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सुपर टैलेंटेड कलाकार अब अपने अनोखे हुनर से शहर को बनाएंगे नंबर वन और सुंदर

स्वच्छता के महासंग्राम में फूंका बिगुल अब शहर के गायकों नर्तकों और पेंटरों की कला बनेगी कचरे के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जिससे सुंदर बनेगा प्यारा और स्वच्छ काशीपुर।

काशीपुर। नगर निगम ने एक ऐसी अनूठी और विस्मयकारी पहल की शुरुआत की है, जो परंपरागत सरकारी अभियानों से बिल्कुल इतर है और जिसमें शहर की आत्मा यानी यहां के कलाकारों को सीधे तौर पर जोड़ने का आह्वान किया गया है। यह मात्र एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि एक भावनात्मक पुकार है, जिसमें नगर निगम ने स्थानीय प्रतिभाओं के हुनर को स्वच्छता के महायज्ञ में आहुति देने के लिए आमंत्रित किया है ताकि काशीपुर की गलियां और मोहल्ले केवल स्वच्छ ही न हों, बल्कि वे अपनी कलात्मक सुंदरता के लिए भी जाने जाएं। इस अभियान का मूल उद्देश्य यह है कि जब कला और कर्तव्य का मिलन होगा, तो जो परिणाम सामने आएंगे वह न केवल स्थाई होंगे बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल पेश करेंगे, क्योंकि जब कोई संदेश गीत, नृत्य या चित्रकारी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव किसी भी शुष्क भाषण से कहीं अधिक गहरा और स्थाई होता है।

इस क्रांतिकारी अभियान के अंतर्गत नगर निगम काशीपुर की टीम ने शहर के उन तमाम “टैलेंटेड लोगों” को संबोधित किया है, जो अपनी कला के माध्यम से समाज में एक नई चेतना जागृत करने का सामर्थ्य रखते हैं और जिनके पास अपनी बात कहने का एक अलग और प्रभावशाली अंदाज है। अधिकारियों का मानना है कि शहर का हर वह युवा या बुजुर्ग जो “गाते हैं”, “डांस करते हैं”, या फिर “एक्टिंग” की दुनिया में अपनी पहचान बना चुके हैं, उन्हें अब अपने मंच को थोड़ा विस्तार देना चाहिए और अपनी कला का उपयोग “स्वच्छता” के प्रति “जागरूकता” फैलाने के लिए करना चाहिए। कल्पना कीजिए कि जब शहर के नुक्कड़ पर कोई कलाकार “एक्टिंग” के जरिए कचरा प्रबंधन का महत्व समझाएगा या कोई गायक सुरीली तान छेड़कर गीले और सूखे कूड़े के अलगाव की बात करेगा, तो वह दृश्य कितना मनोरम और शिक्षाप्रद होगा, जो सीधे तौर पर लोगों की मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेगा। यह पहल कला को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे सामाजिक बदलाव के एक शक्तिशाली हथियार के रूप में देख रही है, जो काशीपुर को एक आदर्श शहर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकती है।

यही नहीं, इस फेहरिस्त में उन लोगों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है जो “बैंड” के शौकीन हैं या जो पारंपरिक “पपेट शो” यानी कठपुतली कला के माहिर कलाकार हैं, क्योंकि यह विधाएं आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी गहरी पैठ रखती हैं और संदेश पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। यदि आप शब्दों के जादूगर हैं और बहुत खूबसूरती से “कविता/जिंगल लिखते हैं”, तो आपके पास सुनहरा अवसर है कि आप ऐसे शब्द गढ़ें जो शहरवासियों की जुबान पर स्वच्छता का मंत्र बनकर चढ़ जाएं और हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि यदि आपकी उंगलियां रंगों से खेलती हैं और आप “पेंटिंग” में माहिर हैं, तो शहर की फीकी और गंदी दीवारें आपके लिए एक कैनवास बन सकती हैं, जहां आप अपनी कलाकारी से स्वच्छता का ऐसा रंग भर सकते हैं कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाए। हास्य का पुट देने वाले “स्टैंडअप” कलाकार और डिजिटल दुनिया के सितारे जो “वीडियो बनाते हैं”, उनके लिए भी यह मंच पूरी तरह खुला है ताकि वे अपने मजेदार और ज्ञानवर्धक कंटेंट से स्वच्छता को एक “ग्लैमरस” और “कूल” अभियान के रूप में युवाओं के बीच पेश कर सकें।

