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गीता भवन से शांतिकुंज तक अमित शाह का उत्तराखंड दौरा राजनीति सुरक्षा और विरोध से गरमाया

कल्याण पत्रिका के शताब्दी समारोह में गृह मंत्री के तीखे राजनीतिक संदेश, राम मंदिर और सांस्कृतिक विमर्श पर जोर, वहीं कांग्रेस के विरोध और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच ऋषिकेश-हरिद्वार का माहौल बना पूरी तरह सुर्खियों में।

ऋषिकेश। ऋषिकेश और हरिद्वार की धरती मंगलवार को उस समय राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 जनवरी को दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे। उनके आगमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं, वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस दौरे को लेकर खासा उत्साह और हलचल देखी गई। अपने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए अमित शाह ने अपराह्न करीब तीन बजे ऋषिकेश स्थित गीता भवन में आयोजित कल्याण शताब्दी महोत्सव में सहभागिता की, जहां बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य, बुद्धिजीवी और आमजन मौजूद रहे। इस अवसर पर मंच से संबोधित करते हुए उन्होंने सांस्कृतिक, वैचारिक और राजनीतिक विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती दिखाई दी, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की आशंका न रहे।

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने गीता प्रेस और उससे प्रकाशित होने वाली कल्याण पत्रिका की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के शासनकाल में देश की नीतियां पश्चिमी विचारधाराओं से प्रभावित होकर बनाई जा रही थीं, उस दौर में गीता प्रेस ने कल्याण पत्रिका के माध्यम से हिंदू धर्म, दर्शन, आचार-विचार और भारतीय कला संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया। उनके अनुसार उस समय भारतीय समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का यह एक सशक्त प्रयास था, जिसने सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा। अमित शाह ने यह भी कहा कि कल्याण पत्रिका ने केवल धार्मिक विषयों तक सीमित न रहते हुए सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी मजबूती प्रदान की, जिससे समाज में आत्मगौरव की भावना विकसित हुई।

राजनीतिक संदर्भ में बात करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि आज कल्याण पत्रिका के शताब्दी वर्ष के अवसर पर उन नीतियों से यू-टर्न लिया जा रहा है, जो कभी देश को उसकी परंपराओं से दूर ले जाने वाली थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत मूल्यों की ओर तेजी से लौट रहा है। अमित शाह ने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि साढ़े पांच सौ वर्षों बाद रामलला को अपमानजनक स्थिति से बाहर निकालकर भव्य राम मंदिर का निर्माण किया गया, जो देश की आस्था और संकल्प का प्रतीक है। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ समर्थन जताया और माहौल भावनात्मक हो गया।

गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम के समापन के बाद अमित शाह सड़क मार्ग से हरिद्वार के लिए रवाना होने वाले थे। उनके इस दौरे को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने ऋषिकेश, हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया था। आमजन को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पहले से ही वैकल्पिक मार्गों की जानकारी दी गई थी। पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि वे निर्धारित समय के दौरान बताए गए मार्गों का ही उपयोग करें और अनावश्यक रूप से उस रूट पर न जाएं, जहां से गृह मंत्री का काफिला गुजरने वाला था। प्रशासनिक अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे और कार्यक्रमों में किसी तरह की बाधा न उत्पन्न हो।

इस संबंध में देहरादून पुलिस कप्तान अजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 4रू30 से 5रू00 बजे के बीच बैराज पुल ऋषिकेश, एम्स, आईडीपीएल और कनाल गेट के रास्ते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का काफिला हरिद्वार की ओर प्रस्थान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि काफिले के गुजरने से करीब 15 मिनट पहले संबंधित मार्गों पर ट्रैफिक को रोककर डायवर्ट किया जाएगा। पुलिस कप्तान ने कहा कि इस दौरान वैकल्पिक मार्गों को पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा, जिससे आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि काफिला निकल जाने के तुरंत बाद मार्गों को पुनः आमजन के लिए खोल दिया जाएगा और यातायात सामान्य कर दिया जाएगा।

हरिद्वार और ऋषिकेश में अमित शाह के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया गया था। जगह-जगह पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई थी। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही थी और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और लक्ष्मण झूला जैसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती गई, क्योंकि यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही सामान्य दिनों में भी अधिक रहती है। देहरादून के बैराज पुल के आसपास भी पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

दरअसल, गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका कल्याण के जनवरी माह में सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में 20 से 22 जनवरी तक गीता भवन स्वर्ग आश्रम में शताब्दी वर्ष समारोह का आयोजन किया गया है। इस आयोजन में देशभर से संत, विद्वान और गणमान्य लोग शामिल हो रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पहले ही दिन मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, जिस कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। आयोजन स्थल के आसपास हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी और प्रवेश व्यवस्था को भी नियंत्रित किया गया था, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

गृह मंत्री के कार्यक्रम से पहले राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब कांग्रेस ने हरिद्वार बॉर्डर पर हंगामा किया। जानकारी के अनुसार उत्तराखंड महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला काशीपुर के किसान सुखवंत की आत्महत्या मामले और उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के विवादित बयान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन देना चाहती थीं। बताया गया कि बीती रात जब ज्योति रौतेला हरिद्वार से देहरादून की ओर जा रही थीं, तभी हरिद्वार बॉर्डर पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

ज्योति रौतेला ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री के उत्तराखंड आगमन के दौरान कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहती थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन रोककर गलत किया। उनका कहना था कि किसान सुखवंत की आत्महत्या जैसे गंभीर मामले और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू के बयान से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन देना उनका अधिकार था। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा कारणों से कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे और किसी को भी कानून व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

कुल मिलाकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह उत्तराखंड दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर जहां गीता प्रेस और कल्याण पत्रिका के शताब्दी समारोह ने सांस्कृतिक विमर्श को नई दिशा दी, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया। सुरक्षा, ट्रैफिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच यह दौरा सुर्खियों में बना रहा। आने वाले दिनों में अमित शाह के हरिद्वार और ऋषिकेश के अन्य कार्यक्रमों पर भी सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन आयोजनों के जरिए राज्य और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई संदेश सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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