काशीपुर। मंगलवार को ब्लॉक सभागार में जिला काशीपुर के प्रभारी, कृषि एवं कृषक कल्याण, सैनिक कल्याण एवं ग्राम विकास मंत्री गणेश जोशी ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) VB-GRAMG के कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुये जनसंवाद किया इस दौरान उन्होने । सभागार में बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, किसान, युवा और ग्रामीण क्षेत्रों से आए लाभार्थी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी अवसरों को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की मंशा को स्पष्ट करना था। मंत्री गणेश जोशी जी ने अपने संबोधन में कहा कि VB-GRAMG केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक व्यापक मिशन है, जो गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस आधार तैयार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब गांवों में रोजगार, सम्मानजनक आजीविका और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी, और VB-GRAMG इसी सोच का प्रतिबिंब है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि, ग्राम विकास और आजीविका से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें मंत्री गणेश जोशी जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की सबसे बड़ी चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने VB-GRAMG को जमीन से जोड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस मिशन के माध्यम से कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि गांवों के युवाओं और महिलाओं को कौशल विकास, प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उन्हें रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि VB-GRAMG के तहत पारदर्शी व्यवस्था अपनाई गई है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। उनके अनुसार सरकार का लक्ष्य सिर्फ रोजगार सृजन नहीं, बल्कि टिकाऊ आजीविका के अवसर तैयार करना है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भाजपा काशीपुर जिला अध्यक्ष मंजोपल ने भी अपने विचार व्यक्त किए और VB-GRAMG को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को जमीन पर उतारने का काम VB-GRAMG के माध्यम से किया जा रहा है। मंजोपल ने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु हमेशा गरीब, किसान, मजदूर और ग्रामीण समाज रहा है, और यह मिशन उसी सोच का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि काशीपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिलेंगे। भाजपा जिला अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि इस मिशन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे।

विकास के संदर्भ में बोलते हुए मंजोपल ने कहा कि VB-GRAMG के जरिए केवल आर्थिक सशक्तिकरण ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव भी देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी सुधार होगा। मंजोपल ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का काम किया है। उनके अनुसार पहले योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन अब तकनीक और पारदर्शिता के जरिए वास्तविक लाभार्थियों को सीधे लाभ मिल रहा है। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपील की कि वे इस मिशन को केवल सरकारी योजना न समझें, बल्कि इसे अपने गांव और परिवार के भविष्य से जोड़कर देखें।
जनसंवाद के दौरान कृषि एवं ग्राम विकास मंत्री गणेश जोशी ने मनरेगा और VB-GRAMG को लेकर बड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा को कभी खत्म नहीं किया, बल्कि समय की जरूरत के अनुसार उसे नए रूप में ढाल दिया है। उन्होंने कहा कि अब मनरेगा केवल अस्थायी मजदूरी का साधन नहीं रहा, बल्कि “VB-GRAMG (Viksit Bharat – Gramin Mahatma Gandhi)” मॉडल के रूप में ग्रामीण भारत के स्थायी और समग्र विकास का मजबूत आधार बन चुका है। गणेश जोशी ने जोर देकर कहा कि पहले मनरेगा के तहत ऐसे काम होते थे जिनका लाभ सीमित समय तक ही दिखाई देता था, लेकिन अब इस योजना को इस तरह पुनः डिज़ाइन किया गया है कि गांवों को लंबे समय तक फायदा मिले। उन्होंने बताया कि अब मनरेगा के कार्यों से गांवों में पक्की सड़कें, मजबूत नालियां, तालाब और अमृत सरोवर, चेक डैम, खेतों की मेढ़बंदी, पशु शेड जैसी स्थायी संपत्तियां तैयार हो रही हैं, जिससे ग्रामीण ढांचा मजबूत हो रहा है और विकास जमीन पर साफ नजर आने लगा है।

गणेश जोशी ने कहा कि VB-GRAMG के तहत रोजगार की परिभाषा भी बदली है, क्योंकि अब यह योजना केवल 100 दिनों की मजदूरी तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्किल आधारित रोजगार को बढ़ावा दिया है, जिससे मजदूर अब केवल फावड़ा चलाने तक सीमित नहीं रहा। अब ग्रामीणों को राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, नर्सरी मैनेजमेंट, डेयरी और पशुपालन जैसे कार्यों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इससे मजदूर धीरे-धीरे कुशल कामगार में बदल रहा है और उसकी आय के अवसर भी बढ़ रहे हैं। मंत्री ने कहा कि यही बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, क्योंकि जब गांव में स्किल होगी, तो रोजगार के नए रास्ते अपने आप खुलेंगे।
