काशीपुर। ज्ञानार्थी कॉलेज में शिक्षक दिवस बड़े जोश और उल्लास के साथ मनाया गया, जो इस शैक्षणिक संस्थान के लिए यादगार क्षण बन गया। इस खास मौके पर आयोजित भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज अध्यक्ष श्री संतोष मेहरोत्रा की पत्नी एवं कॉलेज की अध्यक्षा श्रीमती निभा मेहरोत्रा, मुख्य अतिथि श्री वीरेंद्र चौधरी, कॉलेज की सेक्रेटरी श्रीमती शिवानी मेहरोत्रा, संस्थान की प्रमुख प्रतिमा सिंह और कॉलेज के निदेशक डॉ. मनोज मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन करके किया। इस शुभ अवसर ने पूरे परिसर को उत्साह और श्रद्धा से भर दिया। विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों ने मिलकर इस दिन को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, और कार्यक्रम की भव्यता ने सभी उपस्थित लोगों के मन में शिक्षक दिवस की अहमियत को और भी गहरा कर दिया।
विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों ने इस अवसर को विशेष बनाने के लिए सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किए। इसके बाद अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों ने नृत्य, गायन, नाटक और कविताओं के माध्यम से शिक्षकों के प्रति अपने सम्मान और आभार को अभिव्यक्त किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने न केवल कार्यक्रम में रंग भर दिया, बल्कि सभी के दिलों को भी छू लिया। संस्कृत और आधुनिक प्रस्तुतियों का संगम ने वातावरण को भावनाओं और उत्साह से सराबोर कर दिया। मंच पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और उनकी लगन, शिक्षकों के प्रति प्रेम और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
अध्यक्ष श्री संतोष मेहरोत्रा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक समाज की नींव हैं और उनके बिना किसी भी समाज की प्रगति संभव नहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने का मार्गदर्शन भी करते हैं। उनके विचारों में शिक्षा का महत्व और शिक्षक की भूमिका स्पष्ट रूप से झलक रही थी। मुख्य अतिथि श्री वीरेंद्र चौधरी ने शिक्षा के महत्व और शिक्षक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सही दिशा प्रदान करते हैं, जो उनके संपूर्ण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कॉलेज की सेक्रेटरी श्रीमती शिवानी मेहरोत्रा ने छात्रों को शिक्षा के साथ संस्कारों और अनुशासन की अहमियत समझाई। उन्होंने बताया कि केवल अकादमिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जीवन में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है। इसी के साथ संस्थान की प्रमुख प्रतिमा सिंह ने शिक्षकों को समाज का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने विद्यार्थियों को शिक्षकों के योगदान की सराहना और उनका सम्मान करने की प्रेरणा दी।
निदेशक डॉ. मनोज मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें याद दिलाता है कि ज्ञान ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और मार्गदर्शन से ही जीवन में सफलता और वास्तविक रोशनी आती है। उनके शब्दों ने उपस्थित छात्रों और शिक्षकों को प्रेरित किया और इस विशेष दिन को और भी अर्थपूर्ण बना दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि शिक्षक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता भाव हमेशा बनाए रखना चाहिए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को विभिन्न उपहार और शुभकामनाएँ भेंट कीं। इस अवसर पर पूरे कॉलेज परिसर में उल्लास, हर्ष और उत्साह का माहौल देखने को मिला। छात्र-छात्राओं ने शिक्षक दिवस के महत्व को महसूस करते हुए अपनी भावनाओं और स्नेह को खुलकर व्यक्त किया। सभी उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और उत्साह की सराहना की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ, जिसने पूरे समारोह को और भी भव्य और भावनात्मक बना दिया।
ज्ञानार्थी कॉलेज में इस शिक्षक दिवस ने यह संदेश दिया कि शिक्षक केवल शैक्षणिक ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि समाज और जीवन में नैतिक मूल्य और अनुशासन भी सिखाने वाले मार्गदर्शक हैं। इस दिन का आयोजन इस बात का प्रतीक था कि विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच का सम्मान और स्नेह केवल शब्दों में ही नहीं, बल्कि कर्म और भावनाओं में भी जीवित है। शिक्षक दिवस के इस भव्य और सफल आयोजन ने सभी के मन में शिक्षा के महत्व और शिक्षक के योगदान की अहमियत को और अधिक गहरा कर दिया।
पूरे कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि शिक्षक दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, श्रद्धा, सम्मान और अनुशासन का प्रतीक है। ज्ञानार्थी कॉलेज के इस आयोजन ने विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच का बंधन और भी मजबूत किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन को दिशा देने और समाज को बेहतर बनाने का एक शक्तिशाली माध्यम है। इस शिक्षक दिवस ने सभी के दिलों में शिक्षा और शिक्षक के महत्व को अमिट छाप छोड़ दी।



