काशीपुर। हिंदी दैनिक ‘सहर प्रजातंत्र’’ से बातचीत के दौरान एडवोकेट संजीव आकाश ने लॉ शिक्षा, वकालत और युवाओं के भविष्य से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। मौजूदा समय में जब युवा तेजी से बदलते करियर विकल्पों के बीच असमंजस में हैं, ऐसे दौर में उनका यह संवाद मार्गदर्शक और विचारोत्तेजक साबित होता है। एडवोकेट संजीव आकाश ने कानून को केवल एक पेशा मानने की सोच से आगे बढ़कर उसे समाज, संविधान और लोकतंत्र को दिशा देने वाला सशक्त माध्यम बताया। उनका मानना है कि वकालत केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का दायित्व भी है। बातचीत के दौरान उन्होंने युवाओं में लॉ कोर्स को लेकर बढ़ती रुचि, शिक्षा की गुणवत्ता, करियर की संभावनाओं, शुरुआती संघर्षों और बदलते न्यायिक परिदृश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के डिजिटल और प्रतिस्पर्धी युग में कानून की भूमिका और भी व्यापक हो गई है, जहां ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता और मूल्यों की समझ अनिवार्य है। प्रस्तुत बातचीत में पूछे गए प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने अपने अनुभव, व्यावहारिक दृष्टिकोण और दूरदर्शी सोच को साझा किया है, जो न केवल लॉ के छात्रों बल्कि हर जागरूक युवा के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक है।
प्रश्न 1: सबसे पहले आपसे जानना चाहेंगे, आज युवाओं में लॉ कोर्स को लेकर जो तेज़ी से रुचि बढ़ रही है, आप इसे किस नज़र से देखते हैं?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश कहते हैं कि युवाओं में लॉ कोर्स को लेकर बढ़ती रुचि को वे एक स्वस्थ और सकारात्मक संकेत मानते हैं। उनके अनुसार आज का युवा केवल सुरक्षित नौकरी तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह समाज, शासन व्यवस्था और न्याय प्रणाली को समझना चाहता है। लॉ की पढ़ाई युवाओं को अधिकार, कर्तव्य और संवैधानिक मूल्यों की गहरी समझ देती है। सोशल मीडिया, डिजिटल जागरूकता और बड़े न्यायिक फैसलों की सार्वजनिक चर्चा ने भी कानून के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। अब युवा यह महसूस कर रहा है कि कानून केवल कोर्ट तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासन, नीति निर्माण, मानवाधिकार, मीडिया और सामाजिक परिवर्तन से भी जुड़ा है। यही कारण है कि लॉ कोर्स आज युवाओं को एक प्रभावशाली और जिम्मेदारीपूर्ण रास्ता दिखा रहा है।
प्रश्न 2: क्या लॉ आज के समय में एक स्थायी और सम्मानजनक करियर विकल्प है, या सिर्फ एक ट्रेंड बनकर रह गया है?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश बेहद स्पष्ट और आत्मविश्वास भरे शब्दों में कहते हैं कि लॉ को किसी अस्थायी फैशन या चलन के रूप में देखना बड़ी भूल होगी। उनके अनुसार कानून एक ऐसा करियर है जिसकी आवश्यकता हर युग में रही है और भविष्य में भी बनी रहेगी, क्योंकि किसी भी सभ्य समाज की नींव नियम, न्याय और संविधान पर टिकी होती है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में अधिकार और कर्तव्य का संतुलन रहेगा, तब तक कानून की भूमिका कभी कमजोर नहीं पड़ सकती। वकालत में सफलता भले ही तुरंत न मिले, लेकिन यह पेशा धैर्य और निरंतर मेहनत करने वालों को लंबे समय तक सम्मान, पहचान और स्थायित्व प्रदान करता है। एडवोकेट संजीव आकाश के मुताबिक जो युवा ईमानदारी, प्रतिबद्धता और सीखने की ललक के साथ इस क्षेत्र में टिके रहते हैं, वे समय के साथ न केवल अपनी मजबूत पहचान बनाते हैं, बल्कि समाज में भरोसेमंद स्थान भी हासिल करते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लॉ केवल आर्थिक कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक प्रतिष्ठा, आत्मसंतोष और न्याय के पक्ष में खड़े होने का अवसर देता है, जो इसे अन्य करियर विकल्पों से कहीं अधिक विशिष्ट और गरिमामय बनाता है।
प्रश्न 3: लॉ कोर्स में एडमिशन लेने से पहले छात्रों को किन ज़रूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि लॉ कोर्स का चयन करने से पहले छात्रों को गहन आत्ममंथन करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि कानून की पढ़ाई केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक बौद्धिक और व्यावसायिक प्रतिबद्धता है। उनके अनुसार इस क्षेत्र में वही छात्र सफल हो पाते हैं, जिनमें निरंतर अध्ययन करने की आदत, तर्कपूर्ण सोच और धैर्य रखने की क्षमता होती है। कानून ऐसा विषय है जिसमें किताबों के साथ-साथ मामलों की समझ, फैसलों का विश्लेषण और परिस्थितियों के अनुसार तर्क प्रस्तुत करने का कौशल भी जरूरी होता है। एडवोकेट संजीव आकाश कहते हैं कि छात्र को पढ़ने, स्पष्ट और प्रभावी लेखन करने तथा आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने में रुचि होनी चाहिए, क्योंकि वकालत का आधार ही संवाद और प्रस्तुति है। इसके साथ ही उन्होंने कॉलेज चयन को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि केवल नामी या महंगे संस्थान के पीछे भागने के बजाय यह देखना अधिक जरूरी है कि वहां अनुभवी शिक्षक, मूट कोर्ट की नियमित गतिविधियां, अच्छी इंटर्नशिप के अवसर और समृद्ध लाइब्रेरी जैसी व्यावहारिक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। ऐसे ही संस्थान छात्रों को वास्तविक कानूनी दुनिया के लिए तैयार कर पाते हैं।
प्रश्न 4: देश में लॉ कॉलेजों और प्राइवेट संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है, क्या इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है?
