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दिल्ली में डीडी न्यूज़ महानिदेशिका संग उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखंड के व्यापक रोडमैप पर हुई गहन चर्चा

देहरादून।नवीन डिजिटल युग और आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भारत की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषा संस्कृत को वैश्विक पटल पर पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम उठाया गया है। उत्तराखंड शासन में संस्कृत शिक्षा, कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं जनगणना विभाग की कमान संभाल रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक कुमार ने देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित दूरदर्शन समाचार (डीडी न्यूज़) के केंद्रीय मुख्यालय में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अत्यंत वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) अधिकारी तथा डीडी न्यूज़ की महानिदेशिका ममता वर्मा से एक शिष्टाचार व रणनीतिक भेंट की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए किए जा रहे क्रांतिकारी प्रयासों से राष्ट्रीय मीडिया को अवगत कराना था, बल्कि देश की मुख्यधारा की पत्रकारिता में संस्कृत को एक नया और आकर्षक मंच प्रदान करना भी था। वार्ता के दौरान दोनों अधिकारियों के बीच इस बात पर पूर्ण सहमति बनी कि संस्कृत केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित रहने वाली भाषा नहीं है, बल्कि इसके भीतर संचित ज्ञान-विज्ञान संपूर्ण विश्व को एक नई दिशा दिखाने और मानवता की जटिलतम समस्याओं का समाधान करने की अपार सामर्थ्य रखता है।

इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान सचिव दीपक कुमार ने उत्तराखंड के युवा व ऊर्जावान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी और सशक्त नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने महानिदेशिका को विस्तार से बताया कि किस प्रकार मुख्यमंत्री स्वयं राज्य में देववाणी संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और उसके पुनर्जीवन के लिए रात-दिन निरंतर और अभूतपूर्व प्रयास कर रहे हैं। राज्य के मुखिया पुष्कर सिंह धामी अपने लगभग हर सार्वजनिक संबोधन, राजकीय कार्यक्रमों और जनसभाओं में संस्कृत के गूढ़ श्लोकों का अत्यंत सहजता और नियमितता के साथ उद्धरण देते हैं, जिससे राज्य के युवाओं के भीतर एक नई चेतना का संचार हो रहा है। मुख्यमंत्री का यह अनूठा प्रयास उत्तराखंड की युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध भाषायी विरासत, अद्वितीय सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली इतिहास से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए एक बड़ी प्रेरणा का काम कर रहा है। दीपक कुमार ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार का यह दृष्टिकोण केवल राजनीतिक या प्रशासनिक नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक आंदोलन है जिसका उद्देश्य हर नागरिक के मन में अपनी मूल भाषा के प्रति अगाध श्रद्धा पैदा करना है।

उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई देश की इस सबसे अनूठी और अभिनव योजना के तकनीकी और व्यावहारिक पक्षों को साझा करते हुए सचिव ने एक बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 13 जनपदों में एक-एक विशिष्ट ‘संस्कृत ग्राम’ विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से पूरे प्रदेश में संस्कृत के पठन-पठन और दैनिक बोलचाल का एक अत्यंत जीवंत और सशक्त वातावरण तैयार हो चुका है। इन गांवों के माध्यम से इस देवभाषा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का एक भगीरथ प्रयास किया जा रहा है, जो कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन रोल मॉडल साबित हो रहा है। इस क्रांतिकारी पहल का सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि आम नागरिकों में अपने भाषायी एवं सांस्कृतिक गौरव की भावना अत्यधिक तीव्र गति से जागृत हो रही है। साथ ही, यह अभिनव प्रयोग हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों, मनीषियों और प्रकांड विद्वानों द्वारा लोक-कल्याण के उद्देश्य से रचे गए विशाल ज्ञान-संपदा, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और दर्शनशास्त्र से आधुनिक समाज को दोबारा जोड़ने का एक बहुत ही मजबूत और विश्वसनीय माध्यम सिद्ध हो रहा है।

