काशीपुर। ऐतिहासिक गिरिताल की मौजूदा स्थिति को लेकर कांग्रेस ने अब स्थानीय राजनीति और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश सचिव संदीप सहगल ने गिरिताल परिसर में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि जिस ऐतिहासिक स्थल को काशीपुर की पहचान, आस्था और पर्यटन की संभावनाओं का केंद्र बताया जाता रहा है, वही आज उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार दिखाई दे रहा है। सहगल ने कहा कि पिछले करीब 25 वर्षों से काशीपुर की राजनीति में एक ही राजनीतिक परिवार का प्रभाव लगातार बना हुआ है और इस लंबे राजनीतिक दौर में सांसद, विधायक तथा महापौर के चुनावी घोषणा पत्रों में गिरिताल और द्रोणासागर के विकास, सौंदर्यीकरण, नवीनीकरण तथा पर्यटन स्थल के रूप में विस्तार के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनावी मंचों पर यह मुद्दा प्राथमिकता में दिखाई देता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वही घोषणाएं फाइलों और आश्वासनों तक सीमित हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर गिरिताल के विकास के वे वादे कहां चले जाते हैं, जिनके आधार पर वर्षों से लोगों को बेहतर पर्यटन स्थल और स्वच्छ वातावरण का सपना दिखाया जा रहा है। सहगल ने कहा कि काशीपुर का दिल कहे जाने वाले गिरिताल की ऐसी हालत जनप्रतिनिधियों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। उन्होंने महापौर दीपक बाली, विधायक हरभजन सिंह चीमा और सांसद त्रिलोक सिंह चीमा से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा कि जनता को अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि मौके पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।
सहगल ने पत्रकार वार्ता में जनवरी 2025 के आसपास हुए उस प्रशासनिक निरीक्षण का भी उल्लेख किया, जब विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने गिरिताल परिसर का दौरा किया था। उनके अनुसार उस समय लोगों के बीच उम्मीद पैदा हुई थी कि अब ऐतिहासिक स्थल की तस्वीर बदलने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि निरीक्षण में पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, तहसील प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी से उन्हें भी लगा था कि शायद कुछ ही दिनों में सफाई, रास्तों और मूलभूत सुविधाओं पर काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में हार-जीत अपनी जगह है, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में उन्हें उम्मीद थी कि नए जनप्रतिनिधि के सामने सबसे प्रमुख चुनौतियों में गिरिताल का सुधार भी शामिल होगा। सहगल के मुताबिक उन्होंने तत्काल परिणाम की अपेक्षा नहीं की और लोगों की उस सामान्य भावना का सम्मान किया कि नए निर्वाचित जनप्रतिनिधि को पहले कुछ समय व्यवस्था समझने और योजनाएं तैयार करने का अवसर दिया जाना चाहिए। लेकिन उनके अनुसार लगभग पौने दो वर्ष गुजरने के बावजूद गिरिताल में वह परिवर्तन नजर नहीं आया जिसकी उम्मीद निरीक्षण के बाद बनी थी। उन्होंने कहा कि यहां की स्थिति ऐसी हो गई है कि लोग नियमित रूप से सुबह और शाम की सैर तक सहजता से नहीं कर पा रहे हैं। रास्तों की स्थिति, साफ-सफाई और परिसर की समग्र व्यवस्था पर उन्होंने चिंता जताई। सहगल ने कहा कि यदि किसी शहर के सबसे प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से एक को ही नागरिक उपयोग और पर्यटन की दृष्टि से व्यवस्थित नहीं किया जा सके तो विकास के बड़े दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी क्रम में सहगल ने काशीपुर की यातायात व्यवस्था और रामनगर रोड की स्थिति को भी स्थानीय विकास की बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि रामनगर रोड पर वर्षों से लंबित पुल का निर्माण अब भी लोगों के लिए सवाल बना हुआ है और सड़क की बदहाली ने आम नागरिकों की परेशानी बढ़ाई है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि रामनगर रोड में गड्ढे दिखाई नहीं देते, बल्कि गड्ढों के बीच कहीं-कहीं रामनगर रोड नजर आती है। सहगल ने दावा किया कि इस पुल को लंबित हुए करीब नौ वर्ष हो चुके हैं और यदि इसी तरह देरी जारी रही तो यह अवधि दस वर्ष के आंकड़े को