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पूरन पांडे और मनु अग्रवाल बोले, बजट 2026 में टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत, मध्यम वर्ग खुश

आयकर से लेकर TDS और TCS तक किए गए बदलावों ने वेतनभोगियों, छात्रों, यात्रियों और छोटे व्यापारियों को राहत दी, विशेषज्ञों के अनुसार नई कर व्यवस्था अनुपालन आसान करेगी और करदाताओं पर बोझ कम होगा।

रामनगर।केंद्रीय बजट 2026 के बाद कर व्यवस्था को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसने मध्यम वर्ग, नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों, विद्यार्थियों और विदेश यात्रा करने वालों के बीच राहत की एक नई उम्मीद जगाई है। बजट में आयकर से लेकर TDS और TCS तक कई ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर आम करदाता की जेब और उसकी कर योजना पर पड़ने वाला है। टैक्स एडवोकेट पूरन पांडे और एडवोकेट मनु अग्रवाल ने बजट के बाद विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस बार सरकार का रुख करदाताओं को डराने के बजाय प्रक्रिया को सरल बनाने और अनुपालन को आसान करने का दिखाई देता है। विशेष रूप से ₹12.75 लाख तक की आय को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी है, क्योंकि लंबे समय से यह वर्ग महंगाई और कर बोझ के दोहरे दबाव से जूझ रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से न केवल खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था में मांग को भी गति मिलने की संभावना है।

बजट में आयकर व्यवस्था को लेकर किए गए बदलावों पर बात करते हुए टैक्स बार के अध्यक्ष एडवोकेट पूरन पांडे ने कहा कि सरकार ने इस बार कर प्रणाली को ज्यादा व्यावहारिक और करदाता-हितैषी बनाने की कोशिश की है। ₹12.75 लाख तक की आय को कर मुक्त करने का कदम उन लाखों वेतनभोगी और स्वरोज़गार करने वाले लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक टैक्स स्लैब के कारण मानसिक दबाव में रहते थे। उन्होंने बताया कि हालांकि आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन छूट और राहत के जरिए कर बोझ को संतुलित किया गया है। इससे करदाताओं को अपनी आय की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा। एडवोकेट पूरन पांडे के अनुसार सरकार का उद्देश्य कर संग्रह बढ़ाने के साथ-साथ करदाताओं में विश्वास कायम करना भी है, ताकि लोग स्वेच्छा से और सही जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करें।

विदेश या घरेलू टूर पैकेज पर TCS को लेकर की गई घोषणा को भी बजट 2026 की एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। टैक्स बार के अध्यक्ष एडवोकेट पूरन पांडे ने बताया कि अब टूर पैकेज बुक करने पर लगने वाला Tax Collected at Source घटाकर केवल 2 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले यह दर अधिक होने के कारण यात्रियों को एडवांस में भारी टैक्स देना पड़ता था, जिससे यात्रा की कुल लागत काफी बढ़ जाती थी। नई व्यवस्था के तहत यात्रियों को अब कम टैक्स देना होगा, जिससे पर्यटन और ट्रैवल इंडस्ट्री को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि यह फैसला खासतौर पर उन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए फायदेमंद होगा, जो साल में एक बार परिवार के साथ यात्रा की योजना बनाते हैं, लेकिन टैक्स के कारण पीछे हट जाते थे।

शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने LRS यानी Liberalised Remittance Scheme के तहत TCS में भी राहत दी है। टैक्स बार के उपसचिव एडवोकेट मनु अग्रवाल ने बताया कि अब विदेश में पढ़ाई और चिकित्सा उपचार के लिए भेजी जाने वाली राशि पर TCS की दर घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। पहले इस पर ज्यादा टैक्स लगने के कारण कई परिवारों को शुरुआती चरण में ही बड़ी रकम जमा करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था से उन अभिभावकों को राहत मिलेगी, जो बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए विदेश पैसा भेजते हैं या किसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए बाहर उपचार कराना पड़ता है। एडवोकेट मनु अग्रवाल के अनुसार यह फैसला न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अवसरों तक पहुंच को भी आसान बनाएगा।

आयकर रिटर्न को संशोधित करने की समयसीमा बढ़ाने का निर्णय भी करदाताओं के लिए एक अहम राहत माना जा रहा है। हाईकोर्ट अधिवक्ता पूरन पांडे ने बताया कि अब करदाता 31 मार्च तक अपना Revised Return दाखिल कर सकेंगे। पहले गलतियों को सुधारने की अवधि सीमित होने के कारण कई लोग परेशान रहते थे और अनजाने में हुई त्रुटियों के लिए भी उन्हें नोटिस का सामना करना पड़ता था। अब अधिक समय मिलने से करदाता बिना घबराहट के अपनी गलतियों को सुधार सकेंगे। हालांकि इसके साथ एक नाममात्र का अतिरिक्त शुल्क भी देना होगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह शुल्क उस मानसिक राहत के मुकाबले बहुत कम है, जो अतिरिक्त समय मिलने से करदाताओं को मिलेगी। यह बदलाव खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो स्वयं रिटर्न भरते हैं और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण गलती कर बैठते हैं।

