रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन एक भव्य और प्रेरणादायक समारोह के साथ संपन्न हुआ, जिसने न केवल स्वयंसेवियों के भीतर राष्ट्रभक्ति का संचार किया बल्कि उन्हें समाज सेवा के प्रति अटूट संकल्प से भी बांध दिया। छोई स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित इस समापन बेला में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एम. सी. पाण्डे, विधायक प्रतिनिधि जगमोहन सिंह बिष्ट और विद्यालय के प्रधानाचार्य के डी जोशी ने विशिष्ट अतिथियों के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर स्वयंसेवियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, जिसके बाद वातावरण सरस्वती वंदना के पावन स्वरों से गूंज उठा। स्वयंसेवियों ने अत्यंत सुरीले अंदाज में स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया, जिससे पूरे परिसर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। सात दिनों तक चले इस कठिन परिश्रम और सीखने की प्रक्रिया के बाद, स्वयंसेवियों के चेहरों पर एक नई चमक और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा था, जो उनके द्वारा समाज के प्रति ली गई सेवा की शपथ का साक्षात प्रमाण था।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में स्वयंसेवियों ने अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं का ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद हर व्यक्ति मंत्रमुग्ध रह गया। एकल नृत्य और गायन की प्रस्तुतियों ने जहाँ दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं, वहीं उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक सामूहिक ‘झोड़े’ नृत्य ने पूरे कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। झोड़े की थाप पर थिरकते हुए छात्र-छात्राओं ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति को संजोए रखना भी अत्यंत आवश्यक है। इस सांस्कृतिक संध्या ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी दी। उपस्थित अतिथियों ने स्वयंसेवियों के इस कलात्मक कौशल की मुक्तकंठ से सराहना की और कहा कि इस तरह के मंच युवाओं के व्यक्तित्व निखारने में मील का पत्थर साबित होते हैं। शिविर का यह पड़ाव छात्र-छात्राओं के लिए एक ऐसा अनुभव रहा, जहाँ उन्होंने टीम वर्क, अनुशासन और पारस्परिक सहयोग की महत्ता को व्यावहारिक रूप से समझा और उसे अपने भीतर आत्मसात किया।
विशिष्ट अतिथि और विधायक प्रतिनिधि जगमोहन सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने का आह्वान करते हुए कहा कि एनएसएस केवल एक प्रमाण पत्र हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला सिखाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से व्यक्ति के भीतर अनुशासन की भावना पैदा होती है और वह किसी भी कठिन परिस्थिति में स्वयं को ढालने या समायोजन करने की प्रवृत्ति विकसित कर लेता है। बिष्ट ने स्वयंसेवियों को याद दिलाया कि देश का भविष्य उन्हीं के कंधों पर है और एक अनुशासित नागरिक ही राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सकता है। उनके शब्दों ने शिविरार्थियों में एक नया जोश भर दिया, जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक गंभीरता से समझने लगे। उन्होंने छात्र जीवन में सेवा भाव को सर्वोपरि रखने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ी एक संवेदनशील और जागरूक समाज का निर्माण कर सके।
समारोह के मुख्य अतिथि और महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एम. सी. पाण्डे ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में केवल किताबी ज्ञान या शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किसी भी विद्यार्थी की प्रतिभा का पूर्ण आकलन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वास्तविक सफलता प्राप्त करने के लिए चहुंमुखी विकास अनिवार्य है, जिसमें सामाजिक चेतना, नेतृत्व क्षमता और नैतिक मूल्यों का समावेश होना चाहिए। प्राचार्य ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सात दिनों के इस विशेष शिविर के दौरान स्वयंसेवियों ने जो कुछ भी सीखा है, चाहे वह श्रमदान हो, अनुशासन हो या सामाजिक सरोकार, उसे केवल शिविर तक सीमित न रखें बल्कि अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। उनके अनुसार, शिविर की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब यहाँ से निकला प्रत्येक स्वयंसेवी समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने वाला ‘चेंज मेकर’ बनकर उभरे। उन्होंने स्वयंसेवियों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर सीखते