काशीपुर। शहर के लिए चौदह जनवरी की सुबह केवल एक तारीख नहीं, बल्कि स्मृति, सम्मान और सामाजिक सरोकारों का एक विशेष संगम बनने जा रही है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पूरा शहर एक साथ अपने पुरखों को याद करने, उनकी विरासत को नमन करने और समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित करने के संकल्प के साथ एक ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनेगा। इस दिन काशीपुर में ऐसा कार्यक्रम होने जा रहा है, जिसमें भक्ति, राष्ट्रभाव, साहित्य, समाजसेवा और स्वास्थ्य जैसे अनेक आयाम एक ही मंच पर एकत्र होंगे। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संदेश है कि अपनी जड़ों, अपने पुरखों और समाज के लिए कुछ करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। पूरे शहर में इस आयोजन को लेकर उत्सुकता का माहौल है और लोग इसे काशीपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में देख रहे हैं।
इस विशेष आयोजन के केंद्र में अमित शर्मा हैं, जो अपने दादाजी पंडित श्यामलाल शर्मा जी की पुण्यतिथि को स्मृति दिवस के रूप में मनाने जा रहे हैं। चौदह जनवरी, बुधवार को सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कई अनूठे पहलुओं को जोड़ा गया है। अमित शर्मा के अनुसार इस दिन का आरंभ राष्ट्रगान जन गण मन से होगा, जो अपने आप में काशीपुर के लिए एक नई परंपरा की शुरुआत मानी जा रही है। कार्यक्रम में भक्ति भाव से ओतप्रोत भजन होंगे, जिनके माध्यम से प्रभु स्मरण किया जाएगा। इसके साथ ही इसी दिन वर्ष 2026 के लिए एक सौ एक प्रतिभाओं के सम्मान समारोह का संकल्प भी लिया जाएगा। यह आयोजन न केवल स्मरण का दिन होगा, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मानित करने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
आयोजक अमित शर्मा ने बताया कि उनके लिए यह दिन भावनात्मक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके दादाजी पंडित श्यामलाल शर्मा जी की पुण्यतिथि से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि सौभाग्य की बात है कि उनके दादाजी का नाम भी श्यामलाल शर्मा था और उनके आराध्य देव भी खाटू श्याम जी हैं, जिनका आशीर्वाद उन्हें सदैव मिलता रहा है। इसी भावनात्मक जुड़ाव के चलते इस कार्यक्रम को और भी विशेष रूप दिया गया है। इस अवसर पर भजन गायन के लिए शुभम तिलकधारी जैसे चर्चित कलाकार मौजूद रहेंगे, जबकि साहित्यिक रंग भरने के लिए साहित्य दर्पण संस्था के कटियार जी की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम का मूल विषय “हमारे पुरखे, हमारी विरासत” रखा गया है, जो यह संदेश देता है कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी परंपराओं और मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
इस आयोजन की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सरोकारों को भी समान महत्व देगा। क्लीन एंड ग्रीन फाउंडेशन की ओर से इस दिन एक निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिससे शहर के नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। आयोजकों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है, और इसी सोच के तहत इस शिविर को कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। इस पहल के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि किसी भी स्मृति दिवस या सांस्कृतिक आयोजन की सार्थकता तभी है, जब उससे समाज को वास्तविक लाभ भी मिले। काशीपुर जैसे शहर में एक ही मंच पर भजन, साहित्य, सम्मान और स्वास्थ्य सेवाओं का समागम अपने आप में एक मिसाल माना जा रहा है।
भजन कार्यक्रम को लेकर आयोजकों ने विशेष रूप से स्पष्ट किया है कि यह केवल “भजन संध्या” नहीं, बल्कि “भजन दिवस” है। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में भक्ति का निरंतर प्रवाह रहेगा। शुभम तिलकधारी ने इस आयोजन को काशीपुर के लिए सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि मकर संक्रांति के दिन इस तरह का कार्यक्रम जनता के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत जन गण मन से और समापन वंदे मातरम के साथ किया जाएगा, जो राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम होगा। उन्होंने काशीपुर की जनता से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में बाबा रिसोर्ट पहुंचकर इस आयोजन का हिस्सा बनें और भक्ति, सेवा व संस्कृति के इस महोत्सव का लाभ उठाएं।
