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मुख्यमंत्री शोध प्रोत्साहन योजना के लिए चयनित डॉ शिप्रा पंत ने महाविद्यालय का मान बढ़ाया

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत चयनित डॉ. शिप्रा पंत अब उत्तराखंड के प्राचीन ग्रंथों में छिपे शास्त्रीय संगीत के अनमोल रहस्यों को दुनिया के सामने लाएंगी जिससे देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी नई पहचान।

रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संगीत विभाग में कार्यरत डॉ. शिप्रा पंत की मेहनत और शोध क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान को मान्यता देते हुए उनके शोध प्रस्ताव को मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना 2025 के तहत चयनित किया गया है। डॉ. पंत द्वारा प्रस्तुत शोध परियोजना उत्तराखंड के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित शास्त्रीय संगीत के तत्वों पर केंद्रित होगी, जिसमें संगीत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और तकनीकी आयामों का विश्लेषण किया जाएगा। इस चयन से न केवल महाविद्यालय में गर्व की लहर दौड़ गई है, बल्कि पूरे राज्य में शैक्षणिक और शोध क्षेत्र में नई उम्मीदें और उत्साह पैदा हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डॉ. पंत का यह शोध न केवल शास्त्रीय संगीत के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देगा, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर पहचान दिलाएगा।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम.सी. पाण्डे ने डॉ. शिप्रा पंत की उपलब्धि पर अत्यंत हर्ष व्यक्त किया और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में इस प्रकार की उपलब्धियां शिक्षण संस्थानों के लिए गर्व का विषय होती हैं और इससे छात्रों में प्रेरणा का संचार होता है। प्राचार्य ने यह भी कहा कि डॉ. पंत का चयन राज्य की शैक्षणिक नीतियों और शोध प्रोत्साहन योजनाओं की सफलता का प्रमाण है। उनका यह योगदान न केवल पीएनजी महाविद्यालय के लिए बल्कि पूरे उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था के लिए गौरव का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने महाविद्यालय परिवार से अपील की कि वे शोध के महत्व को समझें और विद्यार्थियों को प्रेरित करें।

महाविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. एस.एस. मौर्य, स्टाफ क्लब के संयोजक डॉ. नरेश कुमार, साथ ही डॉ. लवकुश चौधरी, डॉ. योगेश चन्द्र, डॉ. पी.सी. पालीवाल, डॉ. डी.एन. जोशी, डॉ. इंदु आर्या, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गोविंद सिंह जंगपांगी, गोविंद सिंह मेवाड़ी और समस्त महाविद्यालय परिवार ने डॉ. पंत के चयन पर खुशी और गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे महाविद्यालय के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है। अधिकारियों और शिक्षकों ने इसे महाविद्यालय की शोध संस्कृति को मजबूती प्रदान करने वाला कदम बताया और यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि भविष्य में और भी शोधकर्ताओं को इस प्रकार की योजनाओं में सफलता मिले।

डॉ. शिप्रा पंत की शोध परियोजना उत्तराखंड के प्राचीन ग्रंथों में संगीत के तत्वों का गहन अध्ययन करेगी, जिसमें विशेष रूप से शास्त्रीय संगीत के विविध आयामों का विश्लेषण किया जाएगा। इस शोध का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक अध्ययन नहीं है, बल्कि इसे व्यावहारिक स्तर पर भी लागू किया जाएगा, ताकि युवा संगीतज्ञ और शोधकर्ता इन ज्ञान स्रोतों से लाभान्वित हो सकें। डॉ. पंत का यह प्रयास राज्य के शास्त्रीय संगीत के संरक्षण, अध्ययन और नवाचार में अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के शोध से न केवल सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा होती है, बल्कि संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी नई दिशा और दिशा-निर्देश मिलते हैं।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत चयनित होने के बाद महाविद्यालय में एक उत्सव जैसा माहौल बन गया है। छात्र और शिक्षक दोनों ने इस उपलब्धि को उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि इस योजना के तहत चयनित शोध परियोजनाएं राज्य में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह के चयन न केवल शोधकर्ताओं को सम्मान और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें उच्च स्तरीय मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं, जो उनके शोध कार्य की गुणवत्ता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

डॉ. शिप्रा पंत ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस योजना में चयनित होने पर अत्यधिक खुशी और गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि उनके शोध का लक्ष्य उत्तराखंड के प्राचीन संगीत ग्रंथों के ज्ञान को आधुनिक युग के शोधकर्ताओं और संगीत शिक्षकों तक पहुंचाना है। डॉ. पंत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के माध्यम से उन्हें न केवल आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि उनके शोध कार्य को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिल रही है। उनके अनुसार, इस योजना ने उन्हें शोध कार्य के प्रति और अधिक समर्पित और प्रेरित किया है।

पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के अन्य शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने डॉ. पंत की उपलब्धि को महाविद्यालय की गौरवशाली परंपरा के रूप में देखा। प्रो. एस.एस. मौर्य, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. लवकुश चौधरी और अन्य उपस्थित शिक्षकों ने इस मौके पर डॉ. पंत के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की और कहा कि उनके चयन से महाविद्यालय के शोध वातावरण में और उत्साह पैदा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह उपलब्धि अन्य शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

इस योजना का उद्देश्य राज्य के युवाओं और शोधकर्ताओं को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना है। डॉ. शिप्रा पंत का चयन इस योजना की सफलता का प्रतीक है। उनके शोध कार्य के माध्यम से उत्तराखंड के प्राचीन संगीत ग्रंथों का संरक्षण और उनके ज्ञान का सही उपयोग संभव हो सकेगा। महाविद्यालय परिवार ने कहा कि इस चयन ने शोध और शिक्षा के महत्व को उजागर किया है और अन्य शोधकर्ताओं को भी अपने शोध कार्य को उच्च स्तर पर विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा।

डॉ. पंत के चयन के बाद महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी खुशी व्यक्त की और कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना जैसी पहलें विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह न केवल उन्हें अनुसंधान के क्षेत्र में अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए भी प्रेरित करती हैं। इस प्रकार के चयन से राज्य और देश में शोध कार्यों का स्तर और मानक बढ़ता है।

कुल मिलाकर, डॉ. शिप्रा पंत का चयन मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत महाविद्यालय और राज्य के लिए गर्व का विषय है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे महाविद्यालय और उत्तराखंड की शिक्षा और शोध प्रणाली के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके शोध कार्य से शास्त्रीय संगीत के तत्वों का संरक्षण, अध्ययन और व्यापक प्रचार संभव होगा। इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और योजना से शोध कार्य न केवल सफल हो सकता है बल्कि समाज और संस्कृति के लिए भी लाभकारी साबित होता है।

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