इसी क्रम में उत्तराखंड की सांस्कृतिक प्रगति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करते हुए दीपक कुमार ने आगामी दिनों में आयोजित होने वाले एक अत्यंत आकर्षक और भव्य कार्यक्रम की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इन नव-विकसित संस्कृत ग्रामों की श्रृंखला में बहुत जल्द एक भव्य ‘संस्कृत फ़िल्म महोत्सव’ का आयोजन सुनिश्चित किया जा रहा है, जो कि अपने आप में एक ऐतिहासिक और अनूठी घटना होगी। इस बेहद खास अंतरराष्ट्रीय महोत्सव का विधिवत उद्घाटन भारत और संस्कृत भाषा के प्रति अगाध प्रेम व सम्मान रखने वाली लिथुआनिया की राजदूत महामहिम सुश्री डायना मिकेविचिएने के कर-कमलों द्वारा किया जाना तय हुआ है। अपनी इस यात्रा के दौरान विदेशी राजनयिक न केवल इस कलात्मक उत्सव का हिस्सा बनेंगी, बल्कि वे उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रों से आने वाले संस्कृत के होनहार विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद भी स्थापित करेंगी। यह अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव न केवल हमारे छात्रों का मनोबल सातवें आसमान पर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर संस्कृत सिनेमा और पटकथा लेखन की नई संभावनाओं के द्वार भी पूरी तरह से खोल देगा।

उत्तराखंड के भीतर काम कर रहे शैक्षणिक ढांचे पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि राज्य का संस्कृत शिक्षा निदेशालय और धर्मनगरी हरिद्वार में स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय इस अभियान के मुख्य स्तंभ हैं। इनके साथ ही देवप्रयाग में संचालित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर तथा उत्तराखंड संस्कृत संस्थान जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं वैदिक ज्ञान के व्यापक प्रसार और आम जनता के बीच देववाणी की प्रासंगिकता बढ़ाने में अपनी रात-दिन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन सभी शीर्ष शैक्षणिक और शोध संस्थानों के सामूहिक, संगठित और निरंतर प्रयासों का ही यह सुखद परिणाम है कि आज पूरे उत्तराखंड राज्य में संस्कृत शिक्षा, शोध कार्यों और जन-जागरूकता को एक अभूतपूर्व और उल्लेखनीय बल मिला है। अब समय आ चुका है कि इन जमीनी स्तर के प्रयासों और इन संस्थानों से निकलने वाली मेधावी प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा मंच प्रदान किया जाए, ताकि देश के अन्य हिस्सों में भी इसका सकारात्मक संदेश जा सके।

राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए दीपक कुमार ने डीडी न्यूज़ की महानिदेशिका ममता वर्मा से एक बेहद खास और गंभीर आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन को देश भर के गुरुकुलों, पारंपरिक विद्यापीठों, संस्कृत महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा ग्रहण कर रहे मेधावी विद्यार्थियों की अद्भुत और अद्वितीय प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने वाले विशेष धारावाहिक और साप्ताहिक कार्यक्रम तुरंत प्रारंभ करने चाहिए। गुरुकुल पद्धति से निकले ये शिक्षार्थी अपने बेहद कड़े अनुशासन, उत्कृष्ट आचरण और अद्भुत स्मरण-शक्ति के बल पर वेदों, उपनिषदों, पुराणों तथा अन्य अत्यंत जटिल शास्त्रीय ग्रंथों में असाधारण रूप से दक्षता हासिल करते हैं। सबसे दिलचस्प और चौंकाने वाली बात यह है कि आज की यह नई पीढ़ी केवल प्राचीन ग्रंथों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे आधुनिक काल के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कोडिंग, डेटा साइंस और नवीनतम डिजिटल प्रौद्योगिकियों का भी बहुत ही जिम्मेदारी, नवाचार और प्रभावी ढंग से उपयोग कर समाज को चमत्कृत कर रहे हैं।

