देहरादून। उत्तराखंड की शांत और सुरक्षित मानी जाने वाली राजधानी देहरादून में 30 मार्च, सोमवार की सुनहरी सुबह उस वक्त किसी खौफनाक मंजर में तब्दील हो गई, जब शहर के पॉश इलाके राजपुर रोड पर सरेआम खून की होली खेली गई। देवभूमि के हृदयस्थल कहे जाने वाले मसूरी मार्ग पर स्थित जौहरी गांव के पास जब लोग पक्षियों की चहचहाहट और ताजी हवा के बीच अपनी सुबह की सैर का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट ने पूरे वातावरण में दहशत का जहर घोल दिया। यह सनसनीखेज वारदात महज एक मामूली ‘रोड रेज’ यानी सड़क पर ओवरटेक करने के विवाद से शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते एक वीभत्स और खूनी मोड़ ले लिया। इस खूनी संघर्ष के बीच एक बेगुनाह और देश की सेवा कर चुके रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी को अपनी जान गंवानी पड़ी, जो नियति के क्रूर खेल के चलते उस वक्त वहां मॉर्निंग वॉक कर रहे थे। जिस समय शहर जाग रहा था, उस वक्त दो गुटों के बीच सड़क पर मचे इस तांडव ने कानून व्यवस्था के दावों की धज्जियाँ उड़ा कर रख दीं और अब इस पूरी वारदात का जो सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, उसने हर देखने वाले की रूह को कंपा कर रख दिया है। देहरादून जैसे शांत शहर में इस तरह का दुस्साहस पहले कभी नहीं देखा गया, जहाँ मॉर्निंग वॉक पर निकले लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती पुलिस जांच के मुताबिक, इस खूनी ड्रामे की पटकथा सोमवार सुबह करीब छह से सात बजे के बीच लिखी गई, जब एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो और एक काले रंग की फॉर्च्यूनर के बीच अहंकार की जंग छिड़ गई। जौहरी गांव की संकरी गलियों और मसूरी रोड के मोड़ों पर ये दोनों गाड़ियां किसी रेसिंग ट्रैक की तरह तेज रफ्तार में एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश कर रही थीं। विवाद इतना बढ़ा कि स्कॉर्पियो सवार हमलावरों ने अपना आपा खो दिया और फिल्मी अंदाज में फॉर्च्यूनर का पीछा करते हुए उस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। सड़क पर मौजूद मॉर्निंग वॉकर अभी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही गोलियों की गूँज ने सबको अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने पर मजबूर कर दिया। सीसीटीवी वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे हमलावर गाड़ी को रोकने के इरादे से गोलियां चला रहे थे, लेकिन इन बेकाबू गोलियों में से एक काल बनकर सीधे सड़क किनारे टहल रहे रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के सीने के पार निकल गई। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि गाड़ियों की रफ्तार और गोलियों की आवाज इतनी तेज थी कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला और देखते ही देखते एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया।
जैसे ही गोली रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी को लगी, वह लहूलुहान होकर मौके पर ही गिर पड़े, जिससे वहां मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। घायल अवस्था में उन्हें आनन-फानन में पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर, हमलावरों का आतंक यहीं नहीं रुका; फायरिंग से बचने की कोशिश में भाग रही फॉर्च्यूनर कार अपना संतुलन खो बैठी और सड़क किनारे एक विशाल पेड़ से जा टकराई। इसके बाद भी हमलावरों का खून ठंडा नहीं हुआ, स्कॉर्पियो सवार बदमाश अपनी गाड़ी से नीचे उतरे और दुर्घटनाग्रस्त फॉर्च्यूनर में बैठे लोगों के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की और वाहन को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इस पूरी हैवानियत को अंजाम देने के बाद आरोपी अपनी गाड़ी लेकर मौके से फरार हो गए, जिससे अब पूरे राजपुर और जौहरी गांव क्षेत्र में डर और असुरक्षा का माहौल गहरा गया है। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों के चेहरे पर कानून का रत्ती भर भी खौफ नहीं था और वे पूरी तैयारी के साथ इस वारदात को अंजाम दे रहे थे, जैसे वे सड़क पर नहीं बल्कि किसी जंग के मैदान में हों।
इस लोमहर्षक घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रमोद कुमार के निर्देशन में भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा। पुलिस अधिकारियों ने तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और हमलावरों को दबोचने के लिए जनपद के सभी निकास द्वारों पर सख्त नाकेबंदी कर दी गई है। प्रमोद कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि कंट्रोल रूम के माध्यम से सुबह सात बजे सूचना मिली थी कि जौहरी गांव में गाड़ियों के बीच विवाद और फायरिंग हुई है, जिसमें एक निर्दोष मॉर्निंग वॉकर की मौत हो गई है। पुलिस की अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं जो सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही हैं ताकि हमलावरों की स्कॉर्पियो के नंबर और उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। पुलिस का कहना है कि यह मामला शुद्ध रूप से रोड रेज और तात्कालिक गुस्से का परिणाम नजर आ रहा है, लेकिन वे अन्य सभी संभावित पहलुओं और रंजिशों की भी गहनता से जांच कर रहे हैं ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके। देहरादून पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हमलावरों के पास अवैध हथियार कहाँ से आए और उनका पिछला आपराधिक रिकॉर्ड क्या रहा है।
