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सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में भाई की शिकायत पर 26 लोगों पर गंभीर मुकदमा दर्ज

हल्द्वानी के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या के बाद परिजनों ने प्रॉपर्टी डीलरों और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए, अब प्रशासन ने जांच शुरू कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।

काशीपुर। सुखवंत सिंह कि आत्महत्या से जुड़ा मामला अब केवल एक आत्महत्या की घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह कथित प्रॉपर्टी फ्रॉड, प्रशासनिक लापरवाही और मानसिक उत्पीड़न की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में किसान सुखवंत सिंह द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद उनके परिजनों ने काशीपुर थाना आईटीआई में 26 नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर पूरे प्रकरण को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। मृतक के परिवार का आरोप है कि लंबे समय से चल रही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना ने सुखवंत सिंह को इस हद तक तोड़ दिया कि उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की कहानी है, बल्कि जमीन के सौदों में कथित धोखाधड़ी और दबाव की भयावह सच्चाई को भी उजागर करती है।

10 जनवरी को हल्द्वानी के काठगोदाम थाना क्षेत्र के गौलापार इलाके में स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने आत्महत्या कर ली थी। इस घटना से ठीक पहले उसने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें उसने कई प्रॉपर्टी डीलरों और उधम सिंह नगर जिले के कुछ पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। वीडियो में सुखवंत सिंह ने दावा किया था कि जमीन के सौदे को लेकर उसके साथ धोखा हुआ, उसे लगातार डराया-धमकाया गया और न्याय के लिए दर-दर भटकने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इस वीडियो के वायरल होते ही मामला राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

घटना के अगले दिन 11 जनवरी की देर शाम किसान का शव उसके परिजन काशीपुर लेकर पहुंचे। शव के पहुंचते ही माहौल गमगीन होने के साथ-साथ आक्रोशपूर्ण भी हो गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की कि आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो को ठोस सबूत मानते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग भी जोर पकड़ने लगी। परिजनों का कहना था कि यदि समय रहते प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया होता, तो शायद आज सुखवंत सिंह जिंदा होता।

मामले की गंभीरता को देखते हुए 12 जनवरी की सुबह जिले के कप्तान मणिकांत मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थाना आईटीआई के एसओ और एक उप निरीक्षक को सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा पैगा चौकी के चौकी इंचार्ज समेत कुल 10 पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर किया गया। इस कार्रवाई को प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा गया, लेकिन परिजनों का कहना है कि केवल निलंबन से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई जरूरी है। पुलिस विभाग के भीतर हुई इस कार्रवाई ने यह संकेत जरूर दिया कि मामला साधारण नहीं है और इसमें कई स्तरों पर जांच की आवश्यकता है।

अब इस पूरे प्रकरण में थाना आईटीआई पुलिस ने मृतक के भाई परविंदर सिंह की तहरीर के आधार पर 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। परविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया कि उसने और उसके भाई सुखवंत सिंह ने बक्सौरा कुंडा निवासी बलवंत सिंह उर्फ काला और कुलवंत सिंह से कुल सात एकड़ जमीन खरीदी थी। शुरुआत में यह सौदा सामान्य प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में विक्रेताओं ने बताया कि उक्त जमीन पहले ही प्रॉपर्टी डीलर अमरजीत सिंह, आशीष चौहान उर्फ पटवारी और कुलविंदर सिंह को बेची जा चुकी है और आगे की बातचीत उन्हीं से करने को कहा गया।

शिकायत के मुताबिक, इसके बाद सुखवंत सिंह और परविंदर सिंह ने प्रॉपर्टी डीलरों से संपर्क किया और 34 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से 6.84 एकड़ जमीन का सौदा तय हुआ। रजिस्ट्री के दिन दोनों भाई 50 लाख रुपये देने के लिए तैयार थे, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री नहीं की गई। आरोप है कि इसके बाद भी लंबे समय तक अलग-अलग बहाने बनाकर उन्हें टालमटोल किया जाता रहा। कभी दस्तावेज अधूरे होने की बात कही गई तो कभी अन्य कारणों का हवाला देकर सौदे को लटकाया गया, जिससे दोनों भाई मानसिक तनाव में आ गए।

परविंदर सिंह का आरोप है कि जमीन खरीद के नाम पर आरोपियों को बैंक खातों के माध्यम से 1 करोड़ 2 लाख रुपये दिए गए और इसके अलावा नकद रकम भी सौंपी गई। इस तरह कुल मिलाकर 2 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान किया गया। बाद में अन्य लेन-देन जोड़ने पर यह राशि बढ़कर 3 करोड़ 82 लाख रुपये तक पहुंच गई। इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद न तो जमीन की रजिस्ट्री कराई गई और न ही पैसे वापस किए गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि बार-बार संपर्क करने पर उन्हें धमकियां दी जाती थीं और दबाव बनाया जाता था।

तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले को सुलझाने के नाम पर रिश्तेदार सुखवंत सिंह पन्नू को आगे किया गया। आरोप है कि उसने अन्य आरोपियों से मिलकर बाजपुर रोड पर एक अन्य प्लॉट का सौदा 4 करोड़ 5 लाख रुपये में करवा दिया। परविंदर सिंह का कहना है कि यह सौदा भी संदिग्ध था और इसमें भी उन्हें ठगा गया। लगातार बढ़ते आर्थिक नुकसान, कानूनी उलझनों और आरोपियों द्वारा की जा रही कथित प्रताड़ना ने सुखवंत सिंह को अंदर से तोड़ दिया था।

परिवार का दावा है कि सुखवंत सिंह को न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि कई बार शारीरिक दबाव भी बनाया गया। उसे डराया गया कि यदि उसने आवाज उठाई तो परिणाम गंभीर होंगे। इन परिस्थितियों में वह खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करने लगा था। आखिरकार 10 जनवरी 2026 की रात उसने हल्द्वानी के होटल में आत्महत्या कर ली। परिजनों का कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि परिस्थितियों द्वारा थोपी गई मौत है, जिसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।

पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे में अमरजीत सिंह, दिव्या, रविंद्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविंदर उर्फ जस्सी, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरिवर सिंह, महिपाल सिंह, शिवेंद्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेंद्र, राजेंद्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, विजेंद्र, पूजा निवासी थाना आईटीआई उधम सिंह नगर और जहीर निवासी गड्ढा कॉलोनी काशीपुर के नाम शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ धारा 108 और 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि जमीन के सौदों में पारदर्शिता और पीड़ितों की सुनवाई कितनी जरूरी है। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन जब व्यक्ति को हर ओर से निराशा और उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो वह टूट जाता है। अगर किसी के मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हों, किसी मित्र या परिजन को लेकर चिंता हो या भावनात्मक सहारे की जरूरत हो, तो सहायता उपलब्ध है। स्नेहा फाउंडेशन की 24Û7 हेल्पलाइन 04424640050 और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की हेल्पलाइन 9152987821 (सोमवार से शनिवार सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक) ऐसे समय में जीवन बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं।

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