नगर निगम काशीपुर की इस पुकार का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की कलात्मक सीमा नहीं बांधी गई है, बल्कि यह कहा गया है कि “कोई भी और टैलेंट” जो आपके पास हो और जिससे जनमानस में स्वच्छता के प्रति एक नई अलख जलाई जा सके, उसका स्वागत है। प्रशासन का विजन अत्यंत स्पष्ट है कि शहर को “साफ़ और सुंदर” बनाने की जिम्मेदारी केवल सफाई कर्मियों के कंधों पर नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि इसमें जन-भागीदारी की उतनी ही आवश्यकता है जितनी कि सरकारी तंत्र की सक्रियता। जब एक चित्रकार अपनी कला से किसी कूड़ेघर को एक सुंदर कलाकृति में तब्दील कर देता है, तो उस स्थान के प्रति लोगों का नजरिया पूरी तरह बदल जाता है और वहां गंदगी फैलाने की हिम्मत कोई नहीं कर पाता। इसी प्रकार, जब स्थानीय कवि अपनी रचनाओं में शहर की सुंदरता का बखान करते हैं, तो आम आदमी के मन में भी अपने परिवेश के प्रति गौरव का भाव पैदा होता है, जो उसे कचरा न फैलाने के लिए प्रेरित करता है, और यही वह सामाजिक परिवर्तन है जिसे नगर निगम इस अभियान के माध्यम से हासिल करना चाहता है।

इस “स्वच्छता अभियान” को एक जन-आंदोलन का रूप देने के लिए “Be the Volunteer!” का नारा बुलंद किया गया है, जो सीधे तौर पर शहर के स्वाभिमान को झकझोरता है और हर नागरिक को “Join the Swachchata Movement!” के लिए प्रोत्साहित करता है। यह महज एक आमंत्रण नहीं बल्कि काशीपुर के प्रति अपना प्रेम और समर्पण दिखाने का एक बेहतरीन मौका है, जहां आपका छोटा सा योगदान भी एक बड़े बदलाव की नींव रख सकता है और आने वाले कल की तस्वीर बदल सकता है। नगर निगम की इस पहल को शहर के प्रबुद्ध वर्ग और युवाओं ने हाथों-हाथ लिया है और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि कैसे हम अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को बाहर लाकर अपने शहर के लिए कुछ सार्थक कर सकते हैं। शहर के सौंदर्यीकरण के इस महाकुंभ में शामिल होने के लिए उत्साह का माहौल बना हुआ है और लोग इसे एक चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद सुखद अवसर के रूप में देख रहे हैं, जहां उन्हें अपने हुनर की पहचान के साथ-साथ सामाजिक सेवा का सुकून भी प्राप्त होगा।

यदि आप भी काशीपुर के निवासी हैं और आपके भीतर कला का कोई ऐसा झरना बह रहा है जो समाज के कल्याण में काम आ सके, तो अब देर करने का समय नहीं है क्योंकि आपका शहर आपको बड़ी उम्मीद भरी नजरों से पुकार रहा है। इस भव्य और प्रेरक “Swachchata Movement” का हिस्सा बनने के लिए नगर निगम ने संपर्क का एक सीधा मार्ग भी उपलब्ध कराया है, जिसके तहत आप दिए गए “Contact: +91-6396692037” पर कॉल करके अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं और विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह संपर्क सूत्र केवल एक फोन नंबर नहीं है, बल्कि यह काशीपुर को उत्तराखंड के सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में शीर्ष पर पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पाटकर एक साझा लक्ष्य की ओर ले जाएगा। आइए, हम सब मिलकर इस मिशन को सफल बनाएं और अपनी कलात्मक ऊर्जा से एक ऐसे काशीपुर का निर्माण करें जो न केवल दिखने में स्वच्छ और मनमोहक हो, बल्कि जहां का हर नागरिक स्वच्छता को अपने संस्कार का अभिन्न हिस्सा बना ले, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक स्वस्थ और सुंदर वातावरण में सांस ले सकें।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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