जनसंवाद में यह भी स्पष्ट किया गया कि VB-GRAMG के माध्यम से मजदूरी को स्व-रोजगार से जोड़ा गया है। गणेश जोशी ने बताया कि अब मनरेगा को NRLM आजीविका मिशन और महिला स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है, जिससे मजदूरों को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। सरकार की ओर से सीड मनी, टूल किट, बैंक लिंकेज और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि मजदूर भविष्य में ठेकेदार या ग्रामीण उद्यमी बन सके। उन्होंने कहा कि यह सोच ही इस योजना को पहले से अलग बनाती है, क्योंकि अब मजदूर केवल दैनिक मजदूरी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि अपनी आजीविका का स्थायी साधन खुद तैयार कर सकेगा।
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए गणेश जोशी ने कहा कि VB-GRAMG में महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बताया कि महिला मजदूरी को प्राथमिकता दी जा रही है और महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधे काम दिए जा रहे हैं। सिलाई, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी, डेयरी यूनिट जैसे कार्यों से गांव की महिलाएं अब केवल मजदूर नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत बन रही हैं। मंत्री ने कहा कि जब महिलाओं की आय बढ़ेगी, तो पूरे परिवार और समाज की स्थिति मजबूत होगी। पारदर्शिता के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि VB-GRAMG में DBT के जरिए पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहा है। जॉब कार्ड और आधार लिंक होने से फर्जी मजदूरों और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है। उन्होंने साफ कहा कि अब पैसा वहीं पहुंचता है, जहां वास्तव में काम होता है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर रोक लगी है, बल्कि मजदूरों का सरकार पर भरोसा भी बढ़ा है।
गणेश जोशी ने बताया कि VB-GRAMG का एक बड़ा उद्देश्य गांवों से होने वाले मजबूरी के पलायन को रोकना है। उन्होंने कहा कि जब गांव में ही रोजगार, आय और कौशल के अवसर मिलेंगे, तो लोगों को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। यह योजना गांव में ही सम्मानजनक जीवन का रास्ता खोल रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब मनरेगा और VB-GRAMG का सीधा जुड़ाव कृषि से भी किया गया है। सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा सुधार, बागवानी और पशुपालन जैसे कार्यों में निवेश हो रहा है, जिससे किसान और मजदूर दोनों को एक साथ लाभ मिल रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि VB-GRAMG आने वाले समय में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाला साबित होगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर चर्चा करते हुए श्री गणेश जोशी जी ने कहा कि VB-GRAMG के तहत स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल का सही उपयोग कर गांवों में नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि कृषि आधारित उत्पाद, जैविक खेती, डेयरी और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराकर ग्रामीण उद्यमियों को मजबूत बना रही है। उनके अनुसार जब स्थानीय उत्पादों को पहचान और बाजार मिलेगा, तो ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) और मनरेगा से जुड़े सवालों पर बेहद स्पष्ट, तथ्यपरक और सधे हुए शब्दों में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में विजय राम जी को लेकर जनता से सीधा संवाद इसलिए किया गया, क्योंकि विपक्ष खासकर कांग्रेस लगातार यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है कि सरकार ने मनरेगा को समाप्त कर दिया है, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। मंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार ने इस योजना को कमजोर नहीं बल्कि और अधिक मजबूत किया है। जहां पहले सौ दिन के रोजगार की गारंटी थी, उसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। इतना ही नहीं, किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खेती के महत्वपूर्ण दिनों को अलग रखा गया है, ताकि किसान अपने खेतों का काम भी कर सकें और रोजगार से भी वंचित न हों। प्रशासनिक बजट को भी पहले की तुलना में बढ़ाकर छह से नौ प्रतिशत तक किया गया है, जिससे योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

मंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस के मित्र इस बात से परेशान हैं कि सच्चाई जनता के सामने आ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले योजना के तहत केवल सौ दिन का प्रावधान था, लेकिन अब सरकार ने न केवल रोजगार के दिनों में वृद्धि की है बल्कि कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता पर भी जोर दिया है। उन्होंने बताया कि बारिश वाले क्षेत्रों में अक्सर किसानों के खेतों की मेड़ें और रास्ते टूट जाते हैं, ऐसे में मनरेगा के तहत ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे खेती को भी सीधा लाभ मिले। मंत्री ने यह भी कहा कि पहले कई ऐसे कार्य थे जिनमें ग्राम प्रधान की भागीदारी नहीं होती थी, लेकिन अब उन्हें भी जिम्मेदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर निगरानी मजबूत हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।