उत्तर:एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि देश में लॉ कॉलेजों और निजी संस्थानों की बढ़ती संख्या को केवल नकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इससे छात्रों को अधिक अवसर और विकल्प मिलते हैं। हालांकि, वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि संख्या के साथ-साथ गुणवत्ता पर सख्त और निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है। उनके अनुसार वर्तमान समय में कई निजी लॉ संस्थान शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय की तरह संचालित कर रहे हैं, जिसका सीधा असर पढ़ाई के स्तर पर पड़ रहा है। जब प्राथमिकता केवल फीस और दाखिलों की संख्या बढ़ाने पर होती है, तो अकादमिक अनुशासन और गंभीरता कमजोर हो जाती है। एडवोकेट संजीव आकाश कहते हैं कि एक अच्छी लॉ शिक्षा के लिए अनुभवी और समर्पित फैकल्टी, नियमित कोर्ट एक्सपोज़र, व्यावहारिक प्रशिक्षण और मजबूत शैक्षणिक वातावरण अनिवार्य है। छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक मामलों और न्यायिक प्रक्रियाओं से भी परिचित कराया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लॉ शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता किया गया, तो इसका असर केवल छात्रों के करियर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की पूरी न्याय व्यवस्था पर पड़ेगा, जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रश्न 5: लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद आज करियर के कौन-कौन से नए विकल्प युवाओं के सामने खुले हैं?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश के अनुसार आज का दौर लॉ ग्रेजुएट्स के लिए अभूतपूर्व संभावनाओं का समय है, जहाँ करियर के विकल्प पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और विविध हो चुके हैं। उनका कहना है कि अब कानून की पढ़ाई केवल पारंपरिक वकालत तक सीमित नहीं रही है। बदलती आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक संरचना के साथ कई नए क्षेत्र उभरकर सामने आए हैं, जिन्होंने लॉ छात्रों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। कॉरपोरेट लॉ में कंपनियों को कानूनी सलाह देना, आर्बिट्रेशन और मेडिएशन के माध्यम से विवादों का समाधान करना, तथा पॉलिसी रिसर्च के जरिए सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए नीतियां तैयार करना आज तेजी से लोकप्रिय विकल्प बन रहे हैं। इसके अलावा ज्यूडिशियल सर्विसेज़ आज भी प्रतिष्ठा और स्थिरता का मजबूत माध्यम हैं। एडवोकेट संजीव आकाश विशेष रूप से साइबर लॉ की बढ़ती भूमिका की ओर इशारा करते हैं, जहां डिजिटल अपराध, डेटा सुरक्षा और तकनीकी विवादों के विशेषज्ञों की भारी मांग है। लीगल जर्नलिज़्म और लीगल कंसल्टेंसी जैसे क्षेत्र भी उन युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं, जिनमें लेखन, विश्लेषण और सलाह देने की क्षमता है। यही विविधता लॉ को एक बहुआयामी, रोचक और भविष्य-सुरक्षित करियर विकल्प बनाती है।

प्रश्न 6: अक्सर कहा जाता है कि वकालत में सफलता जल्दी नहीं मिलती, क्या नए वकीलों को लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश पूरी ईमानदारी से स्वीकार करते हैं कि वकालत ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहाँ रातों-रात सफलता की उम्मीद की जाए। उनके अनुसार यह पेशा धैर्य, निरंतर सीख और लंबे संघर्ष की मांग करता है, और नए वकीलों को इस सच्चाई को शुरुआत से ही स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआती वर्षों में आय की अनिश्चितता, सीमित पहचान और काम की तलाश जैसी चुनौतियाँ सामान्य हैं, लेकिन यही दौर व्यक्ति को पेशेवर रूप से मजबूत बनाता है। एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि वकालत अनुभव से निखरती है, क्योंकि हर केस, हर बहस और हर सुनवाई वकील को कुछ नया सिखाती है। समय के साथ कानूनी समझ गहरी होती जाती है और आत्मविश्वास अपने आप विकसित होता है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे जल्दबाजी में निराश न हों और सीखने की प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी से अपनाएँ। जो वकील कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, अनुशासन और नैतिकता के साथ टिके रहते हैं, वही आगे चलकर मजबूत पहचान और सम्मान अर्जित करते हैं। उनके अनुसार वकालत केवल पेशा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक यात्रा है, जो धैर्य रखने वालों को स्थायित्व, सम्मान और संतोष प्रदान करती है।