छूने लगेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब काशीपुर में लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है, दोपहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ रही है और शहर के प्रमुख मार्गों पर रोजाना जाम की स्थिति बनती है, तब रामनगर रोड के पुल जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के आधार पर पूरा क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि महापौर दीपक बाली, विधायक हरभजन सिंह चीमा और सांसद त्रिलोक सिंह चीमा सहित सत्ता से जुड़े जनप्रतिनिधियों के पास सरकार और प्रशासन तक पहुंच है, इसलिए जनता उनसे यह अपेक्षा करती है कि वे लंबित परियोजनाओं को गति देने में प्रभावी भूमिका निभाएं। सहगल ने कहा कि विकास का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि सड़क, पुल, फुटपाथ, यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति में कितना सुधार आया है।
नहर वाली सड़क के निर्माण को लेकर सहगल ने पूर्व दिवंगत कैलाश गहतौड़ी को भी याद किया और कहा कि काशीपुर के यातायात संकट को लेकर उनसे उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध रहा था। उन्होंने बताया कि जब वह काशीपुर महानगर अध्यक्ष रहे, तब भी उन्होंने कई बार कैलाश गहतौड़ी के समक्ष शहर की यातायात समस्या और रामनगर रोड के दबाव को उठाया था। सहगल के अनुसार नहर वाली सड़क को लेकर कैलाश गहतौड़ी ने उनसे बातचीत की थी और इस दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया था। सहगल ने कहा कि इस सड़क के निर्माण से काशीपुर के यातायात पर निश्चित रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि इसके माध्यम से एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हुआ और रामनगर रोड, स्टेडियम क्षेत्र, रेलवे ट्रैक तथा अन्य हिस्सों पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक कम हुआ। उन्होंने कहा कि सड़क बनने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, क्योंकि रामनगर रोड का लंबित पुल अभी भी महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन नहर वाली सड़क ने यातायात संचालन में राहत जरूर पहुंचाई। सहगल ने इसके लिए कैलाश गहतौड़ी के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि आज वह उनके बीच नहीं हैं, लेकिन शहर के हित से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क निर्माण के दौरान दुर्गा कॉलोनी और सैनिक कॉलोनी समेत प्रभावित परिवारों और दुकानदारों की परेशानियों को लेकर उन्होंने अधिकारियों और संबंधित लोगों के सामने अपनी बात रखी थी, ताकि विकास के साथ प्रभावित नागरिकों के हितों की भी रक्षा हो सके।
सहगल ने नहर वाली सड़क और शहर के अन्य चौड़े किए गए मार्गों के आसपास बढ़ते अतिक्रमण तथा कथित अव्यवस्थित वेंडिंग को लेकर भी सरकार और स्थानीय निकाय को चेताया। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण का मूल उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना था, लेकिन यदि उसी सड़क के किनारे फुटपाथों पर स्थायी या अर्धस्थायी दुकानें और खोखे खड़े कर दिए जाएंगे तो भविष्य में यही रास्ते दोबारा जाम का कारण बन सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर फुटपाथ के लिए छोड़ी गई जगह पर खोखे बनाए जाने और उनके आवंटन अथवा बिक्री की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सहगल ने आरोप लगाया कि यदि दस फीट के फुटपाथ में आठ फीट का खोखा खड़ा हो जाए और उसके बाद दुकानदार अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए सामान बाहर तक फैलाए, तो पैदल चलने वाले लोगों के लिए जगह लगभग समाप्त हो जाएगी। इसके बाद ग्राहक अपने वाहन सड़क किनारे खड़े करेंगे और यातायात का दबाव फिर बढ़ेगा। उन्होंने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित पैदल मार्ग को आवश्यक बताते हुए कहा कि फुटपाथ केवल सजावटी संरचना नहीं बल्कि शहर के नागरिकों का चलने का अधिकार है। उनका सुझाव था कि यदि सरकार को वेंडिंग जोन विकसित करने हैं तो नगर निगम या अन्य सरकारी भूमि पर व्यवस्थित बाजार बनाए जाएं, जहां दुकानदारों की आजीविका भी सुरक्षित रहे और मुख्य सड़कों के फुटपाथ भी पैदल यात्रियों के लिए खुले रहें। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर सड़क की उपयोगिता को कमजोर करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं होगा।
