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विराट हिंदू सम्मेलन से गूंजा सनातन स्वर, आस्था, एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रदर्शन

श्रद्धा, संस्कृति और संगठन शक्ति के संगम के रूप में काशीपुर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने संतों, युवाओं और मातृशक्ति की सहभागिता से सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का प्रभावी संदेश दिया।

काशीपुर। नगर में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने शहर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र में सनातन चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक एकता का स्पष्ट संदेश दिया, जहां ब्लूमिंग स्कूल के मैदान में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण बना कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को लेकर समाज में गहरी संवेदनशीलता और सक्रियता मौजूद है। सम्मेलन श्रद्धा, अनुशासन और गरिमा के वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, महिलाओं, युवाओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। पूरे आयोजन के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज को जोड़ने और सनातन संस्कृति की व्यापकता को रेखांकित करने का सशक्त मंच बन गया। आयोजन स्थल पर अनुशासित व्यवस्था, भक्ति से भरा माहौल और लोगों का उत्साह इस बात की गवाही दे रहा था कि सनातन परंपरा आज भी जनमानस के केंद्र में है।

प्रातःकाल कार्यक्रम की शुरुआत शनि मंदिर, दुर्गा कॉलोनी से निकाली गई भव्य कलश यात्रा से हुई, जिसने पूरे नगर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सिर पर कलश धारण किए भक्ति गीतों और जयघोष के साथ आगे बढ़ रही थीं, वहीं पुरुष और युवा वर्ग अनुशासन के साथ यात्रा में शामिल रहा। पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र से भी श्रद्धालुओं की बड़ी टोलियां इस यात्रा में जुड़ीं, जिससे इसका स्वरूप और अधिक विराट हो गया। यात्रा के मार्ग पर “जय सनातन”, “हर हर महादेव” और “श्रीराम की जय” जैसे नारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। जैसे ही कलश यात्रा ब्लूमिंग स्कूल के मैदान में पहुंची, वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ उसका स्वागत किया, जिससे पूरे परिसर में उत्सव का भाव दिखाई दिया।

सम्मेलन स्थल पर धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ, जिसमें यज्ञ, हवन, भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार प्रमुख रूप से शामिल रहे। श्रद्धालुओं ने अग्नि के समक्ष आहुति देकर बुद्धि, विवेक, ऐश्वर्य और समृद्धि की कामना की। मंत्रोच्चार की गूंज, धूप-दीप की सुगंध और भक्ति संगीत ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। “सच्चिदानंद भगवान की जय”, “सनातन धर्म की जय” और “श्रीराम-हनुमान की जय” जैसे नारों से सम्मेलन स्थल गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था और संतोष का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जिससे यह एहसास हुआ कि यह आयोजन समाज की आंतरिक चेतना को जागृत करने में सफल रहा।

मुख्य कार्यक्रम के दौरान जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 हिमालय योगी डॉ. वीरेंन्द्रानंद गिरी जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में सनातन संस्कृति की शाश्वतता और व्यापक मानवीय दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र व्यवस्था है, जो मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। महामंडलेश्वर ने समाज से आह्वान किया कि वह अपने मूल्यों और परंपराओं को पहचानते हुए एकजुट रहे, क्योंकि संगठित समाज ही किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। उनके उद्बोधन के दौरान उपस्थित जनसमूह ने बार-बार जयकारों के माध्यम से अपनी सहमति प्रकट की, जिससे सभा में ऊर्जा और उत्साह का संचार होता रहा।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित श्रीमान नारायण, जो प्रान्त धर्म जागरण प्रमुख हैं, ने सनातन धर्म की सामाजिक भूमिका पर विचार रखते हुए युवाओं को संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र और समाज का भविष्य उसकी युवा पीढ़ी से जुड़ा होता है, और यदि युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हैं तो समाज स्वतः मजबूत बनता है। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि यह यात्रा संघर्ष, त्याग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उनके अनुसार आज देश-विदेश में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को लेकर गहन अध्ययन और शोध हो रहे हैं, जो इसकी वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाते हैं।