प्रश्न 7: एक नए वकील को प्रैक्टिस के शुरुआती दौर में किन सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश के अनुसार वकालत के शुरुआती दौर में कदम रखने वाले युवाओं को कई कठिन वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है, जिन्हें समझे बिना इस पेशे में टिके रहना आसान नहीं होता। वे बताते हैं कि सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक अस्थिरता होती है, क्योंकि शुरुआती वर्षों में नियमित आमदनी नहीं होती और खर्च लगातार बने रहते हैं। इसके साथ ही पहचान की कमी भी नए वकीलों के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है, क्योंकि अदालतों में अनुभव और नाम के आधार पर ही काम मिलता है। एडवोकेट संजीव आकाश यह भी मानते हैं कि सही मार्गदर्शन का अभाव इस संघर्ष को और कठिन बना देता है, क्योंकि हर युवा वकील को अनुभवी मेंटर या सीनियर का सहयोग आसानी से नहीं मिल पाता। हालांकि वे इस बात पर जोर देते हैं कि यही चुनौतियाँ भविष्य की नींव भी बनती हैं। जो युवा इन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं, लगातार सीखने की कोशिश करते हैं और हर अवसर को अनुभव के रूप में लेते हैं, वही आगे चलकर मजबूत और आत्मनिर्भर वकील बनते हैं। उनके अनुसार कठिन शुरुआती दौर व्यक्ति को न केवल पेशेवर रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी परिपक्व बनाता है और लंबे समय में यही संघर्ष सफलता का आधार बनता है।
प्रश्न 8: क्या मौजूदा लॉ सिलेबस देश की वर्तमान न्यायिक ज़रूरतों को पूरा कर पा रहा है?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश का स्पष्ट मत है कि वर्तमान समय की जरूरतों को देखते हुए लॉ सिलेबस में व्यापक और व्यावहारिक सुधार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कानून की पढ़ाई अभी भी काफी हद तक पारंपरिक ढांचे पर आधारित है, जबकि समाज, तकनीक और न्यायिक प्रक्रियाएं तेजी से बदल रही हैं। डिजिटल युग में साइबर अपराध, डेटा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और ई-कॉमर्स जैसे विषयों ने कानून के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिनका समुचित स्थान सिलेबस में होना आवश्यक है। एडवोकेट संजीव आकाश मानते हैं कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से वास्तविक कानूनी परिस्थितियों से भी परिचित कराना चाहिए। मूट कोर्ट, केस स्टडी, कोर्ट विज़िट और इंटर्नशिप जैसी गतिविधियों को पढ़ाई का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार जब तक तकनीक, समकालीन कानून और व्यवहारिक कौशल को शिक्षा से नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक छात्र वास्तविक चुनौतियों का सामना करने में पीछे रह सकते हैं। एक मजबूत और अद्यतन सिलेबस ही भविष्य के सक्षम, जिम्मेदार और आत्मविश्वासी वकीलों की नींव रख सकता है।
प्रश्न 9: क्या मौजूदा लॉ सिलेबस देश की वर्तमान न्यायिक ज़रूरतों को पूरा कर पा रहा है?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि आने वाले समय में साइबर लॉ कानून के सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली क्षेत्रों में से एक बनने जा रहा है। उनके अनुसार जैसे-जैसे देश और दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, वैसे-वैसे डिजिटल अपराधों, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। ऐसी स्थिति में साइबर कानून की भूमिका और जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। एडवोकेट संजीव आकाश बताते हैं कि व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध, साइबर फ्रॉड, हैकिंग, डिजिटल भुगतान और तकनीकी विवाद आने वाले वर्षों में न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौतियां होंगी। इन सभी मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए साइबर लॉ में विशेषज्ञता रखने वाले वकीलों की मांग तेजी से बढ़ेगी। उनका कहना है कि यह क्षेत्र न केवल रोजगार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को सुरक्षित डिजिटल वातावरण देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि जो छात्र तकनीक और कानून दोनों में रुचि रखते हैं, उनके लिए साइबर लॉ एक उज्ज्वल और भविष्य-सुरक्षित करियर विकल्प साबित हो सकता है।