मैनपावर सप्लाई से जुड़े मामलों में TDS को लेकर लंबे समय से चला आ रहा भ्रम भी बजट 2026 में दूर किया गया है। हाईकोर्ट अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मैनपावर सप्लाई के मामलों में TDS धारा 194C के तहत ही कटेगा, जिसकी दर 1 प्रतिशत या 2 प्रतिशत होगी। इससे पहले यह स्पष्ट नहीं था कि इसे प्रोफेशनल सर्विस माना जाए या कॉन्ट्रैक्ट सर्विस, जिसके कारण कई मामलों में विवाद खड़े हो जाते थे। नई स्पष्टता से सिक्योरिटी गार्ड, हाउसकीपिंग, लेबर सप्लाई और इसी तरह की सेवाएं देने वाली एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी। एडवोकेट मनु अग्रवाल के अनुसार इससे अनुपालन आसान होगा और अनावश्यक कानूनी विवादों में भी कमी आएगी।

NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए भी बजट 2026 में नियमों को सरल बनाया गया है। हाईकोर्ट अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने बताया कि अब NRI से संपत्ति खरीदते समय TDS काटने के लिए TAN लेना अनिवार्य नहीं होगा। केवल PAN के माध्यम से भी TDS जमा किया जा सकेगा। इससे संपत्ति खरीद की प्रक्रिया आसान होगी और आम लोगों को अतिरिक्त कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी। पहले TAN के लिए आवेदन करना, उसका इंतजार करना और फिर TDS जमा करना एक जटिल प्रक्रिया मानी जाती थी। नई व्यवस्था से रियल एस्टेट सेक्टर में भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि इससे लेन-देन की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बनेगी।

आम वेतनभोगी और छोटे करदाताओं के लिए राहत की एक और खबर यह है कि ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हाईकोर्ट अधिवक्ता पूरन पांडे ने बताया कि इन दोनों श्रेणियों के लिए अंतिम तारीख अभी भी 31 जुलाई ही रहेगी। इसका मतलब यह है कि फिलहाल डेडलाइन को लेकर कोई अतिरिक्त दबाव या सख्ती नहीं बढ़ाई गई है। इससे करदाताओं को अपनी योजना के अनुसार रिटर्न दाखिल करने का पर्याप्त समय मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि समयसीमा में स्थिरता रहने से करदाताओं को अनावश्यक भ्रम से भी बचाया जा सकेगा।

बजट 2026 को लेकर एडवोकेट पूरन पांडे और एडवोकेट मनु अग्रवाल ने कई अहम बिंदुओं पर अपना संदेश भी साझा किया है। उन्होंने बताया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे कर प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन राहत के अन्य माध्यम अपनाए गए हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई और अन्य करदाताओं के लिए 31 अगस्त तय की गई है। इसके अलावा मोटर एक्सीडेंट क्लेम को आयकर से छूट देने का प्रावधान भी किया गया है, जो पीड़ितों के लिए बड़ी राहत है।

गलत जानकारी देने पर सरकार द्वारा एक नया फ्रेमवर्क तैयार करने की बात भी बजट में कही गई है, जिससे जानबूझकर गलत विवरण देने वालों पर कार्रवाई हो सकेगी, जबकि छोटे और अनजाने अपराधों पर सजा की व्यवस्था समाप्त की जा रही है। एडवोकेट पूरन पांडे और एडवोकेट मनु अग्रवाल के अनुसार छोटे टैक्स अपराधों पर अब जेल की सजा नहीं होगी और आय छुपाने के मामलों में भी सजा की जगह जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के प्रयास भी बजट में दिखाई देते हैं, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। कुल मिलाकर देखा जाए तो बजट 2026 में किए गए ये बदलाव मध्यम वर्ग, छात्रों, यात्रियों और छोटे व्यवसायों के लिए राहत भरे माने जा रहे हैं। टैक्स एडवोकेट पूरन पांडे और एडवोकेट मनु अग्रवाल का मानना है कि सरकार ने इस बार कर प्रणाली को ज्यादा सरल, व्यावहारिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि इन बदलावों का वास्तविक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल करदाताओं के बीच यह बजट एक सकारात्मक संदेश देने में सफल रहा है।

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शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
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