मीडिया से बातचीत में महामंडलेश्वर स्वामी वीरेंद्रानंद गिरी महाराज ने विराट हिंदू सम्मेलन के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों का मकसद हिंदू समाज को संगठित करना और यह संदेश देना है कि सनातन परंपरा समय की हर कसौटी पर अडिग रही है। उन्होंने बताया कि जब इस तरह के सम्मेलन छोटे और मध्यम क्षेत्रों में आयोजित होते हैं, तो समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुंचती है और जनसहभागिता बढ़ती है। युवाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग पूरी तरह जागरूक है, भले ही वह मंच पर कम दिखाई दे, लेकिन व्यवस्थाओं और आयोजन की सफलता में उसकी सक्रिय भागीदारी रहती है। उन्होंने कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों का उदाहरण देते हुए युवा शक्ति के महत्व को रेखांकित किया।

महामंडलेश्वर ने धर्म को लेकर हो रही आलोचनाओं और कथित हमलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन संस्कृति को कमजोर करने के प्रयास पहले भी होते रहे हैं, लेकिन यह परंपरा हर बार और अधिक सशक्त होकर सामने आई है। उन्होंने कहा कि सनातन केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य का मार्गदर्शक है। सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मातृशक्ति और युवाओं की भागीदारी को समाज की मजबूती का आधार बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन्हीं के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।

काशीपुर के गुरु द्रोणाचार्य उपनगर की शिवालिक बस्ती में वार्ड संख्या 2 और वार्ड संख्या 33 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विराट हिंदू सम्मेलन में संघ के शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि विशेष रूप से चर्चा में रही। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें जूना अखाड़ा से संबद्ध हिमालय योगी महामंडलेश्वर डॉ. वीरेंद्रानंद गिरी सहित अन्य अतिथियों ने सहभागिता की। इस अवसर पर ब्लूमिंग स्कालर्स एकेडमी के छात्र-छात्राओं ने गणेश बंधन, पहाड़ी गीत “जय हो कुमाऊं”, “राम आयेंगे” जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों ने सम्मेलन को सांस्कृतिक रूप से और भी समृद्ध बना दिया।

हिंदू समाज की एकता पर जोर देते हुए महामंडलेश्वर श्रीगिरी जी ने अपने संबोधन में कहा कि जातियों में बंटे समाज को एक सूत्र में पिरोने के लिए संगठन और समाज दोनों की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि अखंड हिंदू समाज के निर्माण में मातृशक्ति और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्य वक्ता नारायण जी ने डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने अनेक कष्ट, संघर्ष और चुनौतियां सहकर यह मुकाम हासिल किया है। महिला वक्ता माधवी जी ने कुटुंब प्रबोधन पर अपने विचार रखते हुए पारिवारिक मूल्यों की मजबूती को सामाजिक समरसता की आधारशिला बताया।

समापन अवसर पर शांति पाठ के साथ समाज में सद्भाव, एकता और सकारात्मक चेतना फैलाने का संकल्प लिया गया। आयोजकों ने शांतिपूर्ण और सफल आयोजन के लिए सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया। विराट हिंदू सम्मेलन के संयोजक पार्षद संजय शर्मा और भाजपा नेता जयदीप ढौंढियाल की भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया। कार्यक्रम में पूर्व मेयर ऊषा चौधरी, आदित्य कोठारी, सुरेन्द्र सिंह जीना, कमला रिखाड़ी, जीतेन्द्र दत्त देवलाल, मनोज सती, प्रभाकर दुबे, चंद्र प्रकाश बिष्ट, ज्योतिर्मय बिष्ट, राज दीपिका मधुर, पार्षद दीपा पाठक सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और दायित्ववान कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सम्मेलन काशीपुर में सनातन चेतना, सामाजिक समरसता और हिंदू एकता का सशक्त संदेश देकर संपन्न हुआ।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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