काशीपुर। उत्तराखंड के धार्मिक और सांस्कृतिक परिवेश में महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष आस्था, श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम के रूप में मनाया जाता है। इस पावन अवसर पर काशीपुर स्थित मोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित होने वाला मेला क्षेत्र की धार्मिक परंपरा को जीवंत कर देता है। इसी क्रम में कावड़ियों की सेवा को समर्पित भाव से भंडारा आयोजक समाजसेवी पंकज टंडन द्वारा इस वर्ष भी विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं और कावड़ यात्रियों को विशेष राहत और सुविधा प्रदान की। हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर लगभग 190 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर पहुंचने वाले कावड़ियों के लिए यह भंडारा सेवा, समर्पण और मानवता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। मंदिर परिसर और मेले के आसपास उमड़ती भीड़ यह दर्शाती है कि भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कितनी प्रगाढ़ है और इस आयोजन ने हजारों यात्रियों के लिए विश्राम और भोजन की व्यवस्था कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की।
पवित्र हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करने वाले कावड़ियों की सेवा के उद्देश्य से पंकज टंडन द्वारा वर्षों से निरंतर भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जो अब क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक सेवा परंपरा का रूप ले चुका है। कठिन मार्ग और लंबी दूरी तय कर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन केवल भोजन या विश्राम की व्यवस्था नहीं बल्कि सेवा भावना का जीवंत उदाहरण है। समाजसेवी पंकज टंडन का कहना है कि भगवान शिव की कृपा और श्रद्धालुओं के आशीर्वाद से यह आयोजन हर वर्ष भव्यता के साथ संपन्न होता है। उनका मानना है कि सेवा और समर्पण ही सच्ची भक्ति का आधार है, और इसी भावना से वे हर बार अधिक श्रद्धा और समर्पण के साथ इस आयोजन को सफल बनाने का प्रयास करते हैं। आयोजन स्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का उत्साह और संतोष इस सेवा के महत्व को और अधिक मजबूत बनाता है।
काशीपुर के मोटेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर लगने वाला मेला इस बार भी आस्था और उल्लास का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां चारों ओर शिवभक्ति का वातावरण दिखाई दे रहा है। मंदिर के चारों तरफ लगी दुकानों ने मेले को जीवंत स्वरूप प्रदान कर दिया है। फल, प्रसाद, पूजन सामग्री और अन्य धार्मिक वस्तुओं की दुकानें श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को पूरा कर रही हैं। जैसे-जैसे भक्त मंदिर की ओर बढ़ते हैं, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जाती है और वातावरण में हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज सुनाई देती है। इस मेले में न केवल स्थानीय श्रद्धालु बल्कि दूर-दराज से आए भक्त भी शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं।
मोटेश्वर महादेव मंदिर की धार्मिक महत्ता क्षेत्र में अत्यंत विशेष मानी जाती है। महाशिवरात्रि के दिन यहां लाखों कावड़िए जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं और अपनी कावड़ को भगवान शिव को समर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का यह प्रवाह मंदिर परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। मंदिर के चारों ओर फैली भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आस्था का केंद्र भी बन चुका है। यहां पहुंचने वाले भक्तों का विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण का यह दृश्य हर किसी को भावुक कर देता है।
भक्तों के लिए आयोजित भंडारे में सेवा और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। आयोजन स्थल पर प्रसाद वितरण, फल वितरण और विश्राम की व्यवस्था श्रद्धालुओं को विशेष राहत प्रदान कर रही है। समाजसेवी पंकज टंडन का कहना है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया यह आयोजन भगवान शिव की कृपा और भक्तों के सहयोग से विशाल स्वरूप ले चुका है। लोगों का प्रेम, आशीर्वाद और समर्थन इस आयोजन को और अधिक भव्य बना देता है। उन्होंने बताया कि भले ही आयोजन में कुछ कमियां रह जाएं, लेकिन श्रद्धालुओं का उत्साह और संतोष उन्हें निरंतर सेवा के लिए प्रेरित करता है। यह आयोजन समाज में सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करता है।
मेला परिसर में सुरक्षा और सुविधा व्यवस्था को लेकर प्रशासन और पुलिस प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी देखने को मिल रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। प्रशासन द्वारा भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोजन स्थल के आसपास चिकित्सा शिविर भी स्थापित किया गया है, जहां श्रद्धालुओं को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बताया गया कि चिकित्सा शिविर में 1000 से 1200 सौ श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य जांच की सुविधा दी गई। यह व्यवस्था कावड़ यात्रियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हुई।
श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर प्रारंभिक जानकारी में कुछ कमी की बात सामने आई थी, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में विशाल जनसमूह उपस्थित होकर भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त कर रहा है। हजारों नहीं बल्कि लाखों की संख्या में भक्त यहां पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं और भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य धार्मिक उत्साह और श्रद्धा की गहराई को दर्शाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है, जो उन्हें हर वर्ष इस आयोजन में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है।
भक्ति और सेवा के इस संगम में स्थानीय जनता का सहयोग भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के नागरिकों, स्वयंसेवकों और प्रशासन का सामूहिक योगदान दिखाई देता है। लोग विभिन्न प्रकार से सहयोग करते हुए श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे हुए हैं। समाजसेवी पंकज टंडन का कहना है कि जनता का समर्थन और सहयोग इस आयोजन की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है और भगवान शिव की कृपा से ही यह संभव हो पाता है। यह आयोजन समाज में एकता और सहयोग का संदेश भी देता है।
महाशिवरात्रि पर्व के दौरान आयोजित इस मेले में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी अनूठा संगम देखने को मिलता है। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान कर रहा है। श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हुए भक्ति में लीन दिखाई दे रहे हैं। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक महत्व को जीवंत रखा है बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत किया है। मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तों की भीड़ और उत्साह यह दर्शाता है कि यह आयोजन क्षेत्र के लोगों के लिए कितनी महत्वपूर्ण परंपरा बन चुका है।
समग्र रूप से देखा जाए तो काशीपुर के मोटेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित महाशिवरात्रि मेला और पंकज टंडन द्वारा आयोजित विशाल भंडारा श्रद्धा, सेवा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया है। हरिद्वार से पैदल यात्रा कर आने वाले कावड़ियों के लिए यह आयोजन राहत और प्रेरणा का स्रोत साबित हो रहा है। श्रद्धालुओं का विश्वास, आयोजनकर्ताओं की सेवा भावना और प्रशासन का सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा और सेवा का यह संगम समाज में धार्मिक और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।