मुख्यधारा के इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में संस्कृत के प्रकांड विद्वानों और युवाओं को अधिक से अधिक अवसर दिए जाने की वकालत करते हुए उन्होंने एक बेहद व्यावहारिक और आकर्षक खाका प्रस्तुत किया। संस्कृत सचिव दीपक कुमार ने बहुत ही तार्किक ढंग से सुझाव दिया कि देश का सबसे विश्वसनीय राष्ट्रीय चैनल डीडी न्यूज़ इन योग्य और आधुनिक संस्कृत छात्रों को पेशेवर समाचार वाचक (एंकर), फील्ड संवाददाता, मुख्य उप-संपादक, टीवी निर्माता तथा डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के रूप में सीधे रोजगार के सुनहरे अवसर प्रदान कर सकता है। इस प्रकार की क्रांतिकारी और दूरदर्शी पहल न केवल संस्कृत पत्रकारिता और आधुनिक जनसंचार के क्षेत्र में देश भर के लाखों प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी ओर तेजी से आकर्षित करेगी, बल्कि व्यापक भारतीय समाज के भीतर संस्कृत भाषा के दैनिक उपयोग और उसके प्रचार-प्रसार को एक नई और अत्यधिक तीव्र गति भी प्रदान करेगी, जिससे भाषा का व्यावसायिक ढांचा मजबूत होगा।

उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक सफर की चर्चा करते हुए उन्होंने नैनीताल जनपद के महान मनीषी और अद्वितीय विद्वान आचार्य श्री दिनेश चन्द्र जोशी के ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय योगदान का अत्यंत आदरपूर्वक स्मरण किया। उन्होंने भावुक होते हुए बताया कि उत्तराखंड राज्य में संस्कृत को ‘द्वितीय राजभाषा’ का गौरवशाली संवैधानिक दर्जा दिलाने के पीछे आचार्य जी का संघर्ष और उनका ऐतिहासिक योगदान सर्वोपरि रहा है। उनकी इसी निष्काम और विशिष्ट राष्ट्र सेवा के सम्मान में देश के डाक विभाग द्वारा हाल ही में उनके नाम पर एक बेहद खूबसूरत स्मारक डाक टिकट भी जारी किया गया है। इसके साथ ही एक और अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि भारत सरकार आगामी 11 अप्रैल, 2026 से लेकर 11 अप्रैल, 2027 तक पूरे एक वर्ष की अवधि के लिए आचार्य श्री दिनेश चन्द्र जोशी की भव्य जन्मशती वर्ष का आयोजन पूरे देश के विभिन्न कोनों में राष्ट्रीय स्तर पर कर रही है, जिसके अंतर्गत देश भर में विविध प्रकार के स्मृति कार्यक्रमों, संगोष्ठियों और उच्च शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से उनके अमूल्य योगदान को याद किया जा रहा है।

अपने वक्तव्य के अंतिम चरण में भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए सचिव ने बताया कि उत्तराखंड सरकार वर्तमान में राज्य के सभी संस्कृत विद्वानों, शोधकर्ताओं और ग्रन्थाकारों की एक अत्यंत व्यापक और डिजिटल निर्देशिका (डायरेक्टरी) तैयार करने के मिशन में जुटी हुई है। इस ऐतिहासिक दस्तावेज में राज्य के उन अनेक वयोवृद्ध, शतायु (100 वर्ष की आयु पार कर चुके) और वरिष्ठतम विद्वानों के जीवन परिचय और उनके कार्यों को भी विशेष रूप से सम्मिलित किया जाएगा, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संस्कृत साहित्य, व्याकरण और संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन खपाकर उल्लेखनीय और अमूल्य योगदान दिया है। महानिदेशिका ममता वर्मा ने उत्तराखंड सरकार के इन सभी अद्वितीय और दूरगामी प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की और आश्वस्त किया कि डीडी न्यूज़ देश की इस भाषायी और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर चमकाने के लिए हर संभव सहयोग और रचनात्मक भागीदारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाएगा।

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