पत्रकार वार्ता में सहगल ने यह भी सवाल उठाया कि जिस शहर में सड़क चौड़ीकरण और यातायात सुधार के नाम पर बड़े प्रयास किए जा रहे हैं, वहां यदि फुटपाथ ही दुकानों और खोखों की भेंट चढ़ गए तो यातायात समस्या का समाधान अधूरा रह जाएगा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद कई स्थानों पर साप्ताहिक बाजारों को मुख्य सड़कों से हटाकर निर्धारित जगहों पर लगाने की व्यवस्था की गई, जिससे दुर्घटनाओं और यातायात बाधाओं को कम करने का प्रयास हुआ। उनके मुताबिक इसी सोच को काशीपुर की मुख्य सड़कों पर भी लागू किया जाना चाहिए। सहगल ने कहा कि वह वेंडरों के खिलाफ नहीं हैं और न ही उनकी आजीविका छीनने की मांग कर रहे हैं, बल्कि उनका कहना है कि गरीब और छोटे दुकानदारों के लिए सम्मानजनक और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि, ग्राम सभा की भूमि अथवा नगर निगम की उपलब्ध भूमि पर नियोजित वेंडिंग जोन विकसित किए जा सकते हैं। उनका कहना था कि इस व्यवस्था से दुकानदारों को स्थायी पहचान और कारोबार का अवसर मिलेगा तथा सड़क और फुटपाथ भी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने चेताया कि यदि फुटपाथों पर लगातार निर्माण और वेंडिंग बढ़ती गई तो जिस यातायात राहत के लिए सड़कें चौड़ी की गईं, वही राहत आने वाले समय में फिर जाम में बदल सकती है। सहगल ने महापौर दीपक बाली और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे इस विषय को गंभीरता से लें और ऐसी योजना बनाएं जिसमें व्यापार, यातायात और पैदल यात्रियों के अधिकारों के बीच संतुलन कायम हो।
गिरिताल की जमीन और आसपास की व्यवस्थाओं को लेकर सहगल ने कहा कि शहर की सार्वजनिक संपत्तियों का इस्तेमाल बेहद सोच-समझकर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों को पैदल चलने वाले नागरिकों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए छोड़ा गया है, उन्हें व्यावसायिक गतिविधियों में बदलने से पहले व्यापक जनहित को ध्यान में रखा जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि गिरिताल क्षेत्र में सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग आते हैं, बुजुर्ग बैठकर समय बिताते हैं, महिलाएं और बच्चे पैदल आवागमन करते हैं तथा स्थानीय नागरिक इस क्षेत्र को शहर की पहचान से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में यदि फुटपाथों पर दुकानें बढ़ती गईं तो लोगों को मुख्य सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सहगल ने कहा कि सड़क पर पैदल चलने वालों और वाहनों का एक साथ दबाव दुर्घटना का जोखिम बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विकास और रोजगार के बीच संतुलन बनाना चाहिए। पेड़ लगाए जाने चाहिए, पर्यावरण संरक्षण होना चाहिए और छोटे व्यापारियों के लिए स्थान भी उपलब्ध होने चाहिए, लेकिन इसके लिए उपयुक्त सरकारी भूमि का चयन किया जाए। उन्होंने मांग की कि नगर निगम, प्रशासन और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से काशीपुर के लिए ऐसी योजना तैयार करें जिसमें गिरिताल की सुंदरता, पैदल पथ, हरित क्षेत्र और यातायात व्यवस्था एक-दूसरे के पूरक बनें। सहगल के अनुसार काशीपुर को ऐसा विकास चाहिए जिसमें नागरिक सुविधा केंद्र में हो, न कि केवल निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां।
संदीप सहगल ने अपनी पत्रकार वार्ता के दौरान एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार प्रत्येक पात्र नागरिक का मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है और किसी भी प्रक्रिया के कारण यदि कोई पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर रह जाता है तो यह गंभीर चिंता का विषय होगा। सहगल ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित होनी चाहिए और किसी भी वर्ग, समुदाय या क्षेत्र के नागरिक को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े प्रत्येक चरण में नागरिकों को पर्याप्त जानकारी, आपत्ति दर्ज कराने का अवसर और निष्पक्ष सुनवाई उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब प्रत्येक पात्र नागरिक को अपने मताधिकार का उपयोग करने का समान अवसर मिले। सहगल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के नजरिये से देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक काशीपुर की जनता विकास, साफ-सफाई, यातायात, रोजगार और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि चुनावी घोषणा पत्रों में किए गए वादों की समीक्षा हो और जनता के सामने यह स्पष्ट किया जाए कि गिरिताल, द्रोणासागर, रामनगर रोड, लंबित पुल और यातायात सुधार के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए गए हैं।
पूरे मामले को लेकर सहगल ने महापौर दीपक बाली, विधायक हरभजन सिंह चीमा और सांसद त्रिलोक सिंह चीमा सहित सत्ता और स्थानीय प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार लोगों के सामने एक बड़ा सवाल रखा कि क्या काशीपुर की जनता को अगले चुनाव तक फिर नए वादों का इंतजार करना पड़ेगा या वर्तमान कार्यकाल में ही जमीन पर ठोस बदलाव दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि करीब 25 वर्षों से गिरिताल को लेकर लगातार राजनीतिक घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन ऐतिहासिक स्थल की स्थिति अब भी नागरिकों के सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि धामी सरकार के लगभग दस वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ने के बीच काशीपुर के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि स्थानीय स्तर पर जिन विकास कार्यों की घोषणाएं हुईं, उनमें से कितने पूरे हुए और कितने अभी लंबित हैं। सहगल ने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को इसलिए चुना है कि वे शहर की समस्याओं को शासन तक पहुंचाएं और समाधान सुनिश्चित कराएं। उन्होंने आग्रह किया कि गिरिताल का वैज्ञानिक और व्यापक सौंदर्यीकरण कराया जाए, सफाई व्यवस्था मजबूत की जाए, पैदल मार्गों को सुरक्षित रखा जाए, रामनगर रोड के लंबित पुल को गति दी जाए और नहर वाली सड़क के बाद पैदा हुई यातायात राहत को अतिक्रमण से कमजोर न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि जनता अब घोषणा नहीं, परिणाम देखना चाहती है। उनके अनुसार यदि जनप्रतिनिधि समय रहते इन मुद्दों पर सक्रिय होते हैं तो काशीपुर की तस्वीर बदली जा सकती है और यही शहर की जनता के प्रति वास्तविक जवाबदेही होगी।
कांग्रेस प्रदेश सचिव ने अंत में कहा कि वह किसी व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के आधार पर नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर इन सवालों को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है और उनके अपने महापौर चुनाव के अनुभव को वह पीछे छोड़ चुके हैं, लेकिन काशीपुर के सार्वजनिक मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि उनके अपने घोषणा पत्र में भी गिरिताल और द्रोणासागर का विकास, सफाई और नवीनीकरण प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल था, क्योंकि उनके अनुसार यह क्षेत्र काशीपुर की आत्मा और पहचान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने एक बार फिर दिवंगत कैलाश गहतौड़ी को नमन करते हुए कहा कि शहर के यातायात और नहर वाली सड़क जैसे मुद्दों को लेकर उनके साथ हुई बातचीत को वह आज भी याद करते हैं। सहगल ने कहा कि उनके द्वारा उठाए गए सवालों का उद्देश्य किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी याद दिलाना है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास सत्ता, संसाधन और प्रशासनिक क्षमता है तो गिरिताल जैसी समस्या के समाधान के लिए इच्छाशक्ति भी दिखाई जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि महापौर दीपक बाली, विधायक हरभजन सिंह चीमा और सांसद त्रिलोक सिंह चीमा इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को सक्रिय करेंगे और काशीपुर की जनता को ऐसा विकास देंगे जिसकी तस्वीर केवल घोषणा पत्र में नहीं, बल्कि शहर की सड़कों, फुटपाथों, गिरिताल परिसर और यातायात व्यवस्था में भी साफ दिखाई दे। जनता अब यही देखना चाहती है कि वर्षों पुराने वादों का अगला अध्याय फिर घोषणा बनेगा या इस बार वास्तव में काम शुरू होगा।





