काशीपुर। उत्तराखंड की शांत वादियों में एक बार फिर प्रकृति ने भयावह रूप दिखा दिया, जब केदारनाथ धाम के बाद अब उत्तरकाशी के धराली में आई विनाशकारी आपदा ने पूरे प्रदेश ही नहीं बल्कि देश को हिलाकर रख दिया। कुछ ही पलों में तबाही का ऐसा मंजर सामने आया कि अनगिनत लोगों के घर उजड़ गए, बस्तियां मलबे में तब्दील हो गईं और चारों ओर चीख-पुकार का माहौल बन गया। प्रभावित क्षेत्रों में हालात इतने गंभीर हैं कि राहत व बचाव कार्यों में लगे जवानों को 40 फीट तक के मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। इस आपदा के बाद उत्तराखंड सरकार ने तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर राहत अभियान शुरू किया है, जबकि विभिन्न सहायक दल मौके पर पहुंचकर दिन-रात बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से नेताओं ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।
आपदा की भयावहता को लेकर प्रदेश के कृषि, ग्राम्य विकास एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने गंभीर चिंता प्रकट करते हुए साफ कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोक पाना इंसान के बस में नहीं है, लेकिन इनके बाद सरकार की कार्यप्रणाली ही असली कसौटी होती है। उन्होंने बताया कि इस बार मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत तौर पर स्थिति पर निगरानी रखने के लिए खुद ग्राउंड जीरो पर डेरा डाला और त्योहार के दिन भी लगातार चार दिनों तक प्रभावित इलाकों में डटे रहे। इस कदम से यह स्पष्ट हो जाता है कि शासन-प्रशासन पूरी तत्परता के साथ राहत व पुनर्वास कार्य कर रहा है। गणेश जोशी ने कहा कि महज पच्चीस सेकंड में आई इस भीषण त्रासदी ने सैकड़ों इमारतों को ढहा दिया, कई लोग अब भी लापता हैं और मृतकों की संख्या बढ़कर चालीस तक पहुंच चुकी है, जबकि हर बीतते घंटे के साथ बचाव कर्मियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
राहत कार्यों की गंभीरता को रेखांकित करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार युद्धस्तर पर अभियान चला रही हैं। दिन-रात मलबा हटाने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं, जहां कई बार जवान अपनी जान जोखिम में डालकर भी लोगों को बचा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुश्किल घड़ी में राज्य सरकार पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ी है। मंत्री गणेश जोशी ने आपदा की विभीषिका पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस संकट की घड़ी में राज्य सरकार पूरी मजबूती से आपदा प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है और हर संभव सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक इस हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जा चुकी है, ताकि शोक संतप्त परिवारों को शुरुआती राहत मिल सके। साथ ही उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि सरकार केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में भी हर पीड़ित को आवश्यकता के अनुरूप सहायता मिलती रहेगी। उनका कहना था कि राज्य की प्राथमिकता प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी जिंदगी को दोबारा सम्मानजनक तरीके से आगे बढ़ा सकें और इस कठिन दौर को पार कर सकें।
पुनर्वास की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का जिक्र करते हुए मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का हाल इतना दयनीय है कि मौजूदा स्थान अब रहने योग्य नहीं रह गए हैं। इसलिए सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पुनर्वास के लिए विशेष कमेटी गठित कर दी है, जो सुरक्षित स्थानों पर स्थायी आवास की व्यवस्था करेगी। इस पहल से प्रभावित परिवारों को नई शुरुआत का अवसर मिलेगा, साथ ही भविष्य में इस तरह की आपदाओं से बचाव के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी पीड़ित परिवार सरकार की मदद से वंचित नहीं रहेगा और हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। इस आपदा ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि पहाड़ी राज्यों में आपदा प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है, ताकि आने वाले समय में जन-धन की हानि को कम किया जा सके।
यह पूरी घटना न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि प्रकृति के प्रकोप के सामने इंसान को सदैव सतर्क रहना होगा। धराली की इस त्रासदी ने पहाड़ों की नाजुक भौगोलिक संरचना और जलवायु परिवर्तन के खतरे को उजागर किया है। हालांकि सरकार और प्रशासन की तत्परता, स्थानीय लोगों का साहस और बचाव दलों की अथक मेहनत ने उम्मीद की एक किरण जगाई है। हर ओर से मदद पहुंचाने का सिलसिला जारी है और लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर इस कठिन दौर को पार करने की कोशिश कर रहे हैं। उत्तराखंड की यह जंग सिर्फ मलबा हटाने की नहीं, बल्कि उम्मीदों को जिंदा रखने और उजड़े घरों को फिर से बसाने की है, जो आने वाले समय में राज्य के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।



