नई दिल्ली। देश की सियासत एक बार फिर किसानों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के मुद्दे पर गरमा गई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, मुकदमा चलाया जाए या संसद में प्रिविलेज प्रस्ताव लाया जाए, वे किसानों के अधिकारों की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी पर चोट पहुंचाए या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह सीधे तौर पर किसान विरोधी कदम माना जाएगा। राहुल गांधी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी परिस्थिति में किसानों के अधिकारों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि देश की कृषि व्यवस्था केवल आर्थिक ढांचा नहीं बल्कि भारत की नींव है और यदि इस नींव को कमजोर किया गया तो देश की खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उनके बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक उग्र बना दिया है तथा केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति को और तेज कर दिया है।
राजनीतिक विवाद उस समय और गहरा हो गया जब राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के जरिए भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से कपास, सोयाबीन, सेब और अन्य फल उत्पादकों को भारी नुकसान होने की आशंका है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि विदेशी शक्तियां लंबे समय से भारतीय कृषि बाजार पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही थीं और अब केंद्र सरकार ने उनके लिए रास्ता खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के समझौते से घरेलू किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है, क्योंकि विदेशी कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर तकनीक और सरकारी सहायता से संचालित होता है। राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र की संरचना को प्रभावित करने वाला कदम है, जिसका असर देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
सियासी बयानबाजी के दौरान राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव के कारण भारत की कृषि नीति में ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं जो किसानों के हितों के खिलाफ हैं। राहुल गांधी ने कहा कि मक्का, कपास, सोयाबीन और फल जैसे उत्पादों के आयात की अनुमति देना केवल शुरुआत है और भविष्य में पूरी कृषि बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस नीति से बड़े कॉरपोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के किसान इस स्थिति को समझ रहे हैं और वे केंद्र सरकार की नीतियों को किसान विरोधी मानते हैं। उनके अनुसार, पहले भी कृषि कानूनों को लेकर विवाद हुआ था और अब नए व्यापार समझौते के जरिए किसानों के हितों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि व्यवस्था की तुलना करते हुए राहुल गांधी ने अमेरिका और भारत के किसानों के बीच अंतर को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका में किसानों के पास हजारों एकड़ जमीन होती है, आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाता है और सरकार की ओर से भारी सब्सिडी दी जाती है। इसके विपरीत भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत की जमीन है और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा आधुनिक तकनीक की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पाती है। राहुल गांधी ने दावा किया कि ऐसी असमान परिस्थितियों में विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलना भारतीय किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा को कठिन बना सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों को मजबूत करने के बजाय विदेशी बाजारों को प्राथमिकता देती है तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनके अनुसार, किसानों की आर्थिक स्थिति पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रही है और ऐसे फैसले स्थिति को और जटिल बना सकते हैं।
राजनीतिक विवाद के बीच राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके बयान को लेकर उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जाती है तो भी वे अपनी बात पर कायम रहेंगे। उन्होंने कहा कि संसद में उन्होंने जो कहा वह उनकी नजर में सच्चाई है और वे किसानों के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाना जारी रखेंगे। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्हें आलोचना या कानूनी कार्रवाई से डर नहीं लगता और वे किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस बयान ने विपक्षी राजनीति को नया तेवर दिया है और कांग्रेस पार्टी ने भी किसानों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने के संकेत दिए हैं।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से भी इस मुद्दे पर समर्थन जताया गया है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष गार्गी जी सहित पूरी पार्टी और उसके कार्यकर्ता किसानों के साथ खड़े हैं और किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी नीति का विरोध किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बड़े उद्योगपतियों और विदेशी ताकतों को लाभ पहुंचाने के लिए कृषि क्षेत्र में बदलाव कर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और किसी भी अन्याय को स्वीकार नहीं करेगी। उनके बयान ने सियासी माहौल में नई बहस को जन्म दिया है और केंद्र सरकार की कृषि और व्यापार नीतियों पर विपक्ष ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राहुल गांधी के इस वीडियो संदेश के बाद देश की राजनीति में किसानों का मुद्दा फिर से केंद्र में आ गया है। विपक्ष ने इसे किसानों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में संसद और राजनीतिक मंचों पर बड़े टकराव का कारण बन सकता है। किसानों से जुड़े मुद्दे पहले भी देश की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं और राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर इस विषय को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इस विवाद पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है और किसानों से जुड़े मुद्दों पर किस दिशा में नीतिगत निर्णय लिए जाते हैं।