योजना के नाम बदलने को लेकर उठे सवाल पर मंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में जवाहर रोजगार योजना शुरू की गई थी, जिसे बाद में समाप्त किया गया और उस समय कांग्रेस की ही सरकार थी। इसके बाद राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के नाम से इसे लागू किया गया और फिर महात्मा गांधी जी के नाम पर इसका नामकरण किया गया। मंत्री ने कहा कि समय-समय पर योजनाओं के नाम बदले गए हैं, लेकिन आज सरकार पर महात्मा गांधी जी के नाम को हटाने का आरोप लगाना पूरी तरह निराधार है। उन्होंने मीडिया से कहा कि केंद्रीय बजट में आज भी दो योजनाएं महात्मा गांधी जी के नाम पर चल रही हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार की नीयत पूरी तरह साफ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जन संवाद इसलिए किया गया ताकि खुद लाभार्थी जनता के सामने यह कह सके कि योजना मजबूत हुई है और उन्हें इसका लाभ पहले से ज्यादा मिल रहा है।
रोजगार के वास्तविक दिनों को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि पहले सौ दिन की योजना होने के बावजूद लोगों को औसतन पचास से पचपन दिन ही काम मिल पाता था, लेकिन अब सरकार ने व्यवस्था को सुधारते हुए यह सुनिश्चित किया है कि घोषित दिनों का लाभ वास्तव में जनता तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि प्रधानमंत्री द्वारा तय किए गए लक्ष्यों के अनुरूप लोगों को अधिकतम रोजगार मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरी भुगतान में देरी को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं और तय समयसीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे मजदूरों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि धामी सरकार में किसी के लिए भी कोई छूट नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले अक्सर छोटे लोगों पर कार्रवाई होती थी और बड़े लोग बच जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार ने आईएएस अधिकारियों तक के खिलाफ कार्रवाई की है, जो इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि यदि किसी के पास भ्रष्टाचार से जुड़ा कोई भी मामला हो तो वह सामने लाए, सरकार तत्काल कार्रवाई करेगी। मंत्री ने कहा कि अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि भ्रष्टाचार की रत्ती भर भी गुंजाइश नहीं होनी चाहिए, क्योंकि जनता अब जागरूक है और सब कुछ देख रही है।
उत्तराखंड में पलायन के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि रोजगार और आजीविका से जुड़ी योजनाएं ही पलायन रोकने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। उन्होंने बताया कि मनरेगा और उससे जुड़ी योजनाओं के साथ-साथ सीमांत क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। वाइब्रेंट विलेज जैसी योजनाओं के जरिए सीमावर्ती इलाकों में रोजगार, बुनियादी सुविधाएं और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं, जिससे लोगों को अपने गांव छोड़कर बाहर जाने की मजबूरी न रहे। मंत्री ने कहा कि आंकड़े खुद इस बात की गवाही देते हैं कि जिन क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं, वहां पलायन की गति धीमी हुई है।
बजट में उत्तराखंड के लिए विशेष प्रावधानों को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने संकेत दिए कि राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बजट घोषणाएं करना नहीं, बल्कि योजनाओं का वास्तविक लाभ गांव, किसान, मजदूर और युवा तक पहुंचाना है। कुल मिलाकर मंत्री की इस मीडिया बातचीत ने साफ कर दिया कि सरकार मनरेगा और उससे जुड़े अभियानों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जन संवाद के माध्यम से भ्रम नहीं बल्कि सच्चाई जनता के सामने लाने का प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा VB-GRAMG से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की गई, जिसमें प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, विपणन और तकनीकी सहयोग से संबंधित विवरण शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि कैसे ग्रामीण युवा और महिलाएं इस मिशन से जुड़कर स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। मंत्री श्री गणेश जोशी जी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें और समय-समय पर इसकी समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास तभी बनेगा जब योजनाओं का लाभ समय पर और बिना किसी बाधा के मिलेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था बनाई गई है, ताकि किसी भी समस्या का त्वरित समाधान हो सके।
कार्यक्रम के दौरान ब्लॉक सभागार काशीपुर राजनीतिक, प्रशासनिक और संगठनात्मक नेतृत्व की मजबूत उपस्थिति का साक्षी बना, जहाँ आपदा प्रबंधन के उपाध्यक्ष विनय रुहेला, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज पाल, विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, पीसीयू चेयरमैन राम मेहरोत्रा, राज्यमंत्री मनजीत राजू और ब्लॉक प्रमुख चंद्रप्रभा की सक्रिय मौजूदगी ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। इसके साथ ही प्रदेश प्रवक्ता गुरविंदर चंडोक, सांसद प्रतिनिधि विजय बॉबी, जिला प्रकोष्ठ संयोजक मुकेश चावला, जिला महामंत्री सुशील शर्मा, जिला महामंत्री अमित सिंह, मंडल अध्यक्ष अर्जुन सिंह और मंडल अध्यक्ष ब्रिजेश पाल की सहभागिता ने संगठनात्मक एकजुटता और कार्यक्रम की गंभीरता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। मंच पर अध्यक्ष प्रधान संघ जसपाल जस्सी, पार्षद सीमा सागर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग भी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनसरोकारों, विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण से जुड़ा एक व्यापक और प्रभावशाली मंच था, जहाँ विभिन्न स्तरों के नेतृत्व ने एक साथ मिलकर सहभागिता निभाई।





