- तीन मेगा प्रोजेक्ट्स से शहर के विकास को मिलेगी नई दिशा और नई पहचान
- वेंडिंग जोन से लेकर गिरीताल तक शहर बदलेगा सुनियोजित विकास के मॉडल पर
- नगर निगम की दूरदर्शी योजनाओं से आधुनिक शहर बनने की ओर बड़ा कदम
- जनहित और विकास के संतुलन से आकार ले रहे हैं शहर के ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स
- रोजगार, पर्यावरण और आस्था का संगम बनेगा नए विकास प्रोजेक्ट्स का आधार
काशीपुर। नगर निगम सभागार में आयोजित विशेष कार्यक्रम के वातावरण में उस समय अलग ही ऊर्जा महसूस की गई, जब काशीपुर के भविष्य को आकार देने वाली योजनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। सभागार में मौजूद जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक संगठनों के सदस्य और आम नागरिक इस बात को महसूस कर पा रहे थे कि शहर केवल तात्कालिक जरूरतों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आने वाले कई दशकों के लिए ठोस तैयारी कर चुका है। जैसे-जैसे प्रेजेंटेशन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे यह स्पष्ट होता गया कि काशीपुर एक बड़े परिवर्तन के मुहाने पर खड़ा है। कार्यक्रम के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए महापौर दीपक बाली ने कहा कि यह दिन किसी सामान्य औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि काशीपुर के विकास इतिहास में एक ऐसा अध्याय है, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि इन तीनों योजनाओं की नींव किसी एक व्यक्ति की सोच पर नहीं, बल्कि नगर निगम की टीम, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और जागरूक नागरिकों की सामूहिक मेहनत पर टिकी है, जिससे इन्हें धरातल पर उतारना संभव हो सकेगा।
सभागार से बाहर निकलते ही मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए महापौर दीपक बाली ने नगर निगम की कार्यशैली और सोच को विस्तार से सामने रखा। उन्होंने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य केवल इमारतें खड़ी करना या योजनाओं की घोषणा कर देना नहीं है, बल्कि काशीपुर के हर नागरिक के जीवन में वास्तविक और स्थायी बदलाव लाना है। उनके अनुसार, विकास का सही अर्थ तभी निकलता है जब रोजगार के अवसर बढ़ें, नागरिक सुविधाएं मजबूत हों और शहर का सौंदर्य व अनुशासन एक साथ आगे बढ़े। इसी दृष्टिकोण के तहत तीनों प्रोजेक्ट्स को आपस में इस तरह जोड़ा गया है कि उनका संयुक्त प्रभाव शहर के हर वर्ग तक पहुंचे। महापौर ने यह भी रेखांकित किया कि पारदर्शिता, दीर्घकालिक उपयोगिता और आत्मनिर्भरता इन योजनाओं की आत्मा है, ताकि भविष्य में नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और काशीपुर विकास की राह पर लगातार आगे बढ़ता रहे।
प्रेजेंटेशन के दौरान जिन योजनाओं पर विशेष ध्यान आकर्षित हुआ, उनमें सबसे पहले शहर में आधुनिक वेंडिंग जोन के निर्माण की परिकल्पना सामने आई। महापौर दीपक बाली ने बताया कि काशीपुर के छोटे व्यापारी, ठेला-फड़ और रेहड़ी लगाने वाले वर्षों से अव्यवस्था, असुरक्षा और कई बार अनावश्यक उत्पीड़न का सामना करते आ रहे हैं। नगर निगम ने इस समस्या को केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा है। इसी सोच के साथ सुव्यवस्थित वेंडिंग जोन विकसित करने का निर्णय लिया गया है, जहां छोटे व्यापारियों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराया जाएगा। इन जोनों से न केवल व्यापारियों की आमदनी और आत्मसम्मान बढ़ेगा, बल्कि सड़कों पर लगने वाले अतिक्रमण से भी शहर को राहत मिलेगी और यातायात व्यवस्था सुचारु होगी।
शहर की जमीनी समस्याओं पर बात करते हुए महापौर ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उससे उत्पन्न चुनौतियों को भी गंभीरता से सामने रखा। उन्होंने बताया कि नगर निगम द्वारा वर्तमान में एबीसी सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां आवारा कुत्तों का टीकाकरण और ऑपरेशन कर उन्हें पांच से सात दिनों तक देखभाल में रखा जाता है। इसके बावजूद कई इलाकों में समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाई है और नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने एक अत्याधुनिक डॉग शेल्टर होम के निर्माण का फैसला किया है, जो इस समस्या का मानवीय, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करेगा और पशु कल्याण की दिशा में काशीपुर को नई पहचान दिलाएगा।
डॉग शेल्टर होम की विस्तृत योजना पर प्रकाश डालते हुए महापौर दीपक बाली ने बताया कि लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र देश के बेहतर डॉग शेल्टरों में शामिल किया जाएगा। यहां आवारा कुत्तों के इलाज, टीकाकरण, देखभाल और संरक्षण की समुचित व्यवस्था होगी। साथ ही पालतू कुत्तों के लिए भी आधुनिक अस्पताल की सुविधा विकसित की जाएगी, जिससे शहरवासियों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। महापौर ने कहा कि नगर निगम पशु कल्याण को मानव कल्याण जितनी ही गंभीरता से लेता है, क्योंकि एक संवेदनशील समाज की पहचान इसी से होती है। इस पहल से जहां नागरिकों को राहत मिलेगी, वहीं काशीपुर पशु संरक्षण के क्षेत्र में उदाहरण बनकर उभरेगा।
काशीपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े गिरीताल परियोजना पर चर्चा के दौरान महापौर दीपक बाली का आत्मविश्वास और भावनात्मक जुड़ाव साफ नजर आया। उन्होंने कहा कि गिरीताल केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि शहर की आत्मा और विरासत का प्रतीक है। इसे आधुनिक स्वरूप देने की योजना धार्मिक भावनाओं और पौराणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। मंदिरों की आभा को यथावत रखते हुए उनके सौंदर्यीकरण और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं को इस तरह जोड़ा जाएगा कि आस्था, पर्यटन और नागरिक उपयोग का संतुलित समन्वय दिखाई दे और गिरीताल काशीपुर का प्रमुख आकर्षण केंद्र बन सके।
गिरीताल परियोजना की डीपीआर अब 31 करोड़ रुपये से अधिक की हो चुकी है, जो इसकी व्यापकता और दूरदर्शी सोच को दर्शाती है। पूरे क्षेत्र को आठ जोन में विभाजित कर विकसित करने की योजना है, ताकि हर सुविधा सुव्यवस्थित ढंग से उपलब्ध हो सके। विशाल पार्किंग एरिया, आकर्षक वॉटर फाउंटेन, जॉगिंग और साइकिलिंग ट्रैक, ओपन एयर थिएटर, झील के किनारे सैर पथ और जंगल ट्रैक जैसी सुविधाएं इसे इको-टूरिज्म का महत्वपूर्ण केंद्र बनाएंगी। इसके अतिरिक्त लाइब्रेरी, जिम, योग केंद्र, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, रेस्टोरेंट, प्राइवेट विलाज और सखीहाट जैसी व्यवस्थाएं इसे एक संपूर्ण पारिवारिक स्थल का रूप देंगी।
रखरखाव को लेकर उठने वाली शंकाओं पर महापौर ने स्पष्ट किया कि नगर निगम ने इस पहलू पर पहले से गंभीरता से काम किया है। उन्होंने बताया कि गिरीताल सहित सभी परियोजनाओं में ऑपरेशन और मेंटेनेंस को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रावधान किए गए हैं। कैफेटेरिया, पार्किंग शुल्क, थिएटर और अन्य सुविधाओं से होने वाली आय के माध्यम से पूरे परिसर का रखरखाव किया जाएगा, जिससे नगर निगम पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने इसे सेल्फ-सस्टेनेबल मॉडल बताते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी तरह की योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि विकास निरंतर और संतुलित बना रहे।
एनओसी से जुड़े विषय पर महापौर दीपक बाली ने बताया कि सर्वेक्षण समिति की रिपोर्ट के साथ हिंदी प्रेम सभा की सहमति आवश्यक है। इस संबंध में पहले भी हिंदी प्रेम सभा के अधिकारियों के साथ कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन औपचारिक एनओसी अब तक प्राप्त नहीं हो पाई है। महापौर ने मंच और मीडिया दोनों के माध्यम से हिंदी प्रेम सभा से जनहित में सहयोग की अपील की। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि हिंदी प्रेम सभा की भूमिका का सम्मान किया जाएगा और उसका नाम परियोजना में सम्मानपूर्वक अंकित किया जाएगा, ताकि वर्षों से किए गए संरक्षण और योगदान को उचित मान्यता मिल सके।
वेंडिंग जोन परियोजना की व्यावहारिक जानकारी साझा करते हुए महापौर ने बताया कि फिलहाल शहर में पांच वेंडिंग जोन विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें सीतापुर अस्पताल के पास, गिरीताल रोड, हीरो होंडा शोरूम के समीप और दुर्गा कॉलोनी क्षेत्र जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन जोनों में लगभग 250 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है, जिस पर करीब 7 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन जोनों का उद्देश्य ठेले वालों को उत्पीड़न से बचाना, उनके कारोबार को स्थायित्व देना और उन्हें सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है। भविष्य में पांच और वेंडिंग जोन बनाने की योजना भी है।
डॉग शेल्टर हाउस के स्थान को लेकर महापौर ने बताया कि इसे शहर से लगभग एक किलोमीटर बाहर विकसित किया जाएगा और यह भारत का पहला इतना आधुनिक और सुव्यवस्थित सेंटर हाउस होगा। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि पांडिचेरी के बाद काशीपुर देश का दूसरा ऐसा शहर बन गया है, जहां रात के तीन बजे तक भी नियमित सफाई कार्य किया जाता है। इस उपलब्धि के पीछे नगर निगम के कर्मचारियों के साथ-साथ शहरवासियों का सहयोग भी अहम है। महापौर ने नागरिकों से स्वच्छता और विकास के इस अभियान में निरंतर साथ देने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान विधायक त्रिलोक सिंह चीमा और उप जिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह ने भी योजनाओं की खुलकर सराहना की। विधायक त्रिलोक सिंह चीमा ने कहा कि आज की प्रस्तुति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि काशीपुर वास्तव में बदलाव की राह पर चल पड़ा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि इसी तरह योजनाबद्ध और ईमानदार प्रयास जारी रहे, तो काशीपुर आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के अग्रणी शहरों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा। कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि नगर निगम, जनप्रतिनिधि और नागरिक मिलकर काशीपुर को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए पूरी तरह संकल्पबद्ध हैं।





