-राज्यीय स्तर पर भी फैल चुकी है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन की ढिलाई और संबंधित विभागों की लापरवाही ने इन गाड़ियों को और ज्यादा बढ़ावा दिया है। यात्रियों की सुविधाओं और निगम की विश्वसनीयता पर यह सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। यदि स्थिति पर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो न केवल निगम का संचालन प्रभावित होगा बल्कि रोजगार और आजीविका पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

चिंता की बात यह भी है कि इस गंभीर समस्या को लेकर अधिकारियों की भूमिका बेहद सवालों के घेरे में है। अधिकांश अधिकारी सिर्फ़ अपने दफ्तर में बैठकर कागजों पर हस्ताक्षर करने तक ही सीमित हैं। फील्ड में जाकर वास्तविक जांच करना और अवैध ढुलाई पर अंकुश लगाना उनकी जिम्मेदारी है, लेकिन यह जिम्मेदारी लगभग गायब होती दिख रही है। नतीजा यह है कि सड़कों पर चल रही अवैध टैक्सियाँ बिना किसी रोक-टोक के यात्रियों को उठा रही हैं और परिवहन निगम की बसों की हालत दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है। असली काम होना चाहिए कि अधिकारी सीधे मार्गों पर जाकर जांच करें, स्टेशन और बस स्टैंड पर मौजूदगी दर्ज कराएँ और जहाँ-जहाँ नियम तोड़े जा रहे हैं वहाँ सख्त चालान करें।

अब समय आ गया है कि एआरटीओ, एसडीएम और अन्य सभी संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएँ और इस मामले में तत्काल संज्ञान लें। कार्यालय में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर करने से समस्या का हल नहीं निकल सकता, बल्कि वास्तविक सुधार तभी आएगा जब अधिकारी मैदान में उतरकर कार्रवाई करेंगे। हर मार्ग पर निगरानी रखी जाए, टूरिस्ट परमिट का दुरुपयोग बंद किया जाए और डग्गामारी करने वालों पर ठोस कदम उठाए जाएँ। यदि यह कड़ा कदम तुरंत नहीं उठाया गया तो स्थिति हाथ से निकल जाएगी और परिवहन निगम का भविष्य पूरी तरह से खतरे में पड़ जाएगा। कर्मचारियों में भी इस बात को लेकर गहरी बेचौनी है कि यदि निगम का घाटा बढ़ता रहा तो उनकी नौकरियों पर सीधा असर पड़ सकता है।

उत्तराखंड परिवहन निगम को बचाने और इसे मजबूत स्थिति में लाने के लिए सरकार और प्रशासन को मिलकर रणनीति बनानी होगी। केवल दिखावे की कार्रवाई से स्थिति नहीं सुधरेगी, बल्कि स्थायी समाधान तभी निकलेगा जब अवैध परिचालन को पूरी तरह खत्म किया जाएगा। प्रदेश की सड़कों पर चल रही डग्गामारी को रोकना बेहद जरूरी है ताकि निगम की बसों में सवारियों की संख्या फिर से बढ़ सके और आर्थिक स्थिति सुधर सके। इस पूरे मामले ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती और तत्काल सख्ती के बिना निगम की स्थिति और बिगड़ जाएगी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!