राजधानी देहरादून के सबसे व्यस्त और प्रतिष्ठित मसूरी रोड पर हुई इस वारदात ने शहर के सुरक्षा चक्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ दिनदहाड़े बदमाशों ने खुलेआम असलाहों का प्रदर्शन किया। एक बेगुनाह फौजी अफसर, जिसने अपनी पूरी जिंदगी सरहदों की हिफाजत में गुजार दी, उसे घर के पास की सड़क पर चंद सेकंड के गुस्से का शिकार होना पड़ा, यह खबर पूरे उत्तराखंड को झकझोर देने वाली है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस तरह से अपराधी बेखौफ होकर सड़कों पर फायरिंग कर रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि अपराधियों में कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है। फिलहाल, रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरा सैन्य समाज इस घटना से आक्रोशित है। अब सबकी नजरें पुलिस की तफ्तीश पर टिकी हैं कि आखिर वे कौन रसूखदार या बेखौफ बदमाश थे, जिन्होंने देहरादून की शांत सुबह को लाल रंग से रंग दिया और क्या उन्हें उनके किए की सख्त सजा मिल पाएगी? जौहरी गांव के लोगों ने मांग की है कि इस क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और इस तरह के आवारा तत्वों पर नकेल कसी जाए जो आए दिन सड़कों पर गुंडागर्दी करते नजर आते हैं।
देहरादून के राजपुर थाना क्षेत्र में हुई यह घटना न केवल एक हत्या है, बल्कि यह हमारे समाज में बढ़ते असहिष्णु व्यवहार और ‘रोड रेज’ की गंभीर समस्या का जीता-जागता उदाहरण है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की शहादत के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब मॉर्निंग वॉक पर निकलना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है? मसूरी रोड पर हर सुबह सैंकड़ों लोग टहलने निकलते हैं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल होते हैं। यदि ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर गाड़ियाँ एक-दूसरे पर गोलियां बरसाएंगी, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? पुलिस के द्वारा की गई नाकेबंदी और चेकिंग अभियान जारी है, लेकिन आरोपियों का अभी तक कोई सुराग न मिलना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है। इस दुखद घटना ने न केवल एक परिवार को जीवन भर का जख्म दिया है, बल्कि पूरी राजधानी के माथे पर कलंक लगा दिया है। अब यह देखना होगा कि पुलिस कब तक इन गुनहगारों को सलाखों के पीछे भेजती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे या नहीं।
पूरी घटना का सबसे भयावह पहलू यह है कि हमलावरों ने न केवल गोलीबारी की, बल्कि एक दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी में फंसे लोगों को भी नहीं बख्शा। स्कॉर्पियो सवारों का वह हिंसक व्यवहार दर्शाता है कि वे किसी भी हद तक जाने को तैयार थे। फॉर्च्यूनर गाड़ी जब पेड़ से टकराई, तो वह पूरी तरह से दब गई थी, लेकिन हमलावरों ने मानवता को ताक पर रखकर वहां भी हिंसा जारी रखी। इस दौरान सड़क पर चल रहे अन्य लोग भी अपनी जान बचाने के लिए झाड़ियों और दीवारों के पीछे छिपने को मजबूर थे। रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की गलती सिर्फ इतनी थी कि वे अपनी सेहत के प्रति जागरूक थे और हमेशा की तरह सैर पर निकले थे। उनकी मृत्यु ने पूरे प्रदेश के पूर्व सैनिकों में गहरा रोष पैदा कर दिया है, जिन्होंने सरकार से इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित न्याय की मांग की है। देहरादून की इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर एक उच्च पदस्थ सैन्य अधिकारी की सुरक्षा और कानून के राज से जुड़ा हुआ है।
प्रमोद कुमार ने आश्वासन दिया है कि पुलिस की सर्विलांस टीम और एसओजी (SOG) की टीमें सक्रिय हैं और बहुत जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने जनता से भी अपील की है कि अगर किसी के पास घटना से जुड़ी कोई अतिरिक्त जानकारी या वीडियो फुटेज हो, तो वह पुलिस के साथ साझा करे। इस वारदात के बाद से राजपुर और मसूरी रोड के व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। पुलिस अब उन सभी रास्तों की जांच कर रही है जिनसे होकर स्कॉर्पियो सवार भाग सकते थे। यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि हमलावर उत्तर प्रदेश के पड़ोसी जिलों की ओर भाग गए होंगे। बहरहाल, रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है, लेकिन उनके अंतिम संस्कार के समय जो गमगीन माहौल था, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। हर आंख नम थी और हर दिल में बस एक ही सवाल था कि क्या देवभूमि अब वाकई सुरक्षित रह गई है?
अंततः, यह घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क पर चलते समय संयम बरतना कितना आवश्यक है। एक छोटी सी बहस और ओवरटेक की होड़ ने एक सम्मानित फौजी की जान ले ली और कई परिवारों का सुकून हमेशा के लिए छीन लिया। पुलिस की चार्जशीट में क्या तथ्य सामने आते हैं और यह हिंसा किस वजह से इतनी खतरनाक बनी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन फिलहाल, देहरादून की सड़कों पर पसरा यह सन्नाटा और लोगों के चेहरों पर झलकता डर यह बताने के लिए काफी है कि इस वारदात ने शहर की आत्मा को चोट पहुँचाई है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की यादें और उनकी सेवा को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा, लेकिन उनके साथ हुए इस अन्याय का हिसाब होना अभी बाकी है। अब सबकी निगाहें पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए कि कानून हाथ में लेने वालों की जगह सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी है।