क्लीन एंड ग्रीन संस्था के अध्यक्ष रर्वेश बंसल ने भी इस आयोजन को काशीपुर के लिए एक नई नजीर बताया। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी अमित शर्मा द्वारा समाज के लिए कई सराहनीय प्रयास किए गए हैं, जिनमें एक सौ एक रत्न सम्मान समारोह जैसे कार्यक्रम शामिल रहे हैं। इस बार भी पुरखों की स्मृति को केंद्र में रखकर जिस तरह से बहुआयामी आयोजन की रूपरेखा तैयार की गई है, वह प्रशंसनीय है। बंसल ने कहा कि निशुल्क चिकित्सा शिविर, कवि सम्मेलन और भजन दिवस जैसे कार्यक्रमों का एक साथ आयोजन यह दर्शाता है कि समाज सेवा और सांस्कृतिक चेतना को एक ही मंच पर कैसे जोड़ा जा सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी करें और इसे ऐतिहासिक बनाने में योगदान दें।
चिकित्सा शिविर की विस्तृत जानकारी देते हुए आयोजकों ने बताया कि यह शिविर पंडित श्यामलाल शर्मा जी की पुण्यतिथि पर स्मृति दिवस के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर में डॉक्टर यशपाल सिंह रावत जी अपनी टीम के साथ सेवाएं देंगे। उनके साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजीशियन, डेंटल सर्जन, गायलोलॉजिस्ट और चर्म रोग विशेषज्ञ एवं हेयर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉक्टर अरुण कुमार भी मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त एक्यूप्रेशर के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है, जिसमें एक्यूप्रेशर पॉइंट, मेथी दाना जैसी विधियों के जरिए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इस शिविर में सभी दवाइयां भी निशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि आर्थिक कारणों से कोई भी व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे।
कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक और साहित्यिक व्यक्तियों ने भी इस पहल की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि अमित शर्मा ने हमेशा दूसरों को आगे बढ़ाने की सोच के साथ काम किया है, चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, कला हो, संगीत हो या सामाजिक सेवा। हाल ही में रुड़की में आयोजित शिक्षा रत्न सम्मान समारोह में अमित शर्मा को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाना काशीपुर के लिए गर्व की बात है। वक्ताओं ने कहा कि बड़ा वही होता है, जो दूसरों को बड़ा बनाए, और अमित शर्मा इसी विचारधारा पर चलते हुए समाज के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। चौदह जनवरी को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम भी उसी सोच का विस्तार है, जिसमें पुरखों की स्मृति के साथ-साथ समाज की प्रतिभाओं और जरूरतमंदों का भी ध्यान रखा गया है।
कार्यक्रम में कवि सम्मेलन को भी विशेष स्थान दिया गया है, जिसे साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। साहित्य दर्पण संस्था के जितेन्द्र कटियार जी ने बताया कि “हमारे पुरखे, हमारी विरासत” विषय पर आयोजित यह कवि सम्मेलन लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन काशीपुर में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर हो रहा है, जहां भक्ति, साहित्य, स्वास्थ्य और सम्मान एक साथ देखने को मिलेगा। इसे उन्होंने सामाजिक इकोसिस्टम का उदाहरण बताया, जिसमें समाज के हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ है। इस तरह का समग्र आयोजन न केवल वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में भी इसकी चर्चा होती रहेगी।
कुल मिलाकर चौदह जनवरी को बाबा रिसोर्ट में होने जा रहा यह आयोजन काशीपुर के लिए एक यादगार दिन बनने की पूरी संभावना रखता है। सुबह दस बजे से दोपहर दो बजे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में शहरवासियों को भजन दिवस, कवि सम्मेलन, निशुल्क चिकित्सा शिविर और सामाजिक सम्मान जैसे अनेक पहलुओं का अनुभव एक साथ मिलेगा। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि सभी कार्यक्रम बाबा रिसोर्ट में ही संपन्न होंगे और समय का विशेष ध्यान रखा गया है। शहर के लोगों से अपील की गई है कि वे समय पर पहुंचकर इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनें। यह दिन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि काशीपुर की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक जिम्मेदारी और पुरखों के प्रति सम्मान की जीवंत तस्वीर बनकर उभरेगा।



