spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडदीपक बाली बोले समाज को जागना होगा शिक्षक पर गोलीकांड ने सबको...

दीपक बाली बोले समाज को जागना होगा शिक्षक पर गोलीकांड ने सबको झकझोरा

शिक्षकों ने संवाद गोष्ठी में प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, न्याय और सुरक्षा की मांग की, दीपक बाली ने भरोसा दिलाते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया

काशीपुर। शहर गुरुवार को शिक्षा जगत की गंभीर चिंता और आक्रोश का केंद्र बना रहा जब कुंडेश्वरी रोड स्थित विद्यालय में शिक्षक पर छात्र द्वारा गोली चलाए जाने की सनसनीखेज वारदात के बाद विभिन्न शिक्षण संस्थानों ने प्रशासन से संवाद करने के लिए कदम उठाया। घटना के अगले ही दिन इलाके के एक रिसॉर्ट में तराई इंडिपेंडेंट स्कूल्स वेलफेयर सोसाइटी की पहल पर एक आपात बैठक बुलाई गई जिसमें अन्य संगठनों ने भी एकजुटता दिखाई। इस संवाद गोष्ठी के दौरान शिक्षकों और प्रबंधकों ने संयुक्त रूप से एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा और स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब निजी विद्यालयों के शिक्षकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। बैठक में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों ने माना कि शिक्षा के मंदिर में हुई इस अप्रत्याशित हिंसा ने पूरे समाज की आत्मा को झकझोर दिया है और अब यह केवल प्रशासन नहीं बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बन गई है।

गंभीर माहौल के बीच नगर निगम महापौर दीपक बाली ने अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त किया और कहा कि एक छात्र द्वारा शिक्षक पर हमला करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज को केवल घटना की आलोचना करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इसके गहरे कारणों पर विचार करना जरूरी है। उनके अनुसार सोशल मीडिया और आधुनिक तकनीक की अंधी दौड़ ने बच्चों को हिंसक प्रवृत्तियों और आपराधिक सामग्री की ओर धकेल दिया है, जिसके कारण नई पीढ़ी असामाजिक मार्ग पर भटक रही है। दीपक बाली ने जोर देकर कहा कि ऐसे समय में अभिभावकों को अपने बच्चों की संगति, गतिविधियों और रोजमर्रा के व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही विद्यालयों को भी शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों पर अधिक फोकस करना होगा ताकि आने वाली पीढ़ी केवल पढ़ी-लिखी ही नहीं बल्कि संस्कारवान नागरिक भी बने। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनमें बढ़ती आपराधिक मानसिकता से लड़ने के लिए पूरे समाज को जागरूक होकर सामूहिक प्रयास करने होंगे।

सभा में मौजूद शिक्षकों की पीड़ा उस समय और गहरी हो गई जब यह मुद्दा उठाया गया कि शांतिपूर्ण मार्च निकालने पर भी प्रशासन ने आपत्ति जताई थी। इस पर मध्यस्था करते हुँये दीपक बाली ने कहा कि शिक्षा जगत की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और यदि शिक्षक शुक्रवार को शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते हैं तो वे स्वयं और पूरा प्रशासन उनके साथ खड़ा होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी तरह की आपत्ति का कोई औचित्य नहीं है और शिक्षकों का यह अधिकार है कि वे अपनी सुरक्षा और गरिमा के लिए आवाज उठाएं। उनका कहना था कि समाज को यह समझना होगा कि जब अध्यापक असुरक्षित महसूस करेंगे तो वे बच्चों को खुले मन से कैसे शिक्षा दे पाएंगे। यह केवल शिक्षक का नहीं बल्कि पूरे तंत्र का सवाल है जिसे नजरअंदाज करना असंभव है।

उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह ने संवाद के दौरान बताया कि इस गंभीर घटना की जानकारी प्रशासन को देर शाम मिली थी और तत्पश्चात त्वरित कदम उठाए गए। उन्होंने भी इस बात को स्वीकार किया कि बच्चों की परवरिश में अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और यदि परिवार स्तर पर निगरानी की कमी होगी तो ऐसे नतीजे सामने आना तय है। उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि प्रशासन पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा है और भविष्य में इस तरह की वारदात को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। अभय प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों पर सतर्क निगरानी रखनी चाहिए और उनकी संगति पर ध्यान देना ही समस्याओं का सबसे बड़ा समाधान है।

बैठक के दौरान शिक्षकों और समाजसेवियों की ओर से व्यक्त की गई चिंताओं ने वातावरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया। सभी ने माना कि अब स्थिति केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रही बल्कि यह पूरे समाज का सवाल है। अभिभावकों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित और सकारात्मक दिशा दी जाए। महापौर दीपक बाली और उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह द्वारा दिए गए भरोसे ने उपस्थित लोगों में कुछ हद तक विश्वास जगाया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया कि शिक्षा जगत अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होगा बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की मांग करेगा।

इस पूरी घटना और संवाद गोष्ठी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा के मंदिरों में बढ़ रही हिंसा केवल अध्यापकों की ही चिंता नहीं बल्कि पूरे समाज की चेतावनी है। काशीपुर से उठी यह आवाज अब बड़े स्तर पर गूंज सकती है, क्योंकि जिस तरह से शिक्षकों, प्रबंधकों और प्रशासन ने संयुक्त रूप से इस मुद्दे पर गंभीरता दिखाई है, उससे स्पष्ट है कि अब बच्चों की सुरक्षा, अध्यापकों की गरिमा और विद्यालयों की मर्यादा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। समाज, अभिभावक और प्रशासन यदि एकजुट होकर काम करें तो ही भविष्य की पीढ़ी को उस राह पर ले जाया जा सकता है, जहां शिक्षा का अर्थ केवल किताबों तक सीमित न रहकर संस्कार और सुरक्षा का प्रतीक भी बने।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!