प्रश्न 10: क्या लॉ की पढ़ाई में नैतिकता, संविधान और सामाजिक ज़िम्मेदारी पर पर्याप्त ज़ोर दिया जा रहा है?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि लॉ शिक्षा की वास्तविक आत्मा नैतिकता, संविधान और सामाजिक जिम्मेदारी में निहित है। उनके अनुसार यदि कानून की पढ़ाई में केवल धाराओं, अधिनियमों और प्रक्रियाओं पर ही जोर दिया जाए, लेकिन मूल्यों की उपेक्षा की जाए, तो ऐसी शिक्षा अधूरी रह जाती है। वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि बिना नैतिकता के कानून केवल शब्दों और नियमों का एक यांत्रिक ढांचा बनकर रह जाता है, जिसमें न्याय की भावना का अभाव होता है। एडवोकेट संजीव आकाश के मुताबिक संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा का आधार है, जिसे समझना हर कानून के छात्र के लिए अनिवार्य है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वकील की भूमिका केवल अपने मुवक्किल तक सीमित नहीं होती, बल्कि समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। जब कानून की शिक्षा नैतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से जुड़ती है, तभी न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास मजबूत होता है। उनके अनुसार ऐसे ही वकील समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, जो कानून को सत्ता का नहीं, बल्कि न्याय और सेवा का माध्यम बनाते हैं।

प्रश्न 11: ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों के लिए लॉ के क्षेत्र में अवसर कितने समान हैं?
उत्तर: एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों से आने वाले छात्रों के लिए लॉ के क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है, लेकिन इन अवसरों तक पहुंचने के लिए उन्हें अतिरिक्त मेहनत और सही दिशा में मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। वे बताते हैं कि बड़े शहरों की तुलना में छोटे स्थानों के छात्रों को संसाधनों, अनुभवी मार्गदर्शकों और नेटवर्क की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे शुरुआत में आत्मविश्वास डगमगा सकता है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि बदलते समय के साथ तकनीक ने इस दूरी को काफी हद तक कम कर दिया है। आज ऑनलाइन क्लासेज़, वेबिनार, डिजिटल लाइब्रेरी, ई-कोर्ट्स और कानूनी पोर्टल्स के माध्यम से ग्रामीण छात्र भी वही जानकारी और प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं, जो पहले केवल महानगरों तक सीमित था। एडवोकेट संजीव आकाश के अनुसार यदि छोटे शहरों के छात्र अनुशासन, निरंतर अध्ययन और सीखने की ललक बनाए रखें, तो वे किसी से कम नहीं हैं। सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास के साथ वे न केवल वकालत में सफल हो सकते हैं, बल्कि न्यायिक सेवाओं, कॉरपोरेट सेक्टर और अन्य कानूनी क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
प्रश्न 12: अंत में, आप उन युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे जो लॉ कोर्स करने का मन बना रहे हैं?
उत्तर:एडवोकेट संजीव आकाश युवाओं को संदेश देते हुए कहते हैं कि लॉ कोर्स को केवल एक करियर विकल्प के रूप में देखना इसकी व्यापक भूमिका को सीमित करना है। उनके अनुसार कानून की पढ़ाई अपने आप में समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि वकील न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। वे बताते हैं कि जो युवा इस क्षेत्र में आते हैं, उन्हें केवल सफलता या आर्थिक लाभ का लक्ष्य नहीं रखना चाहिए, बल्कि न्याय, सत्य और संविधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। एडवोकेट संजीव आकाश का मानना है कि वकालत धैर्य की परीक्षा लेने वाला पेशा है, जहां तुरंत परिणाम नहीं मिलते, लेकिन निरंतर मेहनत और ईमानदारी अंततः व्यक्ति को मजबूत बनाती है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि यदि उनके भीतर सेवा भाव है, अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की इच्छा है, तो कानून का रास्ता उनके लिए बिल्कुल उपयुक्त है। यह क्षेत्र उन्हें न केवल पहचान और सम्मान देता है, बल्कि आत्मसंतोष और समाज में योगदान देने का अवसर भी प्रदान करता है, जो किसी भी करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।