रहने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला समन्वयक प्रोफेसर जे एस नेगी ने स्वयंसेवियों को इस योजना के व्यापक आयामों और उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार एनएसएस के अनुभव एक छात्र के शैक्षणिक और व्यावहारिक जीवन में मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने तकनीकी बारीकियों पर चर्चा करते हुए एनएसएस की परीक्षाओं और संबंधित प्रमाण पत्रों (सर्टिफिकेट) के महत्व को समझाया, जो छात्रों को भविष्य में उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों में लाभ प्रदान करते हैं। प्रोफेसर जे एस नेगी ने छात्रों को स्पष्ट किया कि सेवा का यह मार्ग उन्हें न केवल एक बेहतर इंसान बनाता है बल्कि समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है। वहीं, डॉ. जे. पी. त्यागी ने भी जीवन में सफलता के मूल मंत्रों को साझा किया और बताया कि कठिन परिश्रम और सही दिशा ही छात्र जीवन को सफल बना सकती है। उन्होंने स्वयंसेवियों को चुनौतियों से न घबराने और निरंतर प्रयास करने की सलाह दी, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास का संचार हुआ।
अनुशासन और नैतिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य के. डी. जोशी ने स्वयंसेवियों के सात दिवसीय व्यवहार की सराहना की और उन्हें बताया कि एक छात्र के जीवन में अनुशासन का वही महत्व है जो एक सैनिक के जीवन में होता है। उन्होंने शिविर के सफल संचालन के लिए आयोजन टीम को बधाई दी और कहा कि ऐसे शिविर छात्रों को अपनी क्षमताओं को पहचानने का उचित अवसर प्रदान करते हैं। शिविर की विस्तृत आख्या और सात दिनों की गतिविधियों का रिपोर्ट कार्ड कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ममता भदोला जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस प्रकार स्वयंसेवियों ने गाँव की गलियों से लेकर सफाई अभियानों और जन जागरूकता रैलियों तक में सक्रिय भूमिका निभाई। इस रिपोर्ट को सुनकर अतिथियों ने स्वयंसेवियों के जज्बे को सलाम किया और उनके द्वारा किए गए श्रमदान की प्रशंसा की। सात दिनों का यह सफर कठिनाइयों भरा जरूर था, लेकिन इसके परिणाम अत्यंत सुखद और दूरगामी रहे।
समापन समारोह का सबसे उत्साहजनक क्षण वह रहा जब शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्राचार्य प्रोफेसर एम. सी. पाण्डे और अन्य अतिथियों ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले स्वयंसेवियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। पूरे सात दिवसीय शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन और अनुशासन के आधार पर छात्रा इकाई से कु. ज्योति सनवाल और छात्र इकाई से उज्ज्वल कुमार को ‘सर्वश्रेष्ठ शिविरार्थी’ के विशेष पुरस्कार से नवाजा गया। इन दोनों स्वयंसेवियों के नाम की घोषणा होते ही सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जो उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रतिफल था। मंच का कुशल संचालन वैशाली द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी प्रभावी वाणी से कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। पुरस्कार पाकर स्वयंसेवियों के चेहरों पर जो संतुष्टि और गौरव का भाव था, वह इस बात का प्रमाण था कि उन्होंने इस शिविर को केवल एक औपचारिकता के तौर पर नहीं, बल्कि एक मिशन के तौर पर लिया था।
अंत में, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ममता भदोला जोशी और डॉ. सुमन कुमार ने संयुक्त रूप से सभी स्वयंसेवी छात्र-छात्राओं के अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उनके द्वारा लिए गए सेवा के दृढ़ संकल्प की सराहना की। उन्होंने समापन समारोह में पधारे सभी अतिथियों, सहयोगियों और स्थानीय निवासियों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह सात दिवसीय आयोजन निर्विघ्न संपन्न हो सका। इस सात दिवसीय विशेष शिविर का विधिवत समापन एनएसएस के ‘लक्ष्य गीत’ और राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिससे हर किसी के मन में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना और अधिक प्रबल हो गई। समारोह में डॉ. जे. पी. त्यागी, छात्र संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार, उपाध्यक्ष मनोज पांडेय, सचिव मनीष जोशी, कोषाध्यक्ष संक्रांत सिंह, सांस्कृतिक सचिव कृतिका मेंदोलिया और दर्शन सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। शिविर की यादें और यहाँ से मिले सबक स्वयंसेवियों के साथ ताउम्र रहेंगे, जो उन्हें जीवन के हर मोड़ पर एक बेहतर इंसान बनने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।





