काशीपुर। केंद्रीय बजट 2026 के सामने आते ही उत्तराखंड को लेकर जो परिदृश्य उभरकर सामने आया, उसने उम्मीदों और वास्तविकता के बीच की दूरी को फिर से स्पष्ट कर दिया। कांग्रेस एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अनुपम शर्मा ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता वाले राज्य के लिए सामान्य ढांचे में तैयार प्रावधान कभी भी अपेक्षित परिवर्तन नहीं ला सकते। उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेज़ों में राज्य का नाम दर्ज होना और योजनाओं की सूची में उसका उल्लेख दिखाई देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, जब तक कि उन योजनाओं में पहाड़ की ज़मीनी सच्चाइयों की झलक न हो। अनुपम शर्मा के अनुसार गहराई से अध्ययन करने पर यह साफ़ प्रतीत होता है कि पर्वतीय राज्य होने के नाते जिन विशेष चुनौतियों—जैसे दुर्गम भूभाग, सीमित संसाधन, पलायन और पर्यावरणीय जोखिम—को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, वे एक बार फिर नीति निर्धारण के हाशिये पर चली गईं। यही वजह है कि बजट 2026 को लेकर उत्तराखंड में यह धारणा बन रही है कि यह राज्य की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप संवेदनशील और ठोस हस्तक्षेप करने में नाकाम रहा है।
विशेष रूप से पर्वतीय राज्यों के लिए किसी अलग वित्तीय पैकेज या कर संबंधी रियायतों की घोषणा न होना कांग्रेस के अनुसार सबसे बड़ी चूक रही। अनुपम शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड जैसे दुर्गम इलाके में सड़क, पुल, अस्पताल, विद्यालय या आवास निर्माण की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में कहीं अधिक होती है। बावजूद इसके, बजट 2026 में पर्वतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किसी विशेष इंसेंटिव या सहायता ढांचे की घोषणा नहीं की गई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जब देश के अन्य राज्यों को उनकी विशेषताओं के आधार पर पैकेज दिए जा सकते हैं, तो फिर उत्तराखंड जैसे सामरिक और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील राज्य को इस दायरे से बाहर क्यों रखा गया। अनुपम शर्मा के अनुसार यह रवैया केंद्र की उस सोच को उजागर करता है, जिसमें पहाड़ को केवल संसाधन के रूप में देखा जाता है, न कि प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में।
बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को लेकर भी बजट में जिस तरह की चुप्पी देखने को मिली, उस पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अनुपम शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में आपदाएँ अब अपवाद नहीं बल्कि नियमित चुनौती बन चुकी हैं—भूस्खलन, बादल फटना, बाढ़ और सड़क धंसना आम घटनाएँ हो गई हैं। इसके बावजूद आपदा पूर्व तैयारी, स्थायी पुनर्वास और जलवायु अनुकूल विकास मॉडल के लिए कोई स्पष्ट और अलग बजटीय प्रावधान सामने नहीं आया। उनका कहना है कि केवल आपदा के बाद राहत राशि देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की आपदाओं को कम करने के लिए ठोस रणनीति और निवेश आवश्यक है। बजट 2026 में इस दिशा में किसी दीर्घकालिक योजना की कमी यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार अभी भी आपदा प्रबंधन को तात्कालिक समस्या मानकर चल रही है, न कि स्थायी नीति चुनौती के रूप में।
सीमांत क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों को लेकर भी कांग्रेस नेतृत्व ने बजट को दिशाहीन करार दिया है। अनुपम शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड के कई सीमावर्ती गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं और लगातार हो रहे पलायन ने इन इलाकों को लगभग वीरान कर दिया है। वाइब्रेंट विलेज जैसी योजनाओं का ज़िक्र तो किया गया, लेकिन उत्तराखंड-विशेष रोडमैप या समयबद्ध कार्ययोजना का अभाव साफ दिखाई दिया। उनके अनुसार केवल योजनाओं के नाम बदलने या नए टैग लगाने से हालात नहीं सुधरते, जब तक कि स्थानीय ज़रूरतों के अनुरूप संसाधन और निर्णय न लिए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है, जिसे बजट 2026 में गंभीरता से नहीं लिया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा को लेकर केंद्रीय बजट 2026 से जो उम्मीदें बंधी थीं, वे पूरी होती हुई दिखाई नहीं दीं। कांग्रेस एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अनुपम शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज भी गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए आम नागरिकों को सैकड़ों किलोमीटर दूर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जो न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कष्टदायक है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर बजट में कोई ठोस और स्पष्ट घोषणा न होना राज्य के लिए निराशाजनक है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां पहाड़ी क्षेत्रों में विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और शोध केंद्रों की भारी कमी महसूस की जा रही है। अनुपम शर्मा के अनुसार यदि सरकार वास्तव में युवाओं को राज्य में बनाए रखना चाहती है, तो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में बड़े और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता है, जिसकी झलक बजट 2026 में दिखाई नहीं दी।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की मांग उत्तराखंड में लंबे समय से उठती रही है, लेकिन केंद्रीय बजट 2026 में यह विषय एक बार फिर घोषणाओं की सीमा में ही सिमटा हुआ दिखाई दिया। कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन और इको-टूरिज़्म जैसे क्षेत्र उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, इसके बावजूद इनके लिए किसी अलग वित्तीय प्रोत्साहन या विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों तक पहुंच, बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, पर्यावरण-संतुलित ढांचे और स्थानीय युवाओं को सीधे रोज़गार से जोड़ने की स्पष्ट कार्ययोजना बजट दस्तावेज़ों में नज़र नहीं आती। अनुपम शर्मा के अनुसार यदि पर्यटन को वास्तव में उद्योग का दर्जा देना है, तो केवल भाषणों और काग़ज़ी वादों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर ठोस योजनाओं, निवेश और नीति-निर्णयों की आवश्यकता होगी। इस दृष्टि से देखें तो बजट 2026 पर्यटन के मोर्चे पर उत्तराखंड की अपेक्षाओं पर खरा उतरता प्रतीत नहीं होता।
कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं और रोज़गार के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्रीय बजट 2026 को अधूरा और दिशा से भटका हुआ बताया है। कांग्रेस एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अनुपम शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड का युवा आज बेहतर कौशल प्रशिक्षण, स्वरोज़गार और स्टार्टअप से जुड़े अवसरों की तलाश में लगातार राज्य से बाहर पलायन करने को मजबूर हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट में भले ही राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं और कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया हो, लेकिन पर्वतीय राज्यों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड-विशेष योजनाओं की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अनुपम शर्मा के अनुसार यदि स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक हुनर, कृषि आधारित गतिविधियों और पहाड़ की भौगोलिक विशेषताओं को केंद्र में रखकर योजनाएँ बनाई जातीं, तो युवाओं को अपने ही राज्य में रोज़गार के स्थायी और सम्मानजनक अवसर मिल सकते थे। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश बजट 2026 युवाओं के भविष्य को लेकर कोई ठोस भरोसा और स्पष्ट दिशा देने में असफल रहा, जिससे निराशा की भावना और गहरी हुई है।
समग्र रूप से देखा जाए तो कांग्रेस एआईसीसी सदस्य एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अनुपम शर्मा का मानना है कि बजट 2026 में उत्तराखंड का उल्लेख प्रतीकात्मक अधिक और व्यावहारिक कम रहा। उन्होंने कहा कि एक पर्वतीय राज्य होने के नाते उत्तराखंड को अतिरिक्त संवेदनशीलता, सुरक्षा और विकास की विशेष प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन यह बजट उस भरोसे पर खरा नहीं उतरा। उनके अनुसार यह समय केवल सामान्य योजनाओं का नहीं, बल्कि विशेष निर्णयों और साहसिक कदमों का था। एआईसीसी सदस्य अनुपम शर्मा ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में उत्तराखंड के विकास को लेकर गंभीर होती, तो बजट 2026 में उसकी झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती। फिलहाल, यह बजट राज्य की अपेक्षाओं को अधूरा छोड़ गया है और यही कारण है कि पहाड़ से लेकर मैदान तक असंतोष की आवाज़ें लगातार तेज़ हो रही हैं।





