काशीपुर। ग्राम पेगा में राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र उस समय बना, जब पूर्व प्रधान अरविंद सिंह के निवास पर एक कांग्रेस कि एक अहम रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें देश की मौजूदा राजनीतिक दिशा, सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिए जा रहे निर्णयों को लेकर गहन मंथन हुआ। बैठक में मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एक स्वर में यह आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार देशहित को पीछे रखकर अमेरिका जैसे देशों के दबाव में झुकती नजर आ रही है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा अपनाई जा रही नीतियां न केवल आम जनता के हितों के खिलाफ हैं, बल्कि इससे देश की संप्रभुता और आत्मसम्मान पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है। इस बैठक का उद्देश्य आने वाले समय में जनविरोधी फैसलों के खिलाफ संगठित संघर्ष की रणनीति तैयार करना रहा, ताकि जनता की आवाज को मजबूती के साथ सड़कों और लोकतांत्रिक मंचों तक पहुंचाया जा सके।
बैठक के दौरान उपस्थित नेताओं ने विशेष रूप से सरकार पर यह आरोप लगाया कि उसने देश के दीर्घकालिक हितों को दांव पर लगाकर अमेरिका के सामने ‘सरेंडर’ जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है। वक्ताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों, व्यापारिक नीतियों और कूटनीतिक फैसलों में पारदर्शिता का अभाव साफ दिखाई दे रहा है। उनका मानना था कि जिन नीतियों को राष्ट्रहित के नाम पर लागू किया जा रहा है, वे वास्तव में कुछ गिने-चुने कॉरपोरेट हितों को साधने का माध्यम बनती जा रही हैं। चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार राष्ट्रवाद की आड़ ले रही है। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि अब चुप बैठने का समय समाप्त हो चुका है और जनता को सच्चाई से अवगत कराते हुए आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा।
रणनीतिक बैठक में ।प्ब्ब् सदस्य अनुपम शर्मा की मौजूदगी को विशेष महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता सरकार की नीतियों से नाराज हैं और यह नाराजगी अब संगठित आंदोलन का रूप लेने जा रही है। उनके अनुसार केंद्र सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाल रहे हैं, जबकि विदेश नीति के नाम पर देश को कमजोर स्थिति में खड़ा किया जा रहा है। अनुपम शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का दायित्व है कि वह लोकतंत्र, संविधान और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए आगे आए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर जनता को जागरूक करें और यह बताएं कि सरकार की नीतियों का वास्तविक असर क्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के भविष्य की लड़ाई है।

इसी बैठक में काशीपुर कांग्रेस की महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने संगठनात्मक मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि संघर्ष तभी सफल होगा, जब हर कार्यकर्ता अपनी भूमिका को ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में महिलाओं, युवाओं और किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है। अलका पाल ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है और पार्टी ने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कुर्बानी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में जनता सरकार की नीतियों से त्रस्त है और सही नेतृत्व की तलाश में है। बैठक के दौरान उन्होंने आने वाले कार्यक्रमों, जनसभाओं और संवाद अभियानों की रूपरेखा भी साझा की, ताकि आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके।
पूर्व महानगर अध्यक्ष मुशर्रफ हुसैन ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि एक ओर विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। मुशर्रफ हुसैन ने कहा कि विदेश नीति के नाम पर लिए जा रहे फैसलों से देश की स्वायत्तता कमजोर हो रही है और इसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी को एकजुट होकर इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाना होगा। बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं से उन्होंने अनुशासन और निरंतर सक्रियता बनाए रखने की अपील की, ताकि आंदोलन केवल बयानबाजी तक सीमित न रहे।
चर्चा के क्रम में पूर्व प्रधान रियासत हुसैन ने ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का सबसे ज्यादा असर गांवों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और शिक्षा व स्वास्थ्य जैसी सेवाएं महंगी होती जा रही हैं। रियासत हुसैन ने कहा कि यदि सरकार सच में देशहित में काम कर रही होती, तो गांवों की हालत आज ऐसी नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम स्तर पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठा सकें।

बैठक में राकेश टोपीवाला, सतपाल, जसवंत सिंह और अख्तर अली जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने चर्चा को और मजबूती दी। इन नेताओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब कांग्रेस को आक्रामक रणनीति अपनानी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी आंदोलन जरूरी है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया, जनसंपर्क अभियानों और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से जनता तक सच्चाई पहुंचाई जानी चाहिए। सभी ने एकमत होकर कहा कि पार्टी के भीतर आपसी समन्वय और अनुशासन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि विरोध की आवाज बिखरे नहीं, बल्कि संगठित रूप में सामने आए।
बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि आने वाले दिनों में क्षेत्र स्तर पर बैठकें, जनसंवाद कार्यक्रम और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि वैचारिक भी है, जिसमें देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सर्वाेपरि है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार आलोचनाओं से बचने के लिए विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कांग्रेस इससे डरने वाली नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के बीच जाकर सरकार की नीतियों का सच उजागर किया जाएगा, ताकि लोग स्वयं तय कर सकें कि उनके हित में कौन खड़ा है। अंततः बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि जनविरोधी फैसलों के खिलाफ संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उपस्थित सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर यह भरोसा दिलाया कि वे लोकतंत्र, संविधान और देशहित की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। ग्राम पेगा में आयोजित यह बैठक आने वाले राजनीतिक आंदोलनों की भूमिका के रूप में देखी जा रही है, जिसने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है।





