काशीपुर। अग्रसेन महाराज जयंती के अवसर पर निकाली जाने वाली शोभायात्रा से पहले माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो उठा है। कल होने वाले इस आयोजन को लेकर रामनगर रोड स्थित श्री रामलीला मैदान में महाराजा अग्रसेन जयंती शोभायात्रा कमेटी ने एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन किया, जिसमें आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने यात्रा की रूपरेखा साझा करते हुए इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। जानकारी के अनुसार यह यात्रा मोहल्ला किला से शाम चार बजे प्रारंभ होगी और मुख्य बाजार, कोतवाली चौक तथा महाराणा प्रताप चौक से गुजरते हुए श्री रामलीला मैदान पर जाकर संपन्न होगी। आयोजनकर्ताओं ने बताया कि इस भव्य यात्रा में महाराज अग्रसेन के डोले के साथ-साथ ऑपरेशन सिंदूर की झांकी और मां काली का अखाड़ा लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगे। अग्र समाज के सभी घटक इस शोभायात्रा का हिस्सा बनकर इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करेंगे।
शोभायात्रा आयोजक योगेश जिंदल ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 28 सितंबर को निकाली जाने वाली यात्रा में हर वर्ग, हर पेशे और हर पीढ़ी का योगदान रहेगा और यह कार्यक्रम समाज की एकता को मजबूत करने वाला साबित होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अब तक भारत के विभिन्न हिस्सों में चौसठ से अधिक शोभायात्राएँ आयोजित हो चुकी हैं और अलग-अलग राज्यों में यह परंपरा निरंतर जारी है। इतिहास की ओर इशारा करते हुए उन्होंने बताया कि सिकंदर के आक्रमण के समय वणिक समाज अपने प्राचीन राज्य से बिखर गया था, लेकिन आज यह समाज फिर से एकजुट होकर भारत की मजबूती की नींव रखने के लिए संकल्पित है। यही भावना हमारी विरासत है और इसी से हमें आगे बढ़ना है।
उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि सनातन धर्म के चार वर्ण भारतीय समाज की रीढ़ हैं और जब तक ये सभी वर्ग एकजुट होकर अपनी शक्ति का परिचय नहीं देंगे, तब तक अखंड भारत का सपना अधूरा रहेगा। शोभायात्रा उनके अनुसार केवल धार्मिक परंपरा का निर्वाह नहीं, बल्कि यह समाज को एकत्रित करने और राष्ट्रीय मजबूती का आह्वान है। इस यात्रा के जरिए लोगों को यह संदेश दिया जाएगा कि हमें अपने इतिहास और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को याद रखते हुए संगठन और समर्पण के साथ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि जब समाज एक स्वर में जागरण करेगा, तभी राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सकेगा और आने वाली पीढ़ी भी इस चेतना को आत्मसात कर सकेगी।
प्रेस वार्ता में योगेश जिंदल ने अपील करते हुए कहा कि 28 सितंबर को निकलने वाली इस शोभायात्रा में हर वर्ग और हर परिवार की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है, जिसमें अखाड़ों और झांकियों से लेकर हर प्रस्तुति का मुख्य संदेश समाज की एकता और सनातन संस्कृति की ताकत को उजागर करना है। उन्होंने मीडिया के जरिए लोगों से निवेदन किया कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस यात्रा को ऐतिहासिक बनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह उदाहरण प्रस्तुत करें कि जब समाज संगठित होता है, तो राष्ट्र अपने आप सशक्त बन जाता है।
इतिहास की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए योगेश जिंदल ने कहा कि महाभारत काल के उपरांत महाराज अग्रसेन ने समाज में एक नई व्यवस्था स्थापित की थी, जिसका उद्देश्य केवल शासन करना नहीं बल्कि प्रत्येक परिवार तक समान अवसर और सामाजिक न्याय पहुंचाना था। अग्रवा में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को नागरिक का दर्जा दिया जाता था और वह अग्रवाल कहलाता था। इतना ही नहीं, हर आगंतुक को घर बनाने और व्यापार शुरू करने में सहयोग भी दिया जाता था। बाबरी तालाब जैसी अनेक रचनाएं उस समय समाज के हित में समर्पित की गई थीं, जिनसे स्पष्ट संदेश मिला कि सच्चा नेतृत्व वही है जो समाज कल्याण की दिशा में कार्य करे। यही भावना आज भी हमें प्रेरित करती है कि संगठन और एकता से ही महाराजाधन के उद्देश्यों की पूर्ति संभव है।
अपने वक्तव्य में योगेश जिंदल ने विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल समाज का गौरव नहीं बल्कि राष्ट्र की शान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना इस झांकी के हमारे आयोजन अधूरे माने जाते हैं। इस बार की झांकी नई पीढ़ी को यह सिखाएगी कि अपने इतिहास से शक्ति लेकर आने वाले समय को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है। अखाड़े का भी विशेष महत्व होगा, जो केवल शक्ति प्रदर्शन का माध्यम नहीं बल्कि यह संदेश देने का जरिया है कि बच्चों को मोबाइल और टेलीविजन की आभासी दुनिया से बाहर निकालकर स्वस्थ और परंपरागत जीवनशैली अपनानी चाहिए। यह अखाड़ा आने वाली पीढ़ियों को सिखाएगा कि शरीर को मजबूत बनाना केवल स्वास्थ्य का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सामाजिक उन्नति की भी कुंजी है।
अंत में शोभायात्रा आयोजक योगेश जिंदल ने यह भी कहा कि हमारी संस्कृति में वर्ण व्यवस्था का मूल उद्देश्य समाज की व्यवस्था को संतुलित करना था, लेकिन मुगल शासन और ईसाई प्रभाव के दौरान इसे तोड़ने का प्रयास किया गया और अनेक जातियों को गलत अर्थ में प्रस्तुत किया गया। आज आवश्यकता है कि हम सब संगठित होकर सनातन की आवाज़ को और बुलंद करें। जब समाज की झांकियां मिलकर एकता का स्वर गूंजाएंगी, जब ब्राह्मण से लेकर अग्रवाल तक हर वर्ग आपस में जुड़कर शक्ति का परिचय देगा, तब इसका लाभ सीधे-सीधे भारत की मजबूती के रूप में सामने आएगा। उन्होंने कहा कि यह शोभायात्रा केवल परंपरा का प्रदर्शन नहीं बल्कि संगठन, संस्कृति और संकल्प से भारत को और सशक्त बनाने का स्पष्ट